How can you explain that Mahabharata is a dynamic book? In Hindi

महाभारत का विकास केवल इसके मूल संस्कृत पाठ (Version) तक ही सीमित नहीं रहा। यह एक गतिशील ग्रंथ बन गया। भिन्न-भिन्न व्यक्ति भिन्न-भिन्न युग में इसमें परिवर्तन करते रहे। समय और परिस्थितियों के साथ इसमें अनेक संदेश जुड़ते गये और यह समाज के आदर्शों और मानकों को प्रभावित करता रहा है।

सदियों से इस महाकाव्य के अनेक पाठान्तर भिन्न-भिन्न भाषाओं में लिखे गये। इसकी पृष्ठभूमि में विभिन्न लेखकों, सामान्य लोगों एवं समुदायों के मध्य हुए संवाद एवं विचारों के आदान-प्रदान थे।

महाभारत की मुख्य कथा की अनेक पुनर्व्याख्याएँ की गयीं। अनेक कहानियाँ जिनका जन्म एक क्षेत्र विशेष में हुआ तथा जिनका प्रचार एक निश्चित लोगों के बीच हुआ, उन सबको इस महाकाव्य में समाहित कर लिया गया। इन परिवर्तनों से इस महाकाव्य की गतिशीलता और समकालीनता बनी रही।

महाभारत सामाजिक, पारिवारिक और सांस्कृतिक द्वन्द्वों के समाधान का सम्यक मार्ग दिखलाता है। इस महाकाव्य में वर्णित धर्म, आचार-विचार, संस्थाएँ, प्रथाएँ, प्रणालियाँ और आदर्श सदियों से भारतीयों को प्रेरित करते रहे हैं और हमारे सांस्कृतिक जीवन के निर्माण में प्रमुख भूमिका निभाते रहे हैं। जनसाधारण के लिए यह ग्रन्थ सामाजिक और धार्मिक आचार-विचार के मेरुदण्ड और संस्कृति के प्राण रहा है। सदियों से भारतीयों ने अपने सुख-दुख में, अपने श्रमपूर्ण दैनिक जीवन के द्वन्द्वों में इस महाकाव्य की ओर प्रेरणा और शान्ति के लिए देखा है।

जिन श्रेष्ठ आदर्शों का वर्णन इस महाकाव्य में है, उनके अनुसार आचरण करना प्रत्येक हिन्दू अपना परम कर्तव्य समझता आ रहा है और उनके अनुसार ही अपना जीवन व्यतीत करने का प्रयास करता है। यह गृहस्थ जीवन के उन उज्ज्वल और उच्च आदर्शों को लोकप्रिय और मनोरंजक ढंग से प्रस्तुत करता है, जिनकी जड़ सदियों से भारतीय विचारधारा और अनुश्रुति में दृढ़ हो गयी है। इस महाकाव्य में वर्णित विचार और उच्च आदर्श सदियों से हमारे व्यक्तिगत और राष्ट्रीय चरित्र का निर्माण कर रहे हैं। इस महाकाव्य की घटनाएँ, कथानक, संदेश, उपदेश आदि अपनी गतिशीलता और सामयिकता के कारण जन-मानस को प्रभवित करते रहे हैं।

इसके प्रसंगों का जीवंत मूर्तियों एवं चित्रों में तथा नाटकों एवं नृत्यों में प्रदर्शन ने महाभारत को और भी गतिशील (Dynamic) बना दिया।