Why did Gandhiji start the non-cooperation movement? In Hindi

घटनाएँ जिनके परिणामस्वरूप असहयोग आन्दोलन प्रारम्भ किया गया, निम्नलिखित थीं -

(i) प्रथम विश्व युद्ध : प्रथम विश्व युद्ध के दौरान भारतीयों ने अंग्रेजों को सहयोग दिया था ताकि युद्ध के पश्चात वह भारतीयों के हितों की रक्षा करेंगे। परन्तु युद्ध के पश्चात अंग्रेजों ने ऐसी कोई कार्रवाई नहीं की। 1919 ई. के कानून द्वारा किये गये सुधारों से भारतीय सन्तुष्ट नहीं हुए।

रॉलेट एक्ट : 1914-18 के विश्व युद्ध के दौरान अंग्रेजों ने प्रेस पर प्रतिबंध लगा दिया था और बिना जाँच के कारावास की अनुमति दे दी थी। बाद में कठोर उपायों को जारी रखने के लिए सर सिडनी रॉलेट की अध्यक्षता वाली समिति के सुझाव पर भारतीयों के विरोध के बावजूद रॉलेज एक्ट पास किया गया। इसके अन्तर्गत राजनीतिक गतिविधियों के विरूद्ध कठोर कार्रवाई करने की शक्तियाँ सरकार को दे दी गयीं। गाँधी जी ने इस कानून का विरोध करने का निश्चय किया

(iv) जलियाँवाला बाग हत्याकांड : पंजाब में रॉलेट कानून के विरोध में प्रदर्शन और हडताले हड। सरकार द्वारा कठारता स इन गतिविधियों का दमन करने की नीति अपनायी

गीत कांग्रेसी नेता डा. सत्यपाल और डा. किचलू को गिरफ्तार किया गया। इन घटनाओं के परिणामस्वरूप पंजाब में स्थिति विस्फोटक बन गई। अन्त में 13 अप्रैल 1919 ई. को जनरल डायर द्वारा जलियाँवाला बाग में एक राष्ट्रवादी सभा पर गोली चलाने से 400 से अधिक लोगों की मृत्यु हो गई।

भारतीय मसलमानों में असन्तोष : विश्व युद्ध में तुर्की की पराजय से भारतीय मुसलमानों का आशका था कि ब्रिटिश सरकार तुकी के सुल्तान जोकि मुसलमानों का धार्मिक था से कठोर संधि करेगी। अतः वह ब्रिटिश सरकार पर दबाव डालना चाहते थे ताकि कठोर संधि न की जा सके। वह खिलाफत आन्दोलन प्रारम्भ करना चाहते थे। गाँधी जी हिन्दू-मुस्लिम एकता स्थापित करना चाहते थे। (V) स्वराज्य: काग्रेस द्वारा स्वराज्य की माग का प्रस्ताव पास किया

प्रस्ताव पास किया गया। गाँधी जी ने कहा कि अगर असहयोग का ठीक से पालन किया गया तो भारत एक वर्ष के भीतर स्वराज्य प्राप्त कर सकेगा।

इस प्रकार विश्व युद्ध की समाप्ति पर भारतीयों के हितों की रक्षा न करना, रॉलेज कानून, जलियॉंवाला बाग हत्याकांड, कांग्रेस द्वारा स्वराज्य की प्राप्ति का प्रस्ताव वे मुख्य घटनाए थीं जिनके परिणामस्वरूप असहयोग आन्दोलन चलाया गया।