Maya and the tortoise story in hindi

बहुत समय पहले, दूर देश के एक छोटे से गाँव में, माया नाम की एक लड़की रहती थी. वो और उसके पिता एक फूस से बनी छत वाले छोटे से घर में रहते थे. उसके पिता एक कवि और विद्वान थे. वे गरीब थे लेकिन बहुत स्वाभिमानी थे.

जब माया बहुत छोटी थी, तभी उसकी माँ की मृत्यु हो गई थी. मृत्यु के समय माँ ने माया को अपने पास बुलाया और उसे एक कहानी सुनाई. 

"मेरी बेटी," माँ ने कमजोर आवाज़ में कहा, "ध्यान से सुनो. जब तुम बड़ी होगी तब तुम एक राजकुमारी बनोगी. मुझे यह पता है क्योंकि तुम्हारे जन्म से पहले मैंने एक सपना देखा था. वो सपना एक भविष्यवाणी था. वो ज़रूर सच होगा. मैंने सपने में एक चमकते हए सितारे को स्वर्ग से नीचे आते हए देखा था और मैंने उसे दोनों हाथों में पकड़ा था. इसलिए, अब से तुम अपना ध्यान रखना और साथ में अपने पिता की भी देखभाल करना. तुम मुझे और नहीं देख पाओगी. लेकिन याद रखना - मेरी आत्मा तुम्हें हमेशा देखती रहेगी."

माँ की मृत्यु से माया और उसके पिता बहत दुखी हए. यहां तक कि आकाश में भी उनके लिए आंसू बहाए. लेकिन जिंदगी चलती रही. पिता ने माया को खुश और स्वस्थ रखने के लिए सब कुछ किया. माया हर साल और अधिक सुंदर हो रही थी. वो अपनी उम्र के हिसाब से बहत बुद्धिमान भी थी.

वसंत के एक दिन माया फूलों और जंगली सब्जियों को बीनने के लिए खेतों में से गुजर रही थी. पक्षी कलरव कर रहे और खेत चमकीले, फूलों से ढंके थे. फूल लम्बी सर्दियों के बाद जमीन से बाहर निकलकर बेहद खुश थे. पृथ्वी, वसंत के गीत गुनगुना रही थीं.

माया अपनी पसंदीदा चट्टान के पास रुकी. किंवदंती के अनुसार वो चट्टान जादुई थी. लोग उस पवित्र चट्टान पर अपनी मन्नतें मांगने आते थे. माया ने भी वहां पर अपनी मनोकामना मांगी थी. पर आज उसे चट्टान के ऊपर एक कछुए का बच्चा बैठा हुआ मिला.

"नमस्ते," माया ने उससे कहा. "तुम वहाँ कैसे पहँचे? क्या तुमने भी अपनी माँ को खो दिया? फ़िक्र न करो मैं तुम्हारी देखभाल करूँगी. मेरी भी माँ नहीं है." और फिर माया धीरे से कछुए को । उठाकर अपने घर ले गई. उसके फूलों के बगीचे में कछुआ बहत खुश था. माया ने उसे बोके-डौंगी नाम दिया.

प्रत्येक दिन बोके-डोंगी रसोई के दरवाजे पर दिखाई देता था और माया उसे खाने के लिए कुछ देती थी. यहां तक कि जब माया

और उसके पिता के पास खाने को बहुत कम भोजन होता था, तो भी वो कछुए के लिए ज़रूर कुछ बचाकर रखते थे.

बोके-डोंगी भी हर साल बड़ा । और बड़ा होता गया. जब भी माया फल-सब्ज़ियां या जड़ी बूटियों को खोजने के लिए ग्रामीण इलाकों में जाती, तो कछुआ भी धीरे-धीरे उसके पीछे आता था.

एक सर्दियों में माया के पिता बीमार पड़ गए. वे अब कोई काम नहीं कर पाते थे. घर में न तो दवा के लिए पैसा था और न खाने के लिए. माया ने कुछ पैसे कमाने की तरकीब सोची, लेकिन सभी खेत बर्फ से ढंके थे और वो जंगली जामन या जड़ी-बूटियाँ नहीं इकट्ठी कर पाई.

पर उसे पहाड़ी के दूसरी ओर एक समृद्ध गाँव का पता था. उस गाँव को एक राक्षस ने शाप दिया था.

राक्षस एक इल्ली के वेश में ठंडी रात में पूरे चाँद वाले दिन गाँव में आता था. वो गाँव के बच्चों पर हमला करता था. उससे लोग बहुत दहशत में रहते थे. अंत में उन्होंने कहा. "अगर हम एक व्यक्ति का बलिदान करें, तो शायद यह इल्ली हमें बक्श दे."

फिर उसके बाद एक परंपरा शुरू हुई. साल में एक बार, वे राक्षस इल्ली के लिए एक युवा लड़की खरीदकर उसे गांव के बाहर छोड़ देते थे. अगली सुबह, लड़की हमेशा के लिए कहीं चली जाती थी, लेकिन उससे गाँव एक साल तक सुरक्षित रहता था.

माया ने फैसला किया कि अपने पिता के इलाज के लिए धन जुटाने के लिए वो उस राक्षसी इल्ली का सामना करेगी. गांव वाले बलिदान होने के लिए तैयार होने वाली किसी भी बहादुर युवती को इस काम के लिए बहुत -पैसा देते थे.

एक दिन शाम होने के बाद, माया चुपके से दूसरे गाँव में पहाड़ चढ़ कर गई. आसमान में भारी बादल छाए थे. ग्रामीणों ने उसका स्वागत किया और उसका आभार माना, की वो उस भयानक राक्षसी इल्ली से मिलने को तैयार थी.

"धन्यवाद," उन्होंने कहा, और फिर उन्होंने चंगजा पेड़ के नीचे एक समारोह आयोजित किया. चुंगजा वृक्ष धार्मिक समारोहों के आयोजन लिए एक विशेष सभा स्थल था, जो गांव के प्रवेश द्वार की सुरक्षा करता था. समारोह में, गाँव के बुजुर्गों ने माया की आत्मा को आशीर्वाद दिया और अपने गाँव की सुरक्षा के लिए प्रार्थना की. फिर उन्होंने उसे खूब पैसे दिए.

माया ने उन पैसों से अपने पिता के लिए दवाएं और एक साल के लिए पर्याप्त भोजन और कपड़े खरीदे. उसने पिताजी की अच्छी देखभाल की जिससे उनका स्वास्थ्य ठीक हो गया. जल्द ही वो ठीक हो गए और उनमें खुद की देखभाल करने की क्षमता आ गई.

अंत में वो भयानक रात आई, जनवरी में पूर्णिमा की रात. माया ने अपने पिता का पसंदीदा भोजन तैयार किया और आखिरी बार उनकी सेवा की. वो जानती थी कि वो उन्हें फिर कभी नहीं देख पाएगी.
फिर पिताजी को चूमने के बाद वो अपने छोटे से घर से बाहर निकली. बोकेडौनी ने भी धीरे-धीरे उसका पीछा किया. फिर माया उसके पास गई.

"कृपया मेरी बात मानों प्रिय," उसने कछुए को चूमते हुए कहा. "मैं तुमसे बहुत प्यार करती हूँ, लेकिन तुम्हें घर पर रहना चाहिए और मेरे पिता की देखभाल करनी चाहिए, क्योंकि मैं वापस नहीं लौट सकंगी." फिर वो पहाड़ी की ओर तेज़ी से दौड़ी ताकि बोको-डोंगी उसका पीछा न कर सके.

उस रात एक जानलेवा सन्नाटा था. इतनी चुप्पी थी कि धरती और आसमान भी सांस लेने से डर रहे थे. ठंडी, चमकीली चाँदनी ने पहाड़ का रास्ता रोशन किया और पत्तों के पेड़ों के नीचे अंधेरा छाया था. माया को वे लंबे काले राक्षस लग रहे थे जो उसे पकड़ने के लिए आ रहे थे. वो ठंड और डर से कांप रही थी.
जब माया शापित स्थान पर पहंची, तो वो घुटनों के बल गिर गई. फिर उसने खुद को अपने कंबल में लपेटौ, और फिर अपने भाग्य की प्रतीक्षा करने लगी. दुखी होकर उसने अपनी माँ के अंतिम शब्दों को याद किया, "एक दिन तुम राजकुमारी बनोगी," और, "मेरी आत्मा हमेशा तुम्हारी रक्षा करेगी."

माया के ऊपर एक बर्फीली हवा बही. अचानक, एक गर्जन वाले शोर ने आकाश में गड़गड़ाहट की और वहां की चुप्पी को तोड़ा. अंधेरे के माध्यम से कोई माया के और करीब आया. भय से माया का गला घुटने लगा.
उसके पीछे-पीछे, धीमी गति से चलते हए उसका कछुआ भी आ रहा था. उसने माया की आज्ञा की अनदेखी की थी. वो अब पहले की तुलना में बहुत बड़ा हो गया था. जैसे ही विशालकाय राक्षसी इल्ली अपने पुरस्कार का दावा करने के लिए अंधेरे से प्रकट हई, कछए ने अपना सिर उठाया और उस पर एक जहरीली सांस छोड़ी.
बोके-डोंगी और राक्षसी इल्ली के बीच पूरी रात घमासान लड़ाई हुई.

अगली सुबह गांव वाले सावधानीपूर्वक और चुपचाप वहां आए. रात में हल्की बर्फ गिरी थी. विशाल राक्षसी इल्ली
और बड़े कछुए के मृत शरीर एक-दूसरे की बगल में ही पड़े थे. फिर लोग उत्सुकता से माया को खोजने लगे.
"राक्षसी इल्ली मर चुकी है!" गांव वाले खुशी से । चिल्लाए. "कछुए ने माया की जान बचाई, अब हमारा गांव हमेशा के लिए सुरक्षित रहेगा." फिर गांववासियों ने जश्न मनाने के लिए एक बड़ी दावत आयोजित की. "उसने पिता को बचाने के लिए अपने जीवन को दांव पर लगा दिया था," उन्होंने कहा, और फिर उन्होंने अचरज से अपने सिर हिलाए. फिर अपनी खुशी व्यक्त करने के लिए वे खूब नाचे-गाए.
फिर साहसी लड़की माया की खबर दुनिया भर में तेजी से फैली. जल्द ही उसकी कहानी स्वर्ग और पृथ्वी के सम्राट तक पहुंची.

"मैं इस युवा बहादुर महिला को पुरस्कृत करना चाहता हूँ," सम्राट ने कहा. फिर उन्होंने अपने दूतों के ज़रिए माया के घर रेशम के कपड़े, गहने और अद्भुत उपहार भेजे. "उसे महल में आमंत्रित करो," सम्राट ने आदेश दिया.
सम्राट ने माया और उसके पिता के रहने के लिए बादलों में एक सुंदर घर बनवाया. वहां पहँचने के बाद उन्होंने माया से कहा, "जब वो अपनी यात्रा से लौटे, तो तुम मेरे बेटे राजकुमार से ज़रूर मिलना."

माया उस दिन की प्रतीक्षा करने लगी जिस दिन उसकी राजकुमार से भेंट होगी. फिर उसने अपने सुहावने गीतों को सिलकर एक संदर रेशम की पोशाक बनाई.फिर माया ने एक कविता लिखी थी. कविता लिखने की कला उसने अपने पिता से सीखी थी.
शीतल चाँद सब देखता है कछुआ और युवती वसंत में, जीवन लौटता है.
(जापानी हाईकू)

आखिर वो दिन आया जब राजकुमार दूर-दराज़ के देशों की अपनी यात्रा से वापिस लौटा. वो एक अजीब जानवर पर सवार था जिसे माया ने पहले कभी नहीं देखा था. जब वे दोनों मिले, तो उनमें पहली ही नजर में प्यार हो गया.

जल्द ही राजकुमार ने माया को अपनी दुल्हन बनने का निमंत्रण दिया. इस निर्णय से सम्राट बहुत खुश हुआ. उनके घुमन्तु बेटे ने एक बहादुर
और सुन्दर लड़की से शादी करने का फैसला जो किया था. उन्होंने खुद से कहा, "यह स्वर्ग में रची गई शादी है."
सम्राट ने महल में एक शाही शादी के आयोजन किया जिसमें दुनिया भर के लोगों को बलाया गया. शॉदी में कई देशों के लोग शामिल हुए और उसका जश्न कई दिनों तक चला.

शादी के बाद, सम्राट ने सुखी दंपति को एक सुंदर राज्य भेंट किया, जहां पर वे शांति से रह सकें और शासन कर सकें. फिर वे वहाँ पर हमेशा खुशी-खुशी रहे.