(Esop story in Hindi)


 भेड़िया और शेर

भेड़ो के बाड़े से एक मेमना चुरा कर एक भेड़िया अपनी मॉंद की ओर ले जा रहा था। रास्ते में उसे एक शेर मिला जिसने झपट कर मेमना उससे छीन लिया।

एक सुरक्षित जगह पर खड़े होकर वह भेड़िया चिल्लाया, ''तुम चोर हो! वह मेमना मेरा है.'' उसकी बात सुन कर शेर ने चिढ़ाते हुए कहा, ''मेमना तुम्हारा है, सच में? शायद तुम्हारे किसी मित्र ने यह तुम्हें दिया था,'' जो व्यक्ति चोरी करता है अगर वह लूट लिया जाए तो उसे शिकायत करने का अधिकार नहीं होता।

आदमी और वनदेवता

एक आदमी और एक वनदेवता एक साथ यात्रा कर रहे थे। एक दिन ठंड थी और आदमी ने अपने हाथों पर फूंक मारी ''तुम ने ऐसा क्यों किया?'' वनदेवता ने पूछा। ''अपने हाथो को गर्म करने के लिए मैंने उन पर फूॅंक मारी,'' आदमी ने समझाया। खाने के लिए वह एक सराय में आयो। आदमी ने अपने गर्म सूप पर फूॅंक मरी। ''तुम ने ऐसा क्यों किया?'' वनदेवता ने पूछा। ''अपने सूप को ठंडा करने के लिए मैंने उस पर फूॅंक मारी,'' आदमी ने बताया। वनदेवता यह कहते हुए भाग गया, ''मुझे उस आदमी से कुछ लेना—देना नहीं जो अपनी फूॅंक से गर्म भी कर सकता है और ठंडा भी!'' जो बात हमें समझ नहीं आती हम उसका विश्वास नहीं कर पाते।

खरगोश और कछुआ

कछुए की धीमी चाल के लिए खरगोश उसका मजाक उड़ाया करता था। ''जहॉं मैं जाना चाहता हू वहॉं मै पहुॅंच जाता हूॅं तुम्हारी तरह,'' कछुए ने कहा। ''लेकिन जहॉं मैं जाना चाहता हूॅं मैं बहुत जल्दी पहुॅंच जाता हूॅं,'' लोमड़ी ने सुझाव दिया कि इस विविद को सुलझाने के लिए उन्हें दौड़ लगानी चाहिए। इस बात पर खरगोश इतने जोर से हॅंसा कि कछुए तो गुस्सा आ गया। ''मैं तुम्हारे साथ दौड़ लगाऊॅंगा और मैं ​जीतूॅंगा!'' कछुए ने कहा। दौडत्र शुरू ही हुई थी कि खरगोश आख से ओझल हो गया, वह इतनी तेज दौड़ा। खरगोश को अपनी जीत का इतना विश्वास था कि थोड़ी देर सोने के लिए वह रास्ते के किनारे एक जगह लेट गया। कछुए धीरे—धीरे लगातार चलता रहा। जब कछुआ, समापन रेखा पार कर, दौड़ जीत रहा था तब खरगोश नींद से उठा। धीरे पर स्थिर चाल से चलने वाला ही जीतता है। 

खरगोश और शिकारी कुता

एक शिकारी कुत्ता एक खरगोश के पीछे दौड़ा लेकिन बडत्री दूर तक दौड़ने के बाद उसने उसका पीछा करना छोड़ दिया। एक गड़ेरिये ने उकसा मज़ाक उड़ाया, ''खरगोश ज्यादा अच्छा दौड़ता है।''

कुत्ते ने कहा, ''तुम्हें अंतर दिखाई नहीं पड़ता। मैं खाने के लिए दौडत्र रहा था ​लेकिन वह जान बचाने के लिए दौड़ रहा था।'' हम कोई काम कैसे करते हैं यह इस बात पर निर्भर करता है।

लोमड़ी और सारस

एक दिन एक लोमड़ी ने एक सारस को भोजन पर बुलाया। खाने के लिए उसने थाली में सिर्फ सूप परोसा। अपनी लंबी चोंच से सारस कुछ न खा पाया। लोमड़ी को लगा कि उसने सारस को मूर्ख बना दिया था। सारस ने भी एक दिन लोमडत्री को खाने पर बुलाया। सारस ने खाना एक सुराही में परोसा जिसका मुॅंह बहुत छोटा था। लोमड़ी खाने को चख भी न पाई। हमकं दूसरों के साथ वैसा व्यवहार करना चाहिए जैसे व्यवहार की हम उनसे अपेक्षा करते है। 

प्यासा कौवा

एक प्यासे कौवे को एक मटका दिखाई दिया जिस में थोड़ा सा पानी था। लेकिन पानी तक उसकी चोंच पहुंची नही। उसने कुछ कंकड़ इकट्ठे किये। फिर उसने एक—एक कर वह कंकड़ मटके में डाल दिए। हर कंकड़ ने पानी को थोड़ा ऊपर उठा दिया। आखिरकार उसकी चोंच पानी तक पहुॅंच गई और उसने पानी पी कर अपनी प्यास बुझाई। थोड़े—थोड़े प्रयास से हम हर कार्य कर सकते है

लड़का और बादाम

एक लड़के ने एक जार में हाथ डाल कर उसमें रखे बादम मुट्ठी में भर लिए। लेकिन वह अपना हाथ जार से बाहर न निकाल पाया। बादामों से भरी उसकी मुट्ठी बड़ी थी और जार का मुॅंह छोटा था। लड़का अपना हाथ बाहर निकालने की कोशिश करता रहा पर निकाल न पाया वह बैठ कर रोने लगा। पास से जाते हुए एक व्यक्ति ने लड़के की समस्या समझ कर उससे कहा, ''आधे बादामों से संतुष्ट हो जाओ, तुम्हें हाथ बाहर निकालने में कोई कठिनाई न होगी।''

शेर और चूहा

एक चूहे ने एक सो । शेर को जगा दिया. शेर को गुस्सा आ गया। क्रोधित शेर चूहे को मारने वाला ही था कि चूहे ने कहा, “कृपया, मझे न मारें और एक दिन मैं आपकी कोई सहायता करूंगा." “एक चूहा शेर के लिए क्या कर सकता है?" शेर ने पूछा। लेकिन उसने चूहे को छोड़ दिया।

इस घटना के कुछ दिनों बाद शेर शिकारियों के फंदे में फंस गया।जब चूहे ने देखा कि शेर किस मुसीबत में था तो उसने रस्सी को कुतर कर काट दिया और शेर आज़ाद हो गया।

"आप मेरी इस बात पर हँसे थे कि मैं कभी आपकी कोई सहायता करूंगा,” चूहे ने कहा. "लेकिन अब आपने देखा कि एक चूहे के लिए भी एक शेर की सहायता करना संभव है।"

हम चाहे बड़े हों या छोटे हमें एक दूसरे की सहायता की ज़रूरत होती है।

बिल्ली और वीनस

एक बिल्ली एक युवक से प्यार करती थी। उसने प्यार की देवी वीनस से कहा कि वह उसे एक युवती बना दे।और वीनस ने उसे बना दिया। युवक को उस युवती से प्यार हो गया और दोनों ने विवाह कर लिया। कुछ समय बाद नई दुलहन ने एक चूहा देखा। यह भूल कर कि अब वह बिल्ली नहीं थी, वह चूहे के पीछे भागी। वीनस उससे इतनी नाराज़ हुई कि उसने लड़की को फिर से बिल्ली बना दिया। अपना रूप बदलना सरल है परन्तु व्यवहार बदलना कठिन होता है।

भालू और दो यात्री

दो यात्रियों का सामना एक भालू से हो गया। एक आदमी झटपट एक पेड़ पर चढ़ गया. दूसरे को छिपने की कोई जगह न दिखाई दी तो वह ज़मीन पर लेट गया और मृत होने का नाटक करने लगा। भालू मरे हुए आदमी को नहीं खाते हैं इसलिए भालू चला गया। पेड़ पर चढ़ा हआ आदमी नीचे आया और मज़ाक में दूसरे से बोला, “मैंने देखा कि भालू अपना मुँह तुम्हारे कान के पास लाया था। उसने तुम से क्या कहा?" "उसने मुझे अपनी सलाह दी,” उसके साथी ने उत्तर दिया। “जो मित्र संकट के समय तुम्हें छोड़ दे उसके साथ कभी यात्रा न करो।" विपत्ति के समय ही मित्रों की परख होती है।

उत्तरी पवन और सूरज 

एक दिन उत्तरी पवन और सूरज में विवाद हो गया कि दोनों में कौन अधिक शक्तिशाली था। उन्होंने तय किया दोनों में से जो भी रास्ते पर जाते हए यात्री के कपड़े उतरवा देगा वह शक्तिशाली होगा। उत्तरी पवन ने पहले प्रयास किया। वह पूरी शक्ति के साथ चलने लगी. लेकिन पवन जितनी तेज़ चलती वह आदमी उतनी ही मज़बूती से अपने कपड़े अपने शरीर पर लपेट लेता। आखिरकार पवन ने हार मान ली और सूरज से कहा कि वह प्रयास करे। सूरज पूरी गर्मी के साथ चमकने लगा। यात्री एक के बाद एक अपने कपड़े शरीर से उतारने लगा। आखिरकार उसने अपने सारे कपड़े उतार दिए और लेट कर धूप-स्नान करने लगा। बल प्रयोग करने के बजाय अनुनय करना श्रेष्ठ होता है।

बिल्ली के गले में घंटी

यह निर्णय करने के लिए कि बिल्ली से अपनी रक्षा करने के लिए उन्हें क्या करना चाहिए, चूहों ने एक सभा बुलाई। एक चूहे ने सुझाव दिया कि उन्हें बिल्ली के गले में एक घंटी बाँध देनी चाहिए। घंटी की आवाज़ सुन कर उन्हें पता लग जाएगा कि बिल्ली आ रही थी।. "बिल्ली के गले में घंटी बाँधने का सुझाव अच्छा है,” एक बूढ़े चूहे ने कहा.... लेकिन हम में से कौन उसके गले में घंटी बांधेगा?" कहना आसान करना कठिन।

घोड़ा गाड़ी पर बैठी मक्खी

एक किसान की घोड़ा गाड़ी धूल भरे रास्ते पर गड़गड़ाती हुई चल रही थी और धूल के बादल उड़ा रही थी। घोड़ा गाडी में पीछे बैठी हुई एक मक्खी ने सोचा, “अरे, अरे! मैं तो खूब धूल उड़ा रही हूँ, क्यों ऐसा ही है न?" हम अकसर उन कार्यों का श्रेय ले लेते हैं जो हमने किये नहीं होते।