Elephant weight story in Hindi

प्राचीन चीन में थ्री-किंगडम के काल में, वहां तसो-तसो नामक एक प्रसिद्ध व्यक्ति रहता था. तसो-तसो का एक बेटा था, तसो-चुंग, जिससे वो बेहद प्यार करता था. तसो-तसो जब कभी काम से शहर जाता तो वो अक्सर चुंग को भी अपने साथ ले जाता था.

दिन का काम समाप्त करने के बाद दोनों पिता और पुत्र बाजार में टहलते थे.

बाजार की हवा तीखी गंध से भरी होती थी जो कि छोटी दुकानों में बिकने वाले मसालों और धूप-अगरबत्तियों से आती थी

और दुकानों में बिक्री के लिए लाई ताजा उपज से आती थी. चुंग को विशेष रूप से पुस्तक स्टालों में किताबें पढ़ना पसंद था. कभी-कभी उसके पिता उसके लिए एक-दो किताबें भी खरीदते थे.

अक्सर तसो-तसो और तसो-चुंग किसी छोटे, भीड़ भरे रेस्तरां में अपना खाना खाते थे. बाजार में ऐसे तमाम रेस्तरां थे. वहाँ वे भुना हुआ सुअर, बत्तख, ताजे फल, चावल, चाय, और अंत में थोड़ा मीठा केक खाते थे.

फिर भरे पेट और खुशहाल दिल के साथ वे नदी और गोदी की ओर घूमने जाते थे. नदी से ठंडी ताज़ी हवा और पानी बहने की निरंतर आवाज़ आती थी, क्योंकि वहां से एक विशाल जलप्रवाह, समुद्र की ओर जाता था.

विशेष रूप से नावों को देखना पसंद था. दिन के किसी भी समय उसे नदी के ऊपर और नीचे सभी तरह की नौकाएं दिखाई देती थीं. उनमें से कई नौकाएं गोदी से बंधी होती थीं. वहां पर मछुआरे रोज़ाना मछली पकड़कर लाते थे. बड़ी और छोटी नौकाओं में व्यापारी, शहर के लोगों के लिए चावल, मिट्टी के बर्तन, लकड़ी, कपड़ा और अनगिनत अन्य सामान ढोकर लाते थे. 

गोदी पर काम को लेकर हमेशा तरह-तरह के लोग वहां घूमते रहते थे और चुंग नाविकों को देखकर कभी नहीं थकता था. किसी नाव में माल लोड होता तो किसी में से उतारा जाता. उनमें जितना माल भरा होता नावें उसी वजन के हिसाब से, पानी में कम या ज़्यादा डूबती थीं. चुंग उन्हें बड़े ध्यान से देखता था.

तसो-तसो न केवल पूरे राज्य में बल्कि राज्य की सीमाओं से परे भी मशहूर था. वो बहुत से अमीर और शक्तिशाली लोगों को जानता था.

एक दिन एक दूर देश के राजकुमार ने तसो-तसो को एक विशेष उपहार देने की सोची. राजकुमार ने बहुत सोचने के बाद तसो-तसो को एक हाथी भेजने का फैसला किया.

राजकुमार ने अपने सबसे भरोसेमंद दूत को इस काम को अंजाम देने का भार सौंपा. राजकुमार ने दूत को हाथी का चयन करने और यात्रा के लिए सभी आवश्यक तैयारी करने का आदेश दिया.

जब सब कुछ तैयार हुआ तो दूत राजकुमार के सामने आया. वो अपने साथ हाथी को भी लाया था. राजकुमार ने हाथी को देखा. वो वाकई में एक आलीशान हाथी था.

राजकुमार गर्व से मुस्कुराया और उसने दूत को अपना आशीर्वाद दिया. फिर दूत ने हाथी पर चढ़कर अपनी लंबी यात्रा शुरू की.

दूत ने सैकड़ों मील खुले मैदानों में हाथी की सवारी की. फिर वो और हाथी पहाड़ों पर चढ़े, उन्होंने रेगिस्तानों और उपजाऊ घाटियों को भी पार किया.

अंत में, कई दिनों के सफर के बाद वे उस शहर में पहुंचे जहां तसो-तसो रहता था. दूत, हाथी पर सवार होकर शहर की सड़क पर आगे बढ़ा.

हाथी के चलने से लोग सड़कों पर रुककर उसे देखने लगे. उनमें से किसी ने भी पहले कभी हाथी नहीं देखा था.

दूत हाथी को, तसो-तसो के सामने वाले गेट तक ले गया. तसो-तसो ने भी पहले कभी हाथी नहीं देखा था. वो हाथी को देखकर एकदम अचरज में पड़ गया. हाथी दिखने में वाकई एक शानदार जीव था.

वो बहुत बड़ा और विशाल था. जब दूत ने हाथी की सड़क पर परेड कराई तो तसो-तसो का दिमाग अचरज से भर गया.

हाथी के महान ठोस पैर लगातार आगे झुके हुए थे और उसकी लंबी सूंड अगल-बगल, धीरे-धीरे हिल रही थी. उसके पत्तों जैसे विशाल कान धीरे-धीरे आगे-पीछे लहरा रहे थे और उसकी छोटी-छोटी आँखें झपकी ले रही थीं. उस असाधारण जीव को देखने के लिए तमाम लोग सड़क पर इकट्ठा हो गए.

अंत में अंधेरा छा गया. तसो-तसो ने दूत को सुझाव दिया कि वो रात के लिए हाथी को अंदर वाले आंगन में ले जाए. फिर लंबी यात्रा के बाद उन्होंने दूत के भोजन और ठहरने की व्यवस्था की.

तसो-तसो ने दूत से हाथी के बारे में कई सवाल पूछे. दूत ने उन्हें हाथी की देखभाल और उसके भोजन के बारे में विस्तार से समझाया.

अगले कुछ दिनों में, तसो-तसो ने एक विशेष बाड़े का निर्माण करवाया. उन्होंने एक महावत को काम पर रखा, जिसका एकमात्र काम हाथी की देखभाल करना था. महावत हाथी को खिलाता, उसे व्यायाम करवाता और उसे पानी पिलाता था.

एक दिन हमेशा की तरह सुबह-सुबह तसो-तसो हाथी को देखने के लिए बाहर गया. उसका बेटा चुंग भी उसके साथ था.

तसो-तसो ने हाथी को देखा. "वो वास्तव में एक शानदार प्राणी है," उसने कहा. उसने अपने हाथ से हाथी की सूंड को जोर से सहलाया. "वो कितना बड़ा है. ऐसा कोई तरीका ज़रूर होगा जिससे हम उसका भार पता कर सकें."

चुंग ने भी हाथी की सूंड को सहलाया.

"मैं उसका भार पता कर सकता हूँ," चुंग ने धीरे से कहा.

तसो-तसो ने अपने बेटे को देखा. "बेटा, तुम कैसे हाथी का वजन पता लगाओगे?" उसने आश्चर्य से पूछा.

"हाँ! यह आसान है. बस हाथी को गोदी में ले जाकर हमें उसे चढ़ाने के लिए एक बड़ी नाव ढूंढनी होगी. फिर मैं आपको आगे का काम दिखाऊंगा," लड़के ने जवाब दिया

तसो-तसो उलझन में पड़ गया. उसने इतने सारे लोगों से पूछा था, पर उनमें से किसी को हाथी का वज़न करना नहीं आता था.

लेकिन अगर चुंग वास्तव में हाथी का भार पता कर सकता था, तो तसो-तसो उसके साथ चलने के लिए तैयार था. इसलिए उसने महावत को बुलाया और उसे चुंग के साथ हाथी को नीचे गोदी में ले जाने को कहा. वहां पर बहुत सारी नावें थीं.

इस नज़ारे को देखने के लिए बहुत से लोग गोदी पर इकट्ठे हुए. उनमें तसो-तसो के कई दोस्त भी थे.

चुंग और तसो-तसो ने चारों ओर देखा. कुछ देर बाद उन्हें हाथी को चढ़ाने के लिए एक खाली और बड़ी नाव मिली. फिर तसो-तसो ने नाव के मालिक से अनुमति ली जिससे वो अपने हाथी को नाव पर चढ़ा सके.

जैसे ही बड़ी नाव गोदी के आई, चुंग ने फिर से कहा, "इससे पहले कि आप इस नाव पर हाथी को चढ़ाएं मुझे एक थोड़ी नाव की आवश्यकता होगी."

अपने बेटे की मांग से तसो-तसो काफी हैरान हुआ. लेकिन बिना किसी हिचकिचाहट के उसने जल्द ही एक छोटी नाव की व्यवस्था कर दी. नदी के किनारे एक छोटी नाव ढूंढना काफी आसान काम था.

चुंग, घाट से नीचे उतरा और उस छोटी नाव में चढ़ा. उसके हाथ में एक काला कोयला था. उसने छोटी नाव को बड़ी नाव के पास ले जाने को कहा. जैसे ही वो वहां पहुंचा उसने बड़ी नाव पर कोयले से उस स्थान पर एक लाइन खींची, जहां पानी, नाव को छू रहा था.

बड़ी नाव पर निशान लगाने के बाद चुंग ने अपने पिता को बुलाया जो घाट पर खड़े थे और उसे देख रहे थे.

"अब कृपा आप हाथी को नाव पर चढ़ायें," उसने अपना हाथ हिलाकर पिता से कहा.

तसो-तसो और महावत धीरे-धीरे करके हाथी को लकड़ी के रैंप (ढलान) द्वारा बड़ी नाव पर ले जाने में कामयाब रहे. हाथी के भारी वजन से नाव पानी में कुछ गहरी डूबी.

"देखो!" चुंग ने कहा. "अब मुझे एक और लाइन बनानी होगी. आप कृपा करके नाव को स्थिर रखें."

तसो-तसो और महावत रैंप पर वापस गए. वहां किनारे पर खड़े होकर उन्होंने हाथी को आश्वस्त किया. हाथी ने अपनी छोटी आँखों से उन्हें घूरा. इसी बीच बड़ी नाव पानी में संतुलित और स्थिर हो गई थी.

एक-दो मिनट बाद नाव एकदम शांत हो गई. तुरंत चुंग ने कोयले से नाव पर पानी के स्तर का, दूसरा निशान लगाया. दूसरी लाइन लगाने के बाद उसने हाथ से इशारा करके फिर अपने पिता को पुकारा.

"पिताजी अब आप हाथी को नाव से उतार सकते हैं," वो चिल्लाया.

तसो-तसो और महावत हाथी को नाव से उतारने के लिए लकड़ी की रैंप पर तेजी से वापस आये. उन्होंने हाथी को प्रोत्साहित करने के लिए उससे कुछ प्यार भरे शब्द कहे. उसके बाद हाथी ने रैंप पर अपना कदम रखा. फिर वो गोदी पर चला गया.

जैसे ही हाथी नाव पर से उतरा, वैसे ही नाव पानी में से कुछ ऊपर उठी. चुंग ने नाव पर कोयले से जो दो लकीरें बनाई थीं वे अब साफ़ दिखने लगी थीं.

सभी लोग इस घटना को बड़े अचरज से देखने लगे- पहले हाथी को और फिर नाव को. चुंग के पिता ने हाथी को पुचकारा और फिर उसकी सूंड सहलाई.

चुंग छोटी नाव को गोदी पर वापिस ले गया. उसने नाव को किनारे से बाँधा और फिर चढ़कर उस स्थान पर गया जहाँ पिताजी और महावत उसका इंतज़ार कर रहे थे. जैसे ही उन्होंने चुंग को देखा वे उत्सुकता से उसकी ओर बढे.

"अब," चुंग ने कहा, "इन पत्थरों को नाव में तब तक भरो जब तक की ऊपर वाली लाइन पानी में डूब न जाए. वो करने के बाद उन पत्थरों को नाव से उतारकर उनका वज़न करो. उन पत्थरों का कुल भार ही हाथी का वज़न होगा."

तसो-तसो ने अपने बेटे की ओर देखा. अच्छा, तो हाथी का भार इस तरह मापा जाता है! अंत में तसो-तसो को सब कुछ समझ में आया. वो बहुत खुश हुआ. 

फिर तसो-तसो ने नाव में रखे पत्थरों को तौलने का आदेश दिया.

बाद में उन पत्थरों को तराजू में तोला गया. इस तरह उन्हें हाथी का असली वजन पता चला!

लेकिन इससे भी महत्वपूर्ण बात यह थी कि तसो-तसो का दिल खुशी से भर गया. वो मुस्कराया. उसे अपने बेटे पर बहुत गर्व महसूस हुआ. हालांकि चंग अभी भी एक छोटा लड़का था, लेकिन वो हाथी का वज़न तौलने में सक्षम हुआ था. जबकि तसो-तसो के तमाम पढ़े-लिखे दोस्त इस प्रश्न को सुलझाने में असमर्थ रहे थे.