Discuss the achievements of Alvars and Nayanars. In Hindi)

 (i) प्रारंभिक भक्ति आन्दोलन लगभग 6वीं शताब्दी में दक्षिण में विष्णुभक्त अलवारों और शिव भक्त नयनारों के नेतृत्व में हुआ। अलवार भगवान विष्णु की एवं नयनार भगवान शिव की अराधना करते थे। वे एक स्थान से दूसरे स्थान पर भ्रमण करते हुए अपने ईष्ट की स्तुति में भजन गाते थे। उनके गायन की भाषा तमिल थी।

(ii) अलवार और नयनार संतों ने जाति प्रथा एवं ब्राह्मणों की प्रभुता के विरोध में आवाज उठायी। (iii) वे एक स्थान से दूसरे स्थान भ्रमण करते हुए तमिल में अपने इष्ट देव की स्तुति में भजन गाने

(iv) अपनी यात्राओं के क्रम में अलवार और नयनार संतों ने कुछ पावन स्थलों को अपने डटका निवास स्थल घोषित किया। इन्हीं स्थलों पर बाद में विशाल मंदिरों का निर्माण हुआ और वे तीर्थस्थल

माने गये।

(v) संत-कवियों के भजनों को इन मंदिरों में अनुष्ठान के साथ गाया जाता था और साथ ही इन संतों की प्रतिमा की भी पूजा की जाती थी।

(vi) इस परंपरा की सबसे बड़ी विशिष्टता इसमें स्त्रियों की उपस्थिति थी। उदाहरण के लिए अंडाल नामक अलवार स्त्री के भक्ति गीत व्यापक स्तर पर गाये जाते थे। अंडाल स्वयं को विष्णु की प्रेयसी मानकर अपनी प्रेम भावना को छंदों में व्यक्त करती थी। एक और स्त्री शिवभक्त करइक्काल अम्मइयार ने अपने उद्देश्य प्राप्ति हेतु घोर तपस्या का मार्ग अपनाया। नयनार परम्परा में उसकी रचनाओं को सुरक्षित किया गया।