Clever wife story in Hindi

एक बार एक चतुर व्यापारी अपनी पत्नी के साथ रहता था. उनका इकलौता बेटा बड़ा आलसी और मूर्ख था. व्यापारी और उसकी पत्नी को समझ में नहीं आया कि वे अपने लड़के के साथ क्या करें. उन्होंने उसे परखने का फैसला किया इस उम्मीद में कि शायद वो अपने दिमाग का इस्तेमाल करने की कोशिश करे. व्यापारी ने लड़के को चार सिक्के दिए और कहा, "जाओ और कुछ ऐसा खरीदो जिससे तुम्हारा पेट भरे, तुम्हारी प्यास बुझे, जो तेज़ी से उगे और जिसे गाय भी खा सके."

बेवकूफ बेटा बाजार गया तो वो वहां के शोरगुल से एकदम मंत्रमुग्ध हो गया. आखिर में उसने तीन सिक्कों को बेकार की वस्तुओं - मिठाई और गुब्बारों पर बर्बाद किया. फिर उसने टहलने का फैसला किया.

बेवकूफ बेटा चुप रहकर सोचने की बजाए अपने विचारों को ज़ोर-ज़ोर से बोलने लगा. इसलिए कुछ देर के बाद कई लोगों को उसके "परीक्षण" के बारे में पता चल गया. फिर भी, बेवकूफ बेटे को तब बड़ा आश्चर्य हुआ जब अचानक एक लड़की उसके पास आई और उसने कहा, "यदि तुम्हें उन पैसों से खुद को खिलाना है, प्यास बुझानी है, जल्दी से कुछ उगाना है, और गाय को भी खिलाना है, तो तुम्हें एक तरबूज खरीदना चाहिए."

बेवकूफ बेटे ने फिर वही किया जैसी उसे सलाह दी गई. फिर वो माता-पिता को तरबूज दिखाने के लिए घर वापिस गया. व्यापारी को तुरंत समझ आ गया, "कि वो किसी और का विचार होगा."

जब बेटे ने उसे लड़की के बारे में बताया, तो व्यापारी के दिमाग में एक विचार आया. "अगर मेरा बेटा इस चालाक लड़की से शादी करेगा," उसने सोचा, "तो वो लड़की मेरे लड़की को इतनी मूर्खता करने से रोकेगी."

व्यापारी ने उस लड़की के बारे में पता करवाया. फिर उसने लड़की से अपने बेटे से शादी करने की बात चलाई. जब बेवकूफ लड़के के दोस्तों ने यह खबर सुनी कि व्यापारी उस गरीब लोहार के घर गया था, तो उन्होंने अपने दोस्त को एक तरफ बुलाया और उससे कहा, "तुम उस गरीब लड़की से शादी नहीं कर सकते! तुम लड़की के पिता से जाकर कहो कि तुम उसे दिन में सात बार, अपनी चमड़े की चप्पल से पीटोगे.” बेवकूफ लड़का उनकी बात मान गया.

यह सुनकर, लड़की के पिता ने शादी रद्द करने की कोशिश की. पर उस समझदार लड़की ने केवल यह कहा, "पिताजी, आदमी जो कहता है और जो असल में करता है उसमें बहुत बड़ा अंतर होता है." फिर बिना किसी भय के लड़की ने शादी की तैयारी की.

शादी की रात, जब दूल्हा और दुल्हन सो रहे थे, तो बेवकूफ बेटे ने अचानक जागकर अपनी पत्नी को पीटने के लिए अपना जूता उठाया. पर उसकी पत्नी तुरंत घूमी और उसने बड़ी शांति से कहा, "क्या तुम्हें वो रिवाज नहीं पता? शादी की पहली रात कोई आदमी कभी अपनी पत्नी को नहीं पीटता है."

फिर बेवकूफ बेटे ने अपना सिर हिलाया और वापस सो गया.

जब उसने अगली रात फिर से पिटाई करने की कोशिश की, तो पत्नी ने कहा, "क्या तुम्हें यह नहीं पता कि पूरणमासी वाली रात, शादी के पहले हफ्ते में, अपनी पत्नी को पीटना एक बहुत बुरा शगुन है?"

फिर बेवकूफ बेटा इंतजार करने लगा. लेकिन, जैसे कि उस गाँव में प्रथा थी, दुल्हन शादी के आठवें दिन एक महीने के लिए अपने माता-पिता के घर लौट गई. इस बीच, बेवकूफ बेटे ने दूर के शहरों में अकेले यात्रा करके अपना भाग्य आजमाने का फैसला किया.

दो सप्ताह की यात्रा के बाद, बेवकूफ बेटा एक किले में पहुंचा, जहां एक महिला अपने कई नौकरों के साथ रहती थी. महिला ने उसे एक खेल खेलने के लिए आमंत्रित किया. वो अपने नौकरों को खेल के मोहरों के रूप में इस्तेमाल करती थी. महिला के मोहरे लाल कपड़े पहने थे, और बेवकूफ बेटे के मोहरे पीले. नौकरों को धोखा देने में मालकिन की मदद करने का आदेश दिया गया था. महिला के संकेत पर, उसकी बिल्ली अपने पूंछ से दीपक को हिलाती थी, जिससे तेज़ रोशनी बेवकूफ लड़के की आँखों पर चौंधा डालती थी. जब उसे देखने में तकलीफ होती थी तब नौकर अपनी स्थिति बदल लेते थे ताकि उनकी मालकिन जीत सके. इस प्रकार उस बेवकूफ लड़के ने अपनी सारी संपत्ति खो दी. अंत में उसे जेल में डाल दिया गया. वहां उसे कई अन्य दुर्भाग्यपूर्ण और गरीब लोग मिले. वहां उसे खूब पीटा गया और उसे भूखा-प्यासा रखा गया.

एक दिन, मूर्ख बेटे ने जेल की खिड़की से अपने गाँव के एक व्यक्ति को जाते हुए देखा. उसने उसे अपने पिता और पत्नी के लिए दो पत्र दिए. क्योंकि वो आदमी पढ़ा-लिखा नहीं था, इसलिए पत्रों की अदला-बदली हो गई. व्यापारी को अपनी बहू का पत्र मिला. उसमें लिखा था, "मैं लौटने का बेसब्री से इंतज़ार कर रहा हूँ जिससे मैं तुम्हें दिन में सात बार पीट सकू." पत्नी को ससुर वाला लिखा पत्र मिला, जिसमें लिखा था: "मेरे साथ यहाँ इतनी क्रूरता बरती जा रही है, कि मुझे शक है कि मैं कभी जीवित वापिस नहीं लौटुंगा."

मूर्ख लड़के की पत्नी ने फैसला किया कि वो जाएगी और अपने पति को बचाएगी. ससुर ने उसे धन और नौकर दिए. उसने खुद को एक युवा, धनी व्यक्ति के रूप में पेश किया. जब वो किले में पहंची तो अन्य बदनसीब व्यापारियों जैसे ही किले की मालकिन ने उसे भी खेल के लिए आमंत्रित किया.

पर होशियार पत्नी ने पहले ही नौकरों को रिश्वत देकर मालकिन की चाल को समझ लिया था. इसलिए जब खेल खेलने का समय आया, तो होशियार पत्नी ने अपनी आस्तीन में एक चूहा छिपा लिया. फिर जैसे ही बिल्ली ने दीपक को अपनी पूंछ से हिलाया तभी उसने चूहे को छोड़ दिया. बिल्ली ने चूहे का पीछा करने के लिए छलांग लगाई और फिर वो पूरी तरह से अपनी मालकिन के बारे में भूल गई. किले की दुष्ट महिला खेल में अपना सारा खज़ाना हार गई.

फिर होशियार पत्नी ने नीचे जाकर सभी कैदियों को रिहा किया. बेशक, उसका पति उसे नए भेष में पहचान नहीं पाया.

होशियार पत्नी ने अपने पति से नए, साफ कपड़े पहनने को कहा. पति के पुराने कपड़े उसने अपने पास रख लिए. फिर बेवकूफ बेटा अपने मातापिता के पास वो सारी दौलत लेकर वापिस लौटा जो उसकी पत्नी ने जीती थी. जब पत्नी उससे मिलने आई तो उस बेवकूफ ने उससे जो पहली बात कही वो थी, "यह मत सोचो कि मैं भूल गया हूँ. मेरी चप्पल लाओ. मैं तुम्हारी अभी पिटाई करूंगा!"

"रुको! यह किस तरह की घर वापसी है?" लड़के के माता-पिता चिल्लाए.

"तुम कितने गिरे और नीच आदमी हो," उसकी पत्नी ने कहा. "तुमने इतनी मार खाई

और भुखमरी का सामना किया. तुम्हें किसे ने बचाया. पर तुम वही सलूक फिर दूसरों के साथ करना चाहते हो? मुझे लगा कि इतने धक्के खाकर तुम्हें कुछ समझ आई होगी. मैंने की तुम्हें बचाया था. "यह रहे तुम्हारे जेल के गंदे कपडे. मैंने एक अमीर आदमी के भेष में, उस महिला को खेल में धोखा दिया. तुम मूर्ख हो, तुम्हें यह कुछ समझ में नहीं आएगा."

इस पर व्यापारी और उसकी पत्नी ने कहा, "यह सच है, वो एक नंबर का बेवकूफ है. हम अपनी सारी संपत्ति इस लड़की को ही देंगे. वो वाकई में इसकी हकदार है. फिर वो जो मर्जी चाहे उसके साथ करे." इस तरह एक गरीब पर होशियार लड़की, एक अमीर महिला बनी.