Story of a carpenter In Hindi

मैकफी एक बढ़ई था. वह स्कॉटलैंड के पश्चिमी सागर तट पर गिल्प खाड़ी के निकट रहता था. वह शांत स्वभाव का व्यक्ति था और अपने काम से उसे बहत लगाव था. चाहे रसोई के लिए कोई साधारण सा उपकरण बनाना हो या बलूत की लकड़ी की एक अलमारी, वह हर वस्तु बड़े धीरज के साथ बनाता था और कभी कोई हड़बड़ी न करता था

“बाकी का काम कल करेंगे,” जब सूर्य पहाड़ियों और द्वीपों और खाड़ियों के ऊपर अस्त होता तो वह ऐसा कहता. बढ़ई मैकफी को लकड़ी से हर प्रकार की वस्तुएं बनाना पसंद था परन्तु लकड़ी की नावें बनाना उसे सबसे अधिक अच्छा लगता था. उसकी नावों की बनावट साधारण होती थी पर वह बहुत मज़बूत और सुरक्षित होती थीं

हर मछुआरा मैकफी की बनाई हुई नाव लेना चाहता था बढ़ई मैकफी के पास एक शिष्य भी था जिसका नाम गिल्ली कैलम था.

“जो कुछ भी तुम उससे सीख सकते हो सीखो और एक दिन तुम भी शायद उसकी तरह प्रसिद्ध हो जाओ,” जिस दिन पहली बार गिल्ली कैलम बढ़ई मैकफी की वर्कशॉप जाने लगा तो उसकी माँ ने उससे कहा. “बढ़ई मैकफी जैसा शिल्पकार बहुत कठोर होगा,” माँ ने कहा लेकिन वह आश्चर्यचकित हो गया जब बढ़ई मैकफी ने कैलम के साथ ऐसा व्यवहार किया जैसे की वह उसके बराबर था. सारा दिन साथ-साथ काम करते हए वह आपस में बातें भी करते रहते थे. बढ़ई मैकफी अलग-अलँग नमूनों के बारे में। गिल्ली कैलम के विचार पूछता और नाव के आकार वगैरह के विषय में उसके सुझाव लेता. दिन प्रसन्नता से बीत रहे थे.

बढ़ई मैकफी की प्रसिद्धि चारों ओर दूर-दूर तक फैलती गई और आखिरकार लोक्लेन के बढ़इयों के कानों तक उसकी प्रसिद्धि पहुँच गई.

लोक्लेन के बढई हमेशा अपने कारीगरी की डींगें मारते थे और स्वयं ही अपनी प्रशंसा करते थे. जो भी वस्तु वह बनाते थे उसे ध्यानपूर्वक, धीरे-धीरे बनाने के बजाय वह ऐसी चीज़े बनाते थे जिनकी बनावट तो आलीशान होती थी लेकिन वह सही ढंग से चलती न थीं और अकसर जल्दी ही टुकड़े-टुकड़े हो जाती थीं. फिर वह एक दूसरे को दोष देने लगते थे और उन में झगड़ा शुरू हो जाता था, जिस में उन्हें बड़ा मज़ा आता था.

जब उन्होंने बढ़ई मैकफी की कारीगरी के बारे में सुना तो वह बहुत क्रोधित हुए “मैकफी अपने आप को समझता क्या है?” कोई चिल्लाया.

“वह समझता है कि संसार में वह सबसे महान बढ़ई है,” कोई और चिल्लाया.

"चलो साथियो, चल कर इस बढ़ई मैकफी को सबक सिखाते हैं,” लोक्लेन का सबसे बड़े बढ़ई ने चिल्ला कर कहा.

उन्होंने अपना एक दुत बढ़ई मैकफी के पास यह बताने के लिए भेजा। कि वह उसे चुनौती देने के लिए आ रहे थे. फिर उन्होंने ने अपनी कुल्हाड़ियाँ

और आरियाँ और छेनियों को तेज़ किया और अपनी उन नावों में सवार हो । गये जिनका आकर आलीशान दोलन घोड़ों जैसा था. चीखते-चिल्लाते हए वह नावों पर चल दिए.

"वह कभी न पहँचेंगे," लोक्लेन की औरतें रोने लगीं क्योंकि वह जानती थीं कि सब आदमी कितने घटिया बढई और नाविक थे.

जब बढ़ई मैकफी को लोक्लेन के बढ़इयों का संदेश मिला तो वह बहुत भयभीत हो गया. उसने कभी दावा न किया था कि वह संसार का सबसे अच्छा बढ़ई था. दूसरे लोग ऐसा कहते थे.

सभी मास्टर शिल्पकारों की अपनी एक विशेष पोशाक होती है जो उनके रुतबे को दर्शाती है. लेकिन बढ़ई मैकफी अपनी पोशाक कदाचित ही पहनता था. उसकी सोने की चेन, मखमल का कोट, और पंख लगी हैट उसकी वर्कशॉप में एक खूटी पर टंगे थे और उन पर धूल जमा हो रही थी. "मैं जानता हूँ कि हम क्या करेंगे," जब दोलन घोड़ों जैसी नावों का बेड़ा दिखाई दिया तो बढ़ई मैकफी ने आश्चर्यचकित गिल्ली कैलम से कहा. “तुम गुरु बनोगे और मैं तुम्हारा शिष्य." इतना कह कर उसने खुंटी से अपनी विशेष पोशाक उठाई उसकी धूल साफ़ की और उसे पहनने में गिल्ली कैलम की सहायता की.

“तम बड़ी विनम्रता से लोक्लेन के बढ़इयों का स्वागत करना," बढ़ई मैकफी ने उसे समझाया. “और अगर वह तुम्हें चुनौती देते हैं तो तुम ऐसे करोगे......” _ गिल्ली कैलम ने सारी बात ध्यान से सुनी. सिर पर पहनी विशाल हैट पर लगा पंख सहमती में ऊपर-नीचे झूल रहा था.

शीघ्र ही लोक्लेन के बढ़ई सागर की लहरों पर तैरते हए बड़े उन्माद से किनारे की ओर आये. अपने दोलन घोड़ों से उतर कर, कमर तक पानी में डूबे, वह एक-दूसरे से उलझ पड़े. सबसे बड़े लोक्लेन बढ़ई के खूब चीखने-चिल्लाने के बाद वह शांत हुए. टूटे हए दोलन घोड़ों के अंश पानी में हर ओर तैर रहे थे"

बढ़ई मैकफी के भेष में गिल्ली कैलम किनारे के पास आया. "आपका स्वागत है," उसने कहा. “आप लोगों ने बहत दूर यात्रा की होगी क्योंकि आपका सफ़र आपकी नावों के लिए कुछ अधिक ही.....कष्टकारक था."

"हम और नावें बना लेंगे. कोई समस्या नहीं है,” लोक्लेन का सबसे बड़ा बढ़ई गरज कर बोला. “हम संसार के सबसे अच्छे बढ़ई हैं और सदा के लिए तुम्हें तुम्हारी योग्यता बताने के लिए हम चुनौती देने आये है.” "जैसा आप कहें,” गिल्ली कैलम ने कहा. "लेकिन जिस दिन कोई अतिथि मुझ से मिलने आते हैं उस दिन काम करने की मेरी रीत नहीं है. आज मेरे शिष्य के साथ प्रतियोगिता कर लो. अगर तम ने उसे हरा दिया तो मैं कल तुम से मकाबला करूंगा."

लोक्लेन के बढ़ई वर्कशॉप के अंदर आये. वह सब 'शिष्य' के इर्दगिर्द इकट्ठे हो गये और उसकी आयु और औजारों का मज़ाक उड़ाने लगे. “यह तो चुटकी का काम है!” एक ने हंसते हुए कहा. “इन प्राचीन औजारों से जो कुछ भी यह बनाएगा उसमें सारा दिन लग जाएगा!” दूसरे ने जंभाई लेते हुए कहा. गिल्ली कैलम ने बढ़ई मैकफी से एक कुल्हाड़ी पर हत्था लगाने के लिए कहा.

“कितना सरल काम है!” लोक्लेन के बढ़ई चिल्लाये “सरल काम ही अकसर बहुत कठिन होते हैं,” गिल्ली कैलम ने बढ़ई मैकफी को आँखें मारते हुए कहा.

बढ़ई मैकफी ने कुल्हाड़ी को एक शिकंजे में कस कर बाँध दिया. फिर एक छोटी कुल्हाड़ी लेकर दूर बैठ कर लकड़ी के एक लंबे हत्थे को छीलने लगा. बीच-बीच में कुल्हाड़ी के सूराख को वह देखता रहा. उसने बड़े ध्यान से छेद के आकार के अनुसार हत्थे के एक सिरे को आकार दिया. जब उसने यह काम पूरा कर लिए तो उसने पूरी ताकत से उसे फेंक दिया. उसका निशाना इतना उत्कृष्ट था कि हवा में उड़ता हुआ हत्था कुल्हाड़ी के सूराख में जा फंसा.”

“ठीक है! बुरा नहीं है!” गिल्ली कैलम ने कहा. "धन्यवाद, गुरूजी,” बढ़ई मैकफी ने विनम्रता से कहा.

लोक्लेन के लोगों ने आश्चर्य से अपने सिर हिलाये और इस अद्भुत कार्य की चर्चा करने के लिए वर्कशॉप से बाहर आ गये.

"अगर शिष्य इतना कुशल है तो गुरु तो इससे दोगुना कुशल होगा,” उनमें से एक ने कहा. “गुरु के साथ मुकाबला करने में लाभ नहीं,” दूसरे ने झटपट कहा.

लेकिन लोकलेन का सबसे बड़ा बढ़ई वर्कशॉप के अंदर आ गया. उसने प्रतियोगिता करने का निश्चय कर रखा था. भीतर उसने और भी आश्चर्यजनक दृश्य देखा.

गिल्ली कैलम और बढ़ई मैकफी कारखाने की छत के कुछ शहतीर बदल रहे थे. शहतीर जोड़ने के लिए वह उन लकड़ी की कीलों का उपयोग कर रहे थे जो बढ़ई मैकफी ने बनाईं थीं. लेकिन सीढ़ी पर चढ़ने के बजाय बढ़ई मैकफी कील नीचे से ही उछाल कर फेंक रहा था और वह सीधे शहतीरों के सूराख में फंस जाते थे. फिर वह एक हथोड़ी ऊपर फेंकता था जिसकी ठोकर से कील सूराख में धंस जाते थे. हर बार जब हथोड़ी नीचे आती थी, बढ़ई मैकफी उसे हवा में हाथ से पकड़ लेता था. "तुम्हारा शिष्य तो अपने अपनी कारीगरी में बहुत माहिर है," लोकलेन के सबसे बड़े बढ़ई ने अनिच्छापूर्वक कहा. "बेशक!” गिल्ली कैलम बोला. “वह कुशल होता जा रहा है. अगर एक-दो साल वह मेरे साथ रहता है तो वह लगभग मेरा जितना कुशल हो ही जाएगा. लेकिन कल हम दोनों एक दूसरे से प्रतियोगिता करेंगे."

लोक्लेन के सबसे बड़े बढ़ई ने सोचा कि गुरु के साथ मुकाबला करना व्यर्थ था. मकाबले से बचने के लिए एक योजना उसके मन में आई. उसने सोचा कि वह गिल्ली कैलम को नृत्य और संगीत समारोह के लिए आमंत्रित करेगा. फिर वह और उसके साथी यह दिखलाने का नाटक करेंगे कि अपनी बची हुई नावों पर वह सब गिल्प खाड़ी की सैर करना चाहते थे. सागर में जैसे ही वह गिल्ली कैलम की आँख से ओझल होंगे, वह लोक्लेन की ओर चल देंगे.

अब कुछ लोग बताते हैं कि आगे का घटनाक्रम इस प्रकार का था:

जब लोक्लेन के बढ़ई और गिल्ली कैलम वर्कशॉप के अंदर रंग-रेलियाँ मना रहे थे, बढ़ई मैकफी ने सागर किनारे बंधी दोलन घोड़ों नमा नावों का निरीक्षण किया और यह पता लगाया कि उनकी बनावट कैसी थी. फिर उसने हर नाव से एक छोटी सी कील निकाल दी और चुपचाप वर्कशॉप लौट आया.

अपनी योजना अनुसार कुछ समय बाद लोक्लेन के बढ़ई बोले कि वह गिल्प खाड़ी की सैर करने जा रहे थे और जल्दी ही लौट कर बाकी शराब पी लेंगे. लेकिन जब वह सागर में दूर चले गये तो तेज़ हवा बहने लगी. उनके नावों में एक कील गायब थी इस कारण लहरों में उनकी नावें छिनभिन हो गईं और लोक्लेन के सारे बढ़ई सागर में डूब गये.
ऐसा कुछ लोग कहते हैं.

लेकिन दूसरे लोग कहते हैं कि जब नृत्य और संगीत शुरू हुआ तो ऐसा हुआ: सब लोग बहुत प्रसन्न थे और निश्चय ही बढ़ई मैकफी भी वहीं वर्कशॉप में था और वह भी संगीत और नृत्य का आनंद ले रहा था. यह रंग-रेलियाँ इतनी देर तक चलती रहीं कि लोक्लेन के बढ़ई भूल ही गये की वह गिल्प खाड़ी क्यों आये थे. और वर्कशॉप में जलती हुई अँगीठी के पास लेट कर मज़े से सो गये.

अगली सुबह बढ़िया नाश्ता करके वह सब घर जाने के लिए तैयार हो गये. “यात्रा के लिए तुम्हारी नाव को ठीक करने में मेरा शिष्य तुम्हारी सहायता करेगा,” गिल्ली कैलम ने बड़े अभिमान के साथ कहा. गुरु का अभिनय करने में उसे खूब मज़ा आ रहा था.

"निस्संदेह, गुरूजी,” बढ़ई मैकफी ने कहा. “लेकिन अगर अनुमति हो तो मैं उन्हें बताना चाहता हूँ कि एक दोलन घोड़े जैसी नाव सही ढंग से कैसे बनाई जाती है, एक ऐसी नाव जिसे एक साथ चलाना इन्हें सीखना पड़ेगा. उस नाव से यह लोग तुरंत घर पहुँच जायेंगे."

“काम शुरू करो,” लोक्लेन के सबसे बड़े बढ़ई ने कहा. “और हम सब तुम्हारी सहायता करेंगे." किसी ने प्रतियोगिता का नाम ही न लिया.

घर लौट कर अपनी नई नाव सबको दिखाने के लिए लोक्लेन के बढ़ई शीघ्र ही उतावले हो गये. दोलन घोड़ों के आकार की अपनी कुछ नावें वह गिल्प खाड़ी के बच्चों के लिए यह कहते हुए छोड़ गये कि नृत्य और संगीत का समारोह मनाने के लिए वह अगले वर्ष फिर आयेंगे.

जब अंतिम नाव भी चली गई तो बढ़ई मैकफी और गिल्ली कैलम ने राहत की सांस ली. यद्यपि गिल्ली कैलम को ङ्केगास का अभिनय करना बहा अच्छा लगा था, उसे अपने भीभरकम वस्त्र और हैट और चेन उतार कर प्रसन्नता हुई. उसने बहुत कुछ सीखा था.

“अगले वर्ष जब लोक्लेन के बढ़ई आयेंगे तो यह पोशाक | मुझे फिर पहननी पड़ेगी, क्यों पहननी पड़ेगी न?" गीली कैलम ने थोड़ा गुस्ताखी से कहा.

"हाँ, लेकिन उससे पहले तुम्हें थोड़ा और सीखना है,” बढ़ई | मैकफी मस्कराया, वह पहले ही अपने काम में जुट गया था.

अपनी नावों पर घोड़ों के सर लगाना उसे अच्छा लगने लगा था. यह इस कहानी को अलग अंत है. मुझे पता है कि मुझे कौन सा अंत अच्छा लगता है. | क्या आपको पता है कि आपको कौन सा अच्छा लगा?

अंत: