Who are the natives?

संयुक्त राष्ट्र संघ ने सन् 1982 ई. में इनकी एक शुरुआती परिभाषा दी है। इन्हें ऐसे लोगों का वंशज बताया गया है जो किसी मौजूदा देश में बहुत दिनों से रहते चले आ रहे थे। फिर किसी दूसरी संस्कृति या जातीय मूल के लोग विश्व के दूसरे हिस्से से उस देश में आये और इन लोगों को अधीन बना लिया। किसी देश के मूलवासी आज भी उस देश की संस्थाओं के अनुरूप आचरण करने से ज्यादा अपनी परम्परा, सांस्कृतिक रिवाज तथा खास सामाजिक आर्थिक ढर्रे पर जीवन-यापन करना पसन्द करते हैं।

मूलवासियों के अधिकार एवं माँगें : (1) विश्व-राजनीति में मूलवासियों की मांग है कि उन्हें विश्व-बिरादरी में बराबर का दर्जा मिले।

(2) सरकारों से इनकी माँग है कि इन्हें मूलवासी कौम के रूप में अपनी स्वतंत्र पहचान रखने वाला समुदाय माना जाय।

(3) अपने मूल वास स्थान पर हक की दावेदारी में विश्व भर के मूलवासी यह जुमला इस्तेमाल करते हैं कि हम यहाँ अनंतकाल से रहते चले आ रहे हैं। अतः हमें अपने मूल स्थान से नहीं हटाया जाय।

(4) मूलवासियों के आर्थिक संसाधन का अधिक दोहन न किया जाय। (5) देश के विकास से होने वाले लाभ मूलवासियों को भी मिले।

(6) राजनीति में उन्हें उचित प्रतिनिधित्व दिया जाय। साथ ही उनकी कला, संस्कृति और भाषा को, संरक्षण दिया जाय।