Cyclones and Anticyclone in hindi

चक्रवात, प्रतिचक्रवात इसकी उत्पत्ति विभिन्न प्रकार की वायुराशियों के मिश्रण के फलस्वरूप वायु की तीव्र गति से ऊपर उठकर बवंडर का रूप ग्रहण करने से होती है। चक्रवात : केन्द्र में कम दाब की स्थापना होने पर बाहर की ओर दाब बढ़ता जाता है। इस अवस्था में हवाएँ बाहर से भीतर की ओर चलती हैं, इसे ही 'चक्रवात' कहा जाता है।

चक्रवात में वायु चलने की दिशा उत्तरी गोलार्द्ध में घड़ी की सूइयों । के विपरीत (Anticlockwise) एवं दक्षिणी गोलार्द्ध में घड़ी की सूई की दिशा (Clockwise) में होती है। टॉरनेडो, हरिकेन व टाइफून चक्रवात के उदाहरण हैं।

 प्रतिचक्रवात : जब केन्द्र में दाब अधिक होता है तो केन्द्र से हवाएँ बाहर की ओर चलती हैं, इसे प्रतिचक्रवात कहा जाता है। इसमें वाताग्र (Fronts) का अभाव होता है। प्रतिचक्रवात में वायु की दिशा उत्तरी गोलार्द्ध में घड़ी की सूइयों के अनुकूल (Clockwise)तथा दक्षिणी गोलार्द्ध में घड़ी की सूइयों के विपरीत (Anticlockwise) होती है।

चक्रवात में हवा केन्द्र की तरफ आती है और ऊपर उठकर ठंडी होती है और वर्षा कराती है, जबकि प्रतिचक्रवात में मौसम साफ होता है। टॉरनेडो : यह भयंकर अल्पकालीन तूफान है। आस्ट्रेलिया एवं संयुक्त राज्य अमेरिका के मिसीसिपी इलाकों में इस तूफान को 'टॉरनेडो' कहा जाता है।

यह जल एवं स्थल दोनों में उत्पन्न होता है। इसमें स्थलीय हवाओं का देग 325 किमी/घंटा होता है। हरिकेन : अटलांटिक महासागर में उठने वाली तथा पश्चिमी द्वीप समूह के चारों ओर चलने वाली भयंकर चक्रवाती तूफान है। इसकी गति 121 किमी/घंटा होती है।

टाइफून : प्रशांत महासागर में उठने वाली तथा चीन सागर में चलने वाली वक्रगामी कटिबन्धी चक्रवात को टाइफून कहते हैं। इसकी गति 160 किमी/घंटा होती है।