World famous explorers in hindi

 

लेडफ एरिक्सन (Ladef Erickson)

ऐसा माना जाता है कि जोर्स अन्वेषक लेइफ एरिक्सन (970—1020) उत्तर अमेरिका महाद्वीप की यात्रा करने वाले पहले यूरोपीय थे। एरिक्सन ने क्रिस्टोफर कोलम्बस से 500 वर्ष पहले ही उत्तर अमेरिका की यात्रा कर ली थी। 'सागा आफ द ग्रीनलैण्डर्स' नामक साहितय के अनुसार, लेइफ एरिक्सन का जन्म आइसलैण्ड में हुआ था तथा उन्होंने विनलैण्ड में एक उपनिवेश की स्थापना की थी, जिसे आज न्यूफाउण्डलैण्ड द्वीप (कनाडा) में लौंस—ओ—मैडों के नाम से जाना जाता है। 


मार्को पोलो (Marco Polo)

मार्को पोलो (1254—1324) एक इटैलियन व्यापारी, अन्वेषक और लेखक थे। मार्को पालो ने मंगोल साम्राज्य और लेखक थे। मार्को पालों ने मंगोल साम्राज्य के वर्चस्व के दौरान पूरे एशिया क्षेत्र की यात्रा की थी। 17 वर्ष की आयु में मार्को पालो द्वारा खोजे गए मार्ग को अब 'सिल्क रोड' कहा लाता है। मंगोल शासक कुबलई खान के शासनकाल में चीन पहुॅंचने वाला मार्को पालो 25 वर्षो तक विदेश में रहा था। मार्को पालो की यात्राओं का विवरण 'द ट्रैवल्स आफ मार्को पालो' नामक पुस्तक में मिलता है। यद्यपि मार्को पालो चीन तक पहुॅंचने वाला पहला यूरोपीय नहीं था, परन्तु अपने अनुभव का एक विस्तृत 'तिथि—ग्रन्थ' छोड़ने वाला प्रथम व्यक्ति था। कहा जाता है कि कोलम्बस ने मार्को पालो की 'ट्रेवल्स' की एक प्रतिलिपि के साथ् ही 'न्यम वल्ड' की यात्रा की थी। 


इब्न बतूता (Ibn Battuta)

मोरक्को का निवासी इब्न—बतूता (1304—77) एक विश्वविख्यात मुस्लिम अन्वेषक और लेखक थो, जिसका पूरा नाम 'अबू अब्द अल्लाह मुहम्मद इब्न अब्द अल्लाह अल—लवाती अल—तंजी इब्न बतूता' था। इब्न बतूता को 'रेहला' नामक अपनी अध्ययन यात्रा के लिए जाना जाता है। इब्न बतूता का भ्रमण लगभग तीस वर्ष तक चला, इस दौरान उसने सभी इस्लामी देशों सहित भारत की भी यात्रा की थी। इब्न बतूता ने अपने भ्रमण के दौरान लगभग 1 लाख 20 हजार किमी (75 हजार मील) की यात्रा की। मात्र 21 वर्ष की आयु में भ्रमण पर निकलने वाले इब्न बतूता आदेश पर 'इब्न जजैय' द्वारा लेखबद्ध किया गया। इसकी एक प्रति पेरिस (फ्रांस के राष्ट्रीय) पुस्तकालय में सुरक्षित है। 


झेंग हे ( Zheng He)

चीनी अन्वेषक झेंग हे (1371—1433) को चेंग हो, मा सान्बाओ तथा मा हे नामों से भी जाना जाता है। एक हुई (चीनी मुस्लिम) परिवार से सम्बन रखने वाला झेंग हे एक नौसेना अधिारी और कुटनितिज्ञ था, जिसने हिन्द महासागर के सीमावर्ती क्षेत्रों में चीन के प्रभाव को बढ़ाने में सहायता की थी। उसने 15 वीं शताब्दी के प्रारम्भिक वर्षों (1405—33) के दौरान दक्षिण—पूर्व एशिया, पूर्वी अफ्रीका और मध्य—पूर्व में खोज—यात्राओं का नेतृत्व किया था। झेंग हे ने अफ्रिका के दक्षिणी सिरे से हाकर पुर्तगालियों के भारत पहुॅंचने की घटना से लगभग 100 वर्ष पहले सात नौसैन्य अभियानों का नेतृत्व किया था। झेंग हे को योंगले साम्राज्य के राजनयिक एजेण्टों में सर्वश्रेष्ठ माना जाता था। झेंग हे कालीकट (भारत) के समीप जहाज में इसकी मृत्यु हो गई थी। 


लॉरेन्सो डि अल्मीडा (Lawrence D Almeida )

पुर्तगाल के अन्वेषक और सैन्य कमाण्डर लॉरेन्सो डि अल्मीडा (1480-1508) को 1505 ई. में सिलोन (अब श्रीलंका) के अभियान के लिए जाना जाता है जो सम्भवत: इस द्वीप के लिए पुर्तगाल का पहला अभियान था। पुर्तगाली भारत के पहले वायसराय (1505-09) फ्रांसिस्को डि अल्मीडा ने अपने पुत्र लॉरेन्सो डि अल्मीडा को मालदीव्स की खोज, तथा व्यापार सम्बन्धों की स्थापना के लिए भेजा गया था। लॉरेन्सो ने इस क्षेत्र में पुर्तगाली प्रभाव में वृद्धि कर 1505 ई. में कोलम्बो में उपनिवेश स्थापित किया। लॉरेन्सो ने 1506 ई. में कन्नानौर के युद्ध में जमोरिन को पराजित किया। इसके दो वर्ष बाद भारत के तटीय क्षेत्र में चौल के युद्ध के दौरान एक नौसैनिक कार्यवाही के तहत लॉरेन्सो डि अल्मीडा की मृत्यु हो गई।


फर्दिनान्द मैगलन (Ferdinand Magellan)

फर्दिनान्द मैगलन (1480-1521) पुर्तगाल का एक प्रसिद्ध अन्वेषक और नेविगेटर था। मैगलन ने पुर्तगाल (1505-13) और स्पेन (1519-21) के झण्डे के तहत समुद्री यात्राएँ की थीं। स्पेन से दक्षिण अमेरिका की यात्रा करने वाले मैगलन ने प्रशान्त महासागर के पार मैगलन जलडमरुमध्य (Strait of Magellan) का पता लगाया था। मैगलन प्रशान्त महासागर को पार करने वाले पहले यूरोपीय व्यक्ति थे। मैगलन ने मसाला द्वीप (Spice Island) नाम से विख्यात मलेशिया के मुलुक द्वीप के लिए पश्चिम से होकर मार्ग खोजने में स्पेन के शासक चार्ल्स प्रथम की सहायता की थी। उस समय पुर्तगाल और स्पेन के मध्य मसालों को लेकर प्रतिद्वन्द्रिता रहती थी। मैगलन के समय में लौंग (clove) यूरोप में सबसे मूल्यवान मसाला था।


जैकस कार्टियर (Jackass cartier)

फ्रांसीसी अन्वेषक जैकस कार्टियर (1491-1557) के कनाडा तट और सेण्ट लॉरेन्स नदी अभियानों (1534, 1535 और 1541-42) ने उत्तर अमेरिका में फ्रांसीसी दावों को आधार प्रदान किया था। कार्टियर को 'कनाडा' देश के नामकरण का श्रेय भी दिया जाता है। उन्होंने वर्तमान के क्यूबैक शहर क्षेत्र को 'कनाता' (ह्यूरोन भाषा का शब्द) नाम दिया था, जिसे कालान्तर में पूरे देश के लिए प्रयोग किया जाने लगा। जैकस कार्टियर द्वारा न्यूफाउण्डलैण्ड के पश्चिमी तट और सेण्ट लॉरेन्स खाड़ी की भी खोज की थी। इसके अलावा कार्टियर को प्रिन्स एडवर्ड आइलैण्ड की खोज का भी श्रेय दिया जाता है। जैकस कार्टियर न्यू वर्ल्ड को औपचारिक रूप से यूरोप/एशिया से अलग भूमि मानने वाले पहले व्यक्तियों में से एक था।


अमेरिगो वेस्पूची (Amerigo Vespucci)

फ्लोरेन्स (इटली) में जन्मे अमेरिगो वेस्पूची (1454-1512) एक अन्वेषक-खोजकर्ता और व्यापारी था जिसने न्यू वर्ल्ड सम्बन्धी प्रारम्भिक यात्राओं (1499-1500, 1501-02) में भाग लिया था। अमेरिका महाद्वीप का नामकरण इन्हीं के नाम पर हआ है। वेस्पूची ने 1497 से 1504 ई. के मध्य समुद्री यात्राएँ की थीं। 'न्यू वर्ल्ड' को सबसे पहले पहचानने का श्रेय अमेरिगो वेस्पूची को ही दिया जाता है। भौगोलिक अन्वेषणों के इतिहास में वेस्पूची की पहली यात्रा का बड़ा महत्व है, इसके बाद विद्वानों को विश्वास हुआ कि उपयुक्त भाग न्यू वर्ल्ड के हिस्से थे। पहली बार 1507 ई. में उस समय 'अमेरिका' नाम का पहली बार उपयोग किया गया, जब अमेरिगो वेस्पूची के अभियानों पर आधारित जानकारी से 'न्यू वर्ल्ड' का  नया मानचित्र विकसित किया गया।


वाल्टर रैले (Walter Raleigh )

सर वाल्टर रैले (1552-1618) इंग्लैण्ड के एक अन्वेषक, लेखक और साहसिक व्यक्तित्व थे। महारानी एलिजाबेथ प्रथम के करीबी रहे वाल्टर रैले को 1585 ई. में 'नाइट' की उपाधि दी गई थी। महारानी एलिजाबेथ प्रथम के कार्यकाल के दौरान वाल्टर रैले ने तीन बार अमेरिका महाद्वीप की यात्रा की थी। वाल्टर रैले को इंग्लैण्ड में तम्बाकू को लोकप्रिय बनाने के लिए भी ख्याति प्राप्त है। वाल्टर रैले को व्यापार विशेषाधिकार देकर अमेरिका में उपनिवेशों की स्थापना के लिए भेजा गया था। एलिजाबेथ प्रथम के उत्तराधिकारी जेम्स प्रथम वाल्टर रैले पर विश्वास नहीं करते थे और उन पर राजद्रोह का आरोप लगाकर मृत्युदण्ड दे दिया, जिसे बाद में कम कर आजीवन कारावास कर दिया। वाल्टर रैले ने 'हिस्ट्री ऑफ द वर्ल्ड (1614) पुस्तक की रचना की।


सैमअल डि शैम्प्लेन (Samuel de Champlain)

सैमुअल डि शैम्प्लेन (1567-1635) एक फ्रांसीसी अन्वेषक और कार्टोग्राफर थे, जिन्हें 'न्यू फ्रांस' और क्यूबेक शहर की स्थापना और शासन के लिए जाना जाता है। 'न्यू फ्रांस के जनक' नाम से विख्यात शैम्प्लेन ने अटलाण्टिक के पार 21 से 29 यात्राएँ की थीं। कनाडा के इतिहास में शैम्प्लेन का विशेष महत्व है क्योंकि उन्होंने कनाडा के तट का परिशुद्ध मानचित्र बनाया था, जिससे इस क्षेत्र में बसावट को सहायता मिली। शैम्प्लेन 1601-03 ई. तक किंग हनरी ।V के भूगोलवेत्ता भी रहे थे। शैम्प्लेन के नाम पर उत्तर अमेरिका में कई स्थानों, रास्तों, इमारतों आदि का नामकरण किया गया है जिनमें शैम्प्लेन झील प्रमुख है। यह झील उत्तरी न्यूयॉर्क और वर्मोण्ट की सीमा पर स्थित है, तथा इसका कुछ भाग कनाडा में भी है।


ज्यां बैरेट (Jean Barrett)

फ्रांस की अन्वेषक व वनस्पतिशास्त्री ज्यां बैरेट (1740-1807) को विश्व की परिक्रमा पूरी करने वाली पहली महिला समुद्री यात्री के रूप में जाना जाता है। ज्यां बैरेट 1766-69 ई. में लुइस एण्टोइन डि बाउगेनविली के अभियान की सदस्य थी। इस अभियान में 'ला बोउडेज' और 'एटोइल' नामक जहाज शामिल थे। इस यात्रा के दौरान बैरेट ने हजारों की संख्या में पौधों की प्रजातियों का पता लगाया था। इसके लिए वैज्ञानिकों द्वारा एक पौधे की प्रजाति का नामकरण बैरेट के नाम पर किया गया है। इस पुष्पीय. पौधे को सोलेनम बैरेटी (Solanum baretiae) नाम दिया गया है। ज्यां बैरेट अपनी समुद्री यात्रा में स्वय को पुरुष बताकर शामिल हई थी। ब्रिटिश इतिहासकार ग्लाइनिस रिडले ने अपनी पुस्तक द डिस्कवरी आफ ज्यां बैरेट (2010) में ज्यां बैरेट की उपलब्धियों का विवरण दिया है।


डेविड लिविंगस्टोन (David Livingstone)

डेविड लिविंगस्टोन (1813-73) एक स्कॉटिश मिशनरी, अन्वेषक, उन्मूलनवादी और चिकित्सक था, जिसने अफ्रीका महाद्वीप की खोज की थी। ब्लैनटायर (साउथ लैनार्कशायर, स्कॉटलैण्ड) में जन्मे डेविड लिविंगस्टोन ने पूर्व से पश्चिम की ओर अफ्रीका महाद्वीप को पार किया था तथा जाम्बेजी नदी और विक्टोरिया फाल्स जैसे जल संसाधनों का पता लगाया, जिनसे यूरोपीय अभी तक अनभिज्ञ थे। इंग्लैण्ड वापसी के बाद लिविंगस्टोन ने 'मिशनरी ट्रेवल्स एण्ड रिसर्चेज इन साउथ अफ्रीका' नामक पुस्तक की रचना की, जो वर्ष 1857 में प्रकाशित हुई। डेविड लिविंगस्टोन एक दयालु व्यक्ति था, जो अफ्रीका के निवासियों का जीवन सुधारना चाहता था। इसी भावना से प्रेरित होकर उसने अनेक कष्ट सहकर अफ्रीका के अज्ञात प्रदेशों का पता लगाया। वर्ष 1873 में दक्षिण अफ्रीका में उसकी मृत्यु हुई।


रिचर्ड बर्टन (Richard Burton)

सर रिचर्ड फ्रांसिस बर्टन (1821-90) एक ब्रिटिश अन्वेषक, भूगोलवेत्ता, अनुवादक, लेखक, सैनिक, उन्मुखवादी, चित्रकार, नृवंशविज्ञानी, जासूस, भाषाविद्, कवि तथा राजनयिक थे। वह एशिया, अफ्रीका और अमेरिका में अपनी यात्रा और अन्वेषण के साथ-साथ भाषाओं और संस्कृतियों के असाधारण ज्ञान के लिए प्रसिद्ध थे। उन्हें 29 यूरोपीय, एशियाई और अफ्रीकी भाषाओं का ज्ञान था। रिचर्ड बर्टन पहले यूरोपीय थे जिन्होंने 'तांगांयिका झील' की खोज की थी। यह महान अफ्रीकी झीलों में से एक है, जो घनत्व और गहराई की दृष्टि से रूस की बैकाल झील के बाद विश्व की दूसरी सबसे बड़ी मीठे पानी की झील है। यह विश्व की सबसे लम्बी झील भी है जिसका क्षेत्रफल चार देशों (तन्जानिया, कांगो, बुरुण्डी और जाम्बिया) में बँटा हुआ है। रिचर्ड बर्टन ने वर्ष 1853 में एक अफगानिस्तान मुस्लिम (पठान) के रूप में काहिरा, स्वेज और मदीना की यात्रा कर मक्का तक की यात्रा भी की थी। उन्होंने पहली बार पवित्र मुस्लिम स्थल 'काबा' का चित्र भी बनाया था।


मैरी किंग्सले (Mary Kingsley)

मैरी हेनरिएता किंग्सले (1862-1900) एक अंग्रेजी खोजकर्ता, चिकित्सक, वैज्ञानिक लेखक और नृवंशविज्ञानी थीं, जिन्होंने पूरे पश्चिमी अफ्रीका की यात्रा की थी। इसके परिणामस्वरूप अफ्रीकी संस्कृतियों और ब्रिटिश साम्राज्यवाद की यूरोपीय धारणाओं को आकार देने में सहायता मिली। मैरी किंग्सले पश्चिमी और मध्य अफ्रीका की यात्रा करने वाली पहली यूरोपीय महिला थी। मैरी ने नाइजीरिया, गैबॉन, अंगोला और कैमरून जैसे देशों की जानकारी उपलब्ध कराई। पश्चिम अफ्रीका पर आधारित अपनी लेखन सामग्रियों और यात्राओं के लिए प्रसिद्ध मैरी किंग्सले की प्रमुख रचनाओं में ट्रेवल्स इन वेस्ट अफ्रीका (1897) और वेस्ट अफ्रीकन स्टडीज (1899) शामिल हैं। दक्षिण अफ्रीकी युद्ध के दौरान बीमार कैदियों की देखभाल करते हुए ही मैरी किंग्सले टाइफाइड का शिकार हुईं जिससे उनकी मृत्यु हो गई।


गस्टूड बेल(Gustod bell)

गरटूड मार्गरेट लोथियन बेल (1868-1926) एक अंग्रेजी अन्वेषक, लेखक, यात्री, राजनीतिक अधिकारी, प्रशासक और पुरातत्वशास्त्री थीं। बेल ने सीरिया, मेसोपोटामिया, निम्न एशिया और अरब क्षेत्र की यात्राओं द्वारा इनका मानचित्रीकरण किया गया, जो ब्रिटिश शाही नीति बनाने में उल्लेखनीय सिद्ध हुए। बेल ने हाशिमिते राजवंश में बगदाद की स्थापना में प्रमुख भूमिका निभाई। बेल ने टीई लॉरेन्स के साथ जॉर्डन और इराक में हाशिमिते राजवंशों का समर्थन करने में सहायता की। गरटूड बेल को प्रथम विश्व युद्ध के बाद आधुनिक इराक की स्थापना में सहायता करने के लिए सर्वाधिक जाना जाता है। बेल ने वर्ष 1921 में इराक के निर्माण में योगदान दिया साथ ही इराक का राष्ट्रीय संग्रहालय भी स्थापित किया। गरटड बेल की मृत्यु भी बगदाद में ही हुई थी।


मेरिवेदर लुइस (Meriwether louis)

अमेरिकी अन्वेषक मेरिवेदर लुइस (1774-1809) को प्रख्यात लुइस एण्ड क्लार्क अभियान (1804-06) के लिए जाना जाता है। इस अभियान में एक अन्य अमेरिकी अन्वेषक विलियम क्लार्क (1770-1838) भी उनके साथ थे। लुइस एण्ड क्लार्क अभियान एक अमेरिकी सैन्य अभियान था जिसका उद्देश्य लइसियाना पर्चेज और उत्तर-पश्चिम प्रशान्त का पता लगाना था। यह अभियान अमेरिकी अन्वेषण के इतिहास का एक प्रमुख अध्याय है। इस अभियान के द्वितीयक उद्देश्यों में क्षेत्र के पौधों, पशु जीवन, भूगोल का अध्ययन और स्थानीय अमेरिकी भारतीय जनजातियों के साथ व्यापार स्थापित करना शामिल थे। यह अमेरिका के पश्चिमी भाग की ओर भेजा गया पहला अमेरिकी अभियान था।


एलोहा वेण्डरवेल(Aloha Wonderwell)

एलोहा वेण्डरवेल (1906-96) कनाडाई-अमेरिकी मूल की एक अन्वेषक, लेखक, फिल्म निर्माता थी, जिसका जन्म विनिपेग (कनाडा) में हुआ था। वह कार द्वारा । विश्व का चक्कर लगाने वाली पहली महिला ड्राइवर थी। उसने वर्ष 1918, 1930 और 1935 में आई फोर्ड की मॉडल टी, मॉडल ए और सेडन गाड़ियों द्वारा विश्व भ्रमण अभियान पूरा किया था। एलोहा वेण्डरवेल ने अपने जीवन काल में छह महाद्वीपों के 80 देशों की यात्रा की तथा फोर्ड मोटर गाड़ी में 5 लाख मील से अधिक दूरी तक ड्राइविंग की। एलोहा वेण्डरवेल की यह यात्रा नीस (फ्रांस) से 29 दिसम्बर, 1922 को शुरू होकर जनवरी, 1927 में नीस में ही समाप्त हुई थी।


जैकस कोउस्टियू (Jacques Cousteau)

जैकस कोउस्टियू (1910-97) एक फ्रांसीसी समुद्र अन्वेषक और इन्जीनियर थे, जो अपने अण्डरवॉटर अभियानों के लिए जाने जाते हैं। कोउस्टियू 'एक्वा लंग' के सह-आविष्कारक भी थे। यह पानी के भीतर साँस लेने का एक श्वास उपकरण है जिसे 'स्कूब' में कहते हैं। वर्ष 1942-43 में कोउस्टियू और इमिली गैगनन (फ्रांस) ने मिलकर यह उपकरण बनाया था। कोउस्टियू ने समुद्री अन्वेषण में अपने कार्य का विस्तार करने के लिए कई मार्केटिंग, विनिर्माण, इन्जीनियरिंग और अनुसंधान संगठन स्थापित किए थे। कोउस्टियू ने समुद्र अन्वेषण पर द साइलेण्ट वर्ल्ड, श्रू 18 मीटर्स ऑफ वाटर (1946), द लिविंग से (1963), थ्री एडवेन्चर्स : गालापैगोस, टिटिकाका, द ब्लू होल्स (1973), डॉल्फिन्स (1975) तथा द ह्यूमन, द ऑर्किड एण्ड द ऑक्टोपस एक्स्प्लोरिंग एण्ड कन्जर्विंग आवर नेचुरल वर्ल्ड (2007) जैसी पुस्तकें भी लिखीं।


एडमण्ड हिलेरी(Edmund Hillary)

न्यूजीलैण्ड के महान पर्वतारोही, अन्वेषक और समाजसेवी सर एडमण्ड हिलेरी (1919-2008) विश्व की सबसे ऊँची पर्वत चोटी माउण्ट एवरेस्ट पर विजय प्राप्त करने वाले पहले व्यक्ति थे। हिलेरी ने 29 मई, 1953 को तिब्बती पर्वतारोही तेनजिंग नॉर्गे के साथ एवरेस्ट फतह किया था। एडमण्ड हिलेरी ने वर्ष । 1956-57 में स्कॉट बेस की स्थापना के लिए अण्टार्कटिक अभियान का प्रतिनिधित्व भी किया था। एडमण्ड हिलेरी ने वर्ष 1960 में 'हिमालयन ट्रस्ट' की स्थापना की, जो खुम्भू क्षेत्र (नेपाल) के शेरपाओं के जीवन स्तर को सुधारने के लिए कार्य करती है, इन शेरपाओं ने हिलेरी के अभियानों में उनकी काफी सहायता की थी। हिलेरी ने एवरेस्ट के अलावा न्यूजीलैण्ड की 16 सबसे ऊँची पवर्त चोटियों के साथ आल्प्स (यूरोप) में भी कई पर्वत चोटियाँ भी फतह की थीं।


वेलेण्टीना तेरेशकोवा (Valentina Tereshkova)

रूस की अन्तरिक्षयात्री और अन्वेषक वेलेण्टीना व्लादिमिरोवना तेरेशकोवा (1937) अन्तरिक्ष की यात्रा करने वाली विश्व की पहली महिला हैं। तेरेशकोवा 71 घण्टे की अपनी अन्तरिक्ष यात्रा के दौरान पृथ्वी के 48 चक्कर लगाकर वापस लौटी थीं। यह उस समय सभी अमेरिकी अन्तरिक्ष यात्रियों द्वारा संयुक्त रूप से अन्तरिक्ष में बिताए गए समय से अधिक समयावधि थी। तेरेशकोवा 'वॉस्टोक 6' नामक अन्तरिक्ष यान से 16 जून, 1963 को अन्तरिक्ष में पहँची थीं। इस ऐतिहासिक अन्तरिक्ष उड़ान के बाद तेरेशकोवा को 'ऑर्डर ऑफ लेनिन' और 'हीरो ऑफ द सोवियत यूनियन' सम्मान प्रदान किए गए। वर्ष 1966 में तेरेशकोवा यूएसएसआर की राष्ट्रीय संसद 'सुप्रीम सोवियत' की सदस्य बनीं तथा कई अन्तर्राष्ट्रीय महिलाओं के संगठनों और कार्यक्रमों के लिए सोवियत प्रतिनिधि के रूप में कार्य किया। 1980 के दशक तक उनकी अन्तरिक्ष यात्रा किसी महिला द्वारा की गई एकमात्र अन्तरिक्ष यात्रा थी।


तानिया ऐबी(Tania Abbey)

अमेरिकी नाविक व अन्वेषक तानिया ऐबी (1966) ने वर्ष 1985-87 में 18 व 21 वर्ष की आयु के बीच एक 26 फीट की सेलबोट में अकेले पृथ्वी की परिक्रमा करने की उपलब्धि प्राप्त की थी। तानिया यह का कीर्तिमान स्थापित करने वाली पहली अमेरिकी और उस समय विश्व की सबसे कम आयु की महिला थी। यात्रा के दौरान तानिया ने कैरेबियन, दक्षिण प्रशान्त, हिन्द महासागर, लाल सागर, भूमध्य सागर तथा उत्तर अटलाण्टिक पार किए इस दौरान 23 देशों में पड़ाव लिए। तानिया ऐबी ने अपनी इस यात्रा को 'मेडन वॉयेज' नामक पुस्तक में उजागर किया है।


एलेन मैकआर्थर(Ellen MacArthur)

ब्रिटिश पाल-नौका चालक डेम ऐलन मैकआर्थर (1976) ने अपने पहले प्रयास के दौरान ही सबसे तेज अकेले बिना रुके पाल-नौका से विश्व का चक्कर लगाने का कीर्तिमान बनाया था। मैकआर्थर ने वर्ष 2005 में यह उपलब्धि प्राप्त की थी। एलेन मैकआर्थर ने फ्रांसिस जोयोन का रिकॉर्ड तोड़ते हुए यह उपलब्धि प्राप्त की थी। वर्ष 2008 में इस फ्रांसीसी नाविक ने पुन: यह रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया था। पेशेवर नौकायन से सेवानिवृत्त होने के बाद एलेन मैकआर्थर ने 'एलेन मैकआर्थर फाउण्डेशन' की स्थापना की। एलेन मैकआर्थर ने टेकिंग ऑन द वर्ल्ड (2002), रेस अगेंस्ट टाइम (2005) और फुल सर्कल (2010) नामक पुस्तकें भी लिखी हैं।