Believe you can succeed and you will

सफलता यानी बहुत सी अद्भुत और अच्छी चीजें। सफलता का मतलब है अमीरी - शानदार घर, मज़ेदार छुट्टियां, यात्रा, नयी चीजें, आर्थिक सुरक्षा, अपने बच्चों को ज़्यादा से ज़्यादा खुशहाली देना। सफलता का मतलब है प्रशंसा का पात्र बनना, लीडर बनना, अपने बिज़नेस और सामाजिक जीवन में सम्मान पाना। सफलता का मतलब है आज़ादी - चिंताओं, डर, कुंठाओं और असफलता से आज़ादी। सफलता का मतलब है आत्म-सम्मान, जिंदगी का असली सुख और जीवन में संतुष्टि, जो लोग आप पर निर्भर हैं उनके लिये अधिक से अधिक करने की क्षमता।

सफलता का मतलब है जीतना! सफलता – उपलब्धि - मनुष्य के जीवन का लक्ष्य है!

हर इन्सान सफलता चाहता है। हर इन्सान चाहता है कि उसे जिंदगी का हर सुख मिले। कोई भी घिसट-घिसटकर औसत जिंदगी नहीं जीना चाहता। कोई भी सेकंड क्लास नहीं दिखना चाहता या इस तरह का जीवन नहीं गुज़ारना चाहता।

सफल जीवन का व्यावहारिक रास्ता हमें बाइबल की उस पंक्ति में दिखाया गया है जिसके अनुसार आस्था से पहाड़ हिलाये जा सकते हैं।

यकीन कीजिये, सचमुच यकीन कीजिये कि आप पहाड हिलामा और आप वाकई ऐसा कर सकते हैं। ज़्यादातर लोगों को यह यकीन ही होता कि उनमें पहाड़ हिलाने की क्षमता है। इसका परिणाम यह होता है कि वे ऐसा कभी नहीं कर पाते।

किसी मौके पर आपने शायद किसी को यह कहते सुना होगा, "यह सोचना बकवास है कि आप किसी पहाड़ को यह कहकर हिला सकते हैं. 'पहाड़, मेरे रास्ते से हट जाओ।' यह नामुमकिन है।" .

जो लोग इस तरह से सोचते हैं उन्होंने आस्था और इच्छा के बीच के अंतर को ठीक से नहीं समझा है। यह सच है कि केवल इच्छा करने भर से आप पहाड़ को नहीं हटा सकते। केवल इच्छा करने भर से आप एक्जीक्यूटिव नहीं बन जाते। केवल इच्छा करने भर से आप पाँच बेडरूम और तीन बाथ वाले घर के मालिक नहीं बन जाते या आप अमीर नहीं बन जाते। केवल इच्छा करने भर से आप लीडर नहीं बन जाते।

परंतु अगर आपमें विश्वास हो, तो आप पहाड़ को हिला सकते हैं। अगर आपको अपनी सफलता का यक़ीन हो, तो इस विश्वास के सहारे आप सफलता हासिल कर सकते हैं, दुनिया जीत सकते हैं।

आस्था या विश्वास की शक्ति के बारे में कुछ भी जादुई या रहस्यमय नहीं है।

विश्वास इस तरह काम करता है। 'मुझे विश्वास है कि मैं यह कर सकता हूँ' वाला रवैया हमें वह शक्ति, योग्यता और ऊर्जा देता है जिसके सहारे हम वह काम कर पाते हैं। जब आपको यकीन होता है कि आप कोई काम कर सकते हैं, तो आपको अपने आप पता चल जाता है कि इसे कैसे किया जा सकता है।

हर दिन देश भर में युवा लोग नई नौकरियां शुरू कर रहे हैं। ये सभी युवक-युवतियां चाहते हैं कि किसी दिन वे सफलता की चोटी पर पहुँचें और सफल बनें। परंतु इनमें से ज़्यादातर लोगों को यह विश्वास नहीं है कि वे कभा चोटी पर पहुँच पाएंगे। और इसी कारण वे चोटी पर नहीं पहुँच पाते। अगर  आप यह मान लेते हैं कि चोटी पर पहुँचना असंभव है, तो आप उन सीढ़ियों को नहीं ढूंढ पाएंगे जिनके सहारे आप चोटी पर पहुँच सकते हैं। ऐसे लोग जिंदगी भर ‘औसत' आदमियों की तरह ही व्यवहार करते रहते हैं।

परंतु इनमें से कुछ युवक-युवतियों को विश्वास होगा कि वे सफल हो सकते हैं। वे अपने काम के प्रति 'मैं चोटी पर पहुँचकर दिखाऊँगा' वाला रवैया रखते हैं। और चूंकि उनमें जबर्दस्त विश्वास होता है इसलिये वे चोटी पर पहुँच जाते हैं। यह जानते हुए कि वे भी सफल हो सकते हैं- और ऐसा असंभव नहीं है- यह लोग अपने वरिष्ठ एक्जीक्यूटिब्ज के व्यवहार को गौर से देखते हैं। वे सीखते हैं कि सफल लोग किस तरह समस्याओं को सुलझाते हैं और निर्णय लेते हैं। वे सफल लोगों के रवैये को ध्यान से देखते हैं।

जिस आदमी को विश्वास होता है कि वह काम कर लेगा, उसे हमेशा उस काम को करने का तरीका सुझ जाता है।

मेरी एक परिचित महिला ने दो साल पहले यह फैसला किया कि वह मोबाइल होम बेचने की सेल्स एजेंसी बनाएगी। उसे कई लोगों ने सलाह दी कि उसे ऐसा नहीं करना चाहिये, क्योंकि वह ऐसा नहीं कर पाएगी।

- उस महिला के पास पूंजी के नाम पर सिर्फ 30०० डॉलर थे और उसे बताया गया कि इस काम को शुरू करने के लिये इससे कई गुना ज़्यादा पूंजी की ज़रूरत होती है।

उसे समझाया गया, “इसमें प्रतियोगिता बहुत है। और इसके अलावा, आपको मोबाइल होम्स बेचने का कोई अनुभव भी नहीं है। आपको बिज़नेस चलाने का अनुभव भी नहीं है।'

परंतु इस युवा महिला को अपनी क्षमताओं पर भरोसा था। उसे विश्वास था कि वह सफल होगी। वह मानती थी कि उसके पास पूंजी नहीं थी, कि बिज़नेस में सचमुच बहुत प्रतियोगिता थी, और यह कि उसके पास अनुभव नहीं था।

'परंतु,' उसने कहा, 'मुझे यह साफ़ दिख रहा है कि मोबाइल होम उद्योग तेजी से फैलने जा रहा है। इसके अलावा, मैंने अपने इस बिज़नेस में प्रतियोगिता का अध्ययन कर लिया है। मैं जानती हूँ कि मैं इस बिज़नेस को इस शहर में सबसे अच्छे तरीके से कर सकती हूँ। मैं जानती हूँ कि मनसे थोड़ी-बहुत गलतियां तो होंगी, परंतु मैं चोटी पर तेजी से पहुँचना चाहती हैं।'

और वह पहुँच गयी। उसे पूंजी जुटाने में कोई ख़ास समस्या नहीं आई। इस बिज़नेस में सफलता के उसके दृढ़ विश्वास को देखकर दो निवेशकों ने उसके व्यवसाय में निवेश करने का जोखिम लिया। और संपूर्ण आस्था के सहारे उसने 'असंभव' को कर दिखाया- उसने बिना पैसा दिये एक ट्रेलर निर्माता से माल एडवांस ले लिया।

पिछले साल उसने 1,०००,००० डॉलर से ज़्यादा कीमत के ट्रेलर बेचे।

'अगले साल,' उसका कहना है, 'मुझे उम्मीद है कि मैं 2,0००,००० डॉलर का आंकड़ा पार कर जाऊँगी।'

विश्वास, दृढ़ विश्वास, मस्तिष्क को प्रेरित करता है कि वह लक्ष्य को प्राप्त करने के तरीके, साधन और उपाय खोजे। और अगर आप यकीन कर लें कि आप सफल हो सकते हैं, तो इससे दूसरे भी आप पर विश्वास करने लगते हैं।

ज़्यादातर लोग विश्वास की शक्ति में भरोसा नहीं करते। परंतु कई लोग करते हैं, जैसे अमेरिका के सक्सेसफुल विले में रहने वाले नागरिक। कुछ सप्ताह पहले मेरे एक दोस्त ने जो स्टेट हाइवे डिपार्टमेंट में अधिकारी है मुझे एक 'पहाड़ हिलाने वाला' अनुभव बताया।

‘पिछले महीने,' मेरे दोस्त ने बताया, 'हमारे विभाग ने कई इंजीनियरिंग कंपनियों को टेंडर नोटिस दिये। हमें अपने हाइवे बनाने के लिये किसी फर्म से आठ पुलों की डिजाइन बनवानी थी। पुलों की लागत 5,०००,००० डॉलर थी। जिस भी इंजीनियरिंग फर्म को चुना जाता, उसे डिजाइनिंग के काम के लिये 4 प्रतिशत का कमीशन दिया जाना प्रस्तावित था यानी 20०,००० डॉलर।

_ मैंने इस बारे में 21 डिज़ाइनिंग फर्स से बात की। सबसे बड़ी चार फों ने तो तत्काल प्रस्ताव भेज दिये। बाकी 17 कंपनियां छोटी थीं, जिनमें केवल 3 से 7 इंजीनियर ही थे। प्रोजेक्ट इतना बड़ा था कि इनमें से 16 तो इसके बड़े आकार को देखकर ही घबरा गई। उन्होंने इतने बड़े प्रोजेक्ट को देखा, अपने सिर को हिलाया और इस तरह की बात कही, 'यह हमारे लिए बहुत बड़ा प्रोजेक्ट है। काश हम इसे कर पाते, परंतु कोशिश करने से कोई फायदा नहीं।'

'परंतु इनमें से एक छोटी फर्म ने, जिसके पास केवल तीन इंजीनियर थे, प्रोजेक्ट का अध्ययन किया और कहा, 'हम इसे कर सकते हैं। हम एक प्रस्ताव तो भिजवा ही देते हैं।' उन्होंने प्रस्ताव भिजवाया, और उन्हें वह काम मिल गया।'

जिन्हें यकीन होता है कि वे पहाड़ हिला सकते हैं, वे ऐसा कर पाते हैं। जिन्हें यकीन होता है कि वे पहाड़ नहीं हिला सकते, वे ऐसा नहीं कर पाते। विश्वास से ही ऐसा करने की शक्ति मिलती है।

दरअसल, आज के आधुनिक दौर में विश्वास के दम पर पहाड हिलाने से भी ज़्यादा बड़ी चीजें करना मुमकिन है। आज के अंतरिक्ष अन्वेषण कार्यक्रम का सबसे मूलभूत तत्व यह है कि अंतरिक्ष को जीता जा सकता है। मनुष्य अंतरिक्ष में यात्रा कर सकता है, इस दृढ़ विश्वास के बिना हमारे वैज्ञानिकों में वह साहस, उत्साह, और रुचि पैदा नहीं हो पाती जिससे उन्हें आगे बढ़ने का हौसला मिलता। यह विश्वास कि कैंसर का इलाज किया जा सकता है, हमें इस बात के लिये प्रेरित करता है कि हम इसके उपचार को खोजें और अंततः ऐसा उपचार हम खोज ही लेंगे। अभी यह चर्चा चल रही है कि इंग्लिश चैनल के नीचे एक टनल बनाई जाए और इंग्लैंड को महाद्वीप से जोड़ दिया जाए। यह टनल बन पाएगी या नहीं, यह इस बात पर निर्भर करता है कि इसे बनाने वाले लोगों के पास ऐसा कर पाने का विश्वास है या नहीं।

प्रबल विश्वास ही वह शक्ति है जो महान पुस्तकों, नाटकों, वैज्ञानिक खोजों के पीछे होती है। सफलता में विश्वास ही हर सफल बिज़नेस, चर्च और राजनीतिक संगठन के पीछे होता है। सफलता में विश्वास ही वह मूलभूत, अनिवार्य तत्व है जो हर सफल आदमी में पाया जाता है।

विश्वास कीजिये, सचमुच विश्वास कीजिये, कि आप सफल हो सकते हैं और आप हो जाएंगे। बरसों तक मैंने ऐसे कई लोगों से बात की है जो अपने बिजनेस या दूसरे कैरियर में असफल हो गये थे। मैंने असफलता के बहुत से कारण और बहुत से बहाने सुने हैं। असफलता के बारे में हुई इन चर्चाओं में हमें एक महत्वपूर्ण जानकारी मिली। असफल आदमी के मुँह से इस तरह की कोई न कोई बात ज़रूर सुनने में आई, 'सच कहूँ तो, मुझे लग ही नहीं रहा था कि हम सफल हो पाएंगे' या 'मैंने काम शुरू किया उसके पहले ही मुझे इसकी सफलता पर शक हो रहा था' या 'दरअसल जब यह असफल हुआ तो मुझे ज़रा भी हैरानी नहीं हुई।

'ओके-मैं-कोशिश-करके-देखता-हूँ-पर-मुझे-नहीं-लगता-कि-यहसफल-होगा' वाले रवैये की वजह से ही आदमी असफल होता है।

- अविश्वास नकारात्मक शक्ति है। जब मस्तिष्क किसी बात पर अविश्वास करता है या किसी बात पर संदेह करता है तो मस्तिष्क ऐसे 'कारणों' को खोज लेता है जिससे उस अविश्वास को बल मिले। ज़्यादातर असफलताओं के लिए जिम्मेदार हैं : शंका, अविश्वास, असफल होने की अवचेतन इच्छा, सफल होने की सच्ची इच्छा न होना।

(शंका कीजिये और असफल हो जाइये। जीत के बारे में सोचिये और सफल हो जाइये।)

एक युवा कहानीकार अपनी लेखन महत्वाकांक्षाओं को लेकर मुझसे हाल में मिली। चर्चा उसके क्षेत्र के एक महान लेखक के बारे में होने लगी।

"ओह,' उसने कहा, 'मिस्टर एक्स असाधारण लेखक हैं, परंतु मैं उनके जितनी सफल नहीं हो सकती।'

उसके रवैये से मुझे बहुत निराशा हुई क्योंकि मैं उस मिस्टर एक्स को जानता हूँ। उनमें न तो असाधारण बुद्धि है, न ही असाधारण प्रेरणा है, न ही वे किसी और बात में सुपर हैं, उनमें केवल एक ही बात असाधारण है और वह है उनका असाधारण आत्मविश्वास। उन्हें दृढ़ विश्वास है कि वे सर्वश्रेष्ठ लेखक हैं और इसीलिये वे सर्वश्रेष्ठ लिखते हैं।

लीडर का सम्मान करना अच्छी बात है। उससे सीखें। उसे ध्यान से देखें। उसका अध्ययन करें। परंतु उसकी पूजा न करें। यह यकीन करें कि आप उससे आगे निकल सकते हैं। यह यकीन करें कि आप उससे ऊपर जा सकते हैं। जिन लोगों का रवैया सेकंड क्लास होता है वे सेकंड क्लास काम ही कर पाते हैं।
इसे इस तरह से देखें। विश्वास ही वह थर्मोस्टेट है जो हमारी उपलब्धियों को नियमित करता है। उस आदमी का अध्ययन करें जो औसत जिंदगी के जाल में उलझा हुआ है। उसे विश्वास है कि वह अयोग्य है, इसीलिये उसे अयोग्य समझा जाता है। वह मानता है कि वह बड़े काम नहीं कर सकता और इसीलिये वह उन्हें नहीं कर पाता। वह मानता है कि वह महत्वपूर्ण नहीं है, इसलिये जो भी वह करता है वह काम महत्वहीन बन जाता है। समय के साथ-साथ आत्मविश्वास का अभाव उसकी बातों, चाल-ढाल
और कामों में दिखने लगता है। जब तक कि वह अपने थर्मोस्टेट को फिर से संतुलित नहीं करेगा, तब तक वह सिकुड़ता रहेगा, बौना होता जाएगा और अपनी नज़रों में छोटा होता जाएगा। और चूंकि दूसरे हममें वही देखते हैं जो हम अपने आप में देखते हैं इसलिये वह अपने आसपास के लोगों की नज़रों में भी छोटा होता जाएगा।
 अब उस आदमी की तरफ़ देखें जो आगे बढ़ रहा है। उसे विश्वास है कि वह योग्य है और इसलिये बाकी लोग भी उसे योग्य समझते हैं। उसे विश्वास है कि वह बड़े, कठिन काम कर सकता है- और इसलिये वह इन्हें कर लेता है। जो भी वह करता है, जिस तरह भी वह लोगों से बात करता है, उसका चरित्र, उसके विचार, उसका दृष्टिकोण; सभी बातों में यह झलकता है कि “यह आदमी प्रोफेश्नल है। यह एक महत्वपूर्ण आदमी है।"
कोई भी आदमी वैसा ही होता है, जैसे कि उसके विचार होते हैं। बड़ी बातों में यकीन कीजिये। अपने थर्मोस्टेट को आगे की तरफ़ सेट कीजिये। अपने सफलता के अभियान की शुरूआत इस सच्चे, संजीदा विश्वास से कीजिये कि आप सफल हो सकते हैं। अगर आपको यकीन है कि आप महान बन सकते हैं तो आप सचमुच महान बन जाएंगे।
कई साल पहले मैं डेट्रॉइट में एक बिज़नेसमेन समूह को संबोधित कर रहा था। चर्चा के बाद एक आदमी मेरे पास आया और उसने अपना परिचय देने के बाद कहा, "मुझे आपकी बातें पसंद आई। क्या आप मुझे कुछ मिनट का समय दे सकते हैं ? मैं आपके साथ अपने व्यक्तिगत अनुभव पर चर्चा करना चाहता हूँ।"
कुछ ही समय बाद हम एक रेस्तरां में बैठे हुए थे।
'मेरा एक व्यक्तिगत अनुभव है,' उसने शुरू किया, 'जो आपकी इस शाम की चर्चा से संबंधित था, जिसमें आपने कहा था कि आप किस तरह अपने दिमाग को अपना सहयोगी बनाएं, न कि अपना विरोधी। मैंने आज तक यह किसी को नहीं बताया है कि मैंने किस तरह अपने आपको औसत लोगों की दुनिया से ऊपर उठाया है, परंतु मैं आपको यह बताना चाहता हूँ।'
'और मैं यह सुनना चाहूँगा,' मैंने कहा।
'आज से पाँच साल पहले मैं भी औरों की ही तरह था- मेरी जिंदगी घिसट भर रही थी। मेरी कमाई औसत थी। परंतु यह आदर्श नहीं थी। हमारा घर बहुत छोटा था और हमारे पास अपनी मनचाही चीज़ों को खरीदने के लिये पैसे नहीं रहते थे। मेरी पत्नी, भगवान उसका भला करे, इस बात की शिकायत नहीं करती थी, परंतु उसके चेहरे पर यह साफ लिखा हुआ था कि उसने भाग्य के सामने हार मान ली है और वह सचमुच खुश नहीं है। अपने अंदर मैं बहुत असंतुष्ट महसूस कर रहा था। जब मैंने देखा कि मैं किस तरह अपनी अच्छी पत्नी और दो बच्चों को आदर्श जीवनशैली नहीं दे पा रहा हूँ, तो मुझे अंदर से बहुत चोट पहुँची।'
- 'परंतु आज सब कुछ बदल गया है, मेरे दोस्त ने कहा। 'आज हम दो एकड के प्लॉट पर बने अपने सुंदर नये घर में रहते हैं, जो यहाँ से दो सौ मील दर है। आज हमें इस बात की चिंता नहीं है कि हम अपने बच्चों को अच्छे कॉलेज में भेज पायेंगे या नहीं। आज मेरी पत्नी जब नये कपडे खरीदती है तो उसे यह नहीं लगता जैसे उसने कोई गुनाह कर दिया है। अगली गर्मियों में हम लोग एक महीने की छुट्टियाँ मनाने यूरोप जा रहे हैं। हम सचमुच जिंदगी का आनंद ले रहे हैं।'
'ऐसा कैसे हुआ?' मैंने पूछा।
उसका जवाब था, "आपने आज रात एक बात कही थी, 'अपने विश्वास की शक्ति का दोहन करें।' मैंने वही किया और नतीजा आपके सामने है। पाँच साल पहले मैंने डेट्रॉइट की एक टूल-एंड-डाई कंपनी के बारे में सुना। हम उस वक्त क्लीवलैंड में रह रहे थे। मैंने फैसला किया कि कोशिश करने में हर्ज़ ही क्या है, शायद यहाँ थोड़ी ज़्यादा तनख्वाह मिल जाये। मैं यहाँ रविवार की शाम को ही आ गया, जबकि इंटरव्यू सोमवार को था।
“डिनर के बाद मैं अपने होटल के कमरे में बैठा हुआ था और न जाने क्यों, मैं खुद को कोसने लगा, 'आखिर क्यों,' मैंने खुद से पूछा, 'आखिर क्यों, मैं एक असफल आदमी की तरह मिडिल क्लास के दलदल में फंसा हुआ हूँ? आखिर क्यों थोड़ी ज्यादा तनख्वाह के लिये मैं यह नौकरी हासिल करने की कोशिश कर रहा हूँ ?'
"मैं आज तक यह नहीं जान पाया कि मैंने ऐसा क्यों किया, परंतु इसके बाद मैंने होटल का नोटपैड लिया। नोटपैड में मैंने अपने से ज़्यादा सफल पाँच लोगों के नाम लिखे जिन्हें मैं वर्षों से जानता था और जिनकी आमदनी
और नौकरी मुझसे काफी बेहतर थीं। दो तो मेरे पुराने पड़ोसी थे जो अब एक पॉश कॉलोनी में रहते थे। दो लोगों के लिये मैं पहले काम किया करता था और एक मेरा रिश्तेदार था।
"इसके बाद- मैंने खुद से पूछा कि मेरे इन पाँच दोस्तों में ऐसा क्या था जो मुझमें नहीं था। मैंने अपनी और उनकी बुद्धि की तुलना की और ईमानदारी से विश्लेषण करने पर यह पाया कि जहाँ तक बुद्धि का सवाल था, वे मुझसे बेहतर नहीं थे। न ही वे मुझसे शिक्षा, चरित्र या व्यक्तिगत आदतों में बेहतर थे।
"आखिरकार में सफलता के एक ऐसे गुण पर आया जिसके बारे में काफी चर्चा होती है। पहल करना। मुझे यह मानने में काफ़ी दिक्कत हुई, पर इसे मानने के सिवा कोई चारा नहीं था। इस मामले में मेरा रिकॉर्ड उनकी 
तुलना में काफ़ी नीचे था।
“यह सब सोचते-सोचते सुबह के 4 बज गये, परंतु मेरा दिमाग बिलकुल स्पष्ट सोच रहा था। जीवन में पहली बार मैं अपनी कमज़ोरी को देख पाया था। मैंने पाया कि इसी चीज़ के कारण मैं जीवन में इतना पीछे रह गया था। मैंने हमेशा सहारे के लिये अपने साथ एक छोटी छड़ी रखी थी। मैं अपने अंदर जितनी गहराई तक गया, मैंने पाया कि मैं इसलिये पहल नहीं करता था क्योंकि मुझे अंदर से यह विश्वास नहीं था कि मैं ऐसा कर सकता था, कि मैं सचमुच इस काबिल हूँ।
- "पूरी रात मैं यही सोचता रहा कि आत्मविश्वास की कमी के कारण ही मैंने अपने मस्तिष्क को अपना विरोधी बना लिया था। मैंने पाया कि मैं खुद को यही बताता था कि मैं आगे क्यों नहीं बढ़ सकता, जबकि मुझे खुद को यह बताना चाहिये था कि मुझे आगे क्यों बढ़ना चाहिये। मैं अपने आपको सस्ते में बेच रहा था। अपनी नज़रों में गिरा होने के कारण ही मैं लोगों की नज़रों में भी गिरा हुआ था। यह मेरी हर बात में स्पष्ट रूप से दिख रहा था। तभी मुझे यह समझ में आया कि जब तक मैं खुद में विश्वास नहीं करूँगा, तब तक कोई दूसरा भी मुझ पर विश्वास नहीं करेगा।
"उसी समय मैंने फैसला किया, 'अब सेकंड क्लास की ज़िंदगी खत्म। आगे से मैं खुद को सस्ते में नहीं बेचूंगा।'
“अगली सुबह भी मुझमें वही आत्मविश्वास था। नौकरी के उस इंटरव्यू में मेरे विश्वास का पहला इम्तहान हुआ। इंटरव्यू के लिये अपने घर से चलते समय मैंने सोचा था कि मैं हिम्मत करके अपनी वर्तमान नौकरी से 750 या 10०० डॉलर ज़्यादा मांग लूंगा। परंतु अब, जब मैं जान गया था कि मैं एक स्रोग्य आदमी था, मैंने 3500 डॉलर ज़्यादा माँगे। और यह मुझे मिले भी। मैं खुद को महंगे दाम में इसलिये बेच पाया क्योंकि एक रात तक चले लंबे आत्म-विश्लेषण के बाद मैं यह जान गया था कि मुझमें ऐसे गुण हैं जिन्हें महंगे दामों पर बेचा जा सकता है।
“दो साल में ही मैंने अपनी प्रतिष्ठा एक सफल बिज़नेसमैन के रूप में बना ली। सभी जान गये कि यह आदमी बिजनेस ला सकता है। फिर मंदी का दौर आया। इस दौर में मैं और भी ज्यादा मल्यवान बन गया क्योंकि मुशन अपनी इंडस्ट्री में सबसे अच्छा बिजनेस हासिल करने की काबिलियत थी। कंपनी का पुनर्गठन हुआ और मुझे बहुत ज्यादा तनख्वाह मिलने लगी और इसके अलावा मुझे कंपनी के काफ़ी सारे शेयर भी मिले।
। अपने आप में विश्वास कीजिये और आपके साथ अच्छी घटनाएं होने लगेंगी।
आपका दिमाग 'विचारों की फैक्टरी' है। यह एक व्यस्त फैक्टरी है, जो एक दिन में अनगिनत विचारों का उत्पादन करती है।
आपके विचारों की इस फैक्टरी में उत्पादन के इन्चार्ज दो फोरमैन हैं, जिनमें से एक को हम मिस्टर विजय और दूसरे को मिस्टर पराजय का नाम देंगे। मिस्टर विजय सकारात्मक विचारों के निर्माण के इन्चार्ज हैं। उनकी विशेषज्ञता इस तरह के कारण देने में है कि आप क्यों सफल हो सकते हैं, आपमें इस काम की काबिलियत क्यों है, और आप इसमें क्यों सफल होंगे।
दूसरा फोरमैन मिस्टर पराजय नकारात्मक, कमतरी के विचारों का उत्पादन करता है। यह फोरमैन इस तरह के कारण ढूंढने में महारत रखता है कि आप कोई काम क्यों नहीं कर सकते, कि आप क्यों कमज़ोर हैं, कि आप क्यों अक्षम हैं। उसकी विशेषज्ञता इस तरह के विचारों की श्रृंखला ढूंढने में है कि 'आप क्यों असफल हो जायेंगे ?'
मिस्टर विजय और मिस्टर पराजय दोनों ही बेहद आज्ञाकारी होते हैं। वे तत्काल आपकी बात पर ध्यान देते हैं। आपको दोनों में से किसी भी फोरमैन को मानसिक रूप से संकेत भर देना होता है। अगर संकेत सकारात्मक होता है तो मिस्टर विजय आगे आ जायेंगे और काम में जुट जायेंगे। इसी तरह नकारात्मक संकेत देखते ही मिस्टर पराजय सक्रिय हो जायेंगे।
दोनों फोरमैन आपके लिये किस तरह काम करते हैं, इसे खुद आज़माकर देखें। खुद से कहें, 'आज तो बड़ा ही बुरा दिन है।' इससे मिस्टर पराजय हरकत में आ जायेंगे और वे आपको सही साबित करने के लिये कुछ तथ्यों का उत्पादन कर देंगे। वे आपको यह सुझाव देंगे कि मौसम ज्यादा गर्म या ज़्यादा ठंडा है, आज बिज़नेस बुरा रहेगा, बिक्री कम होगी, दूसरे लोग चिड़चिड़े रहेंगे, आप बीमार पड़ सकते हैं, आपकी पत्नी आज बात का बतंगड बना देगी। मिस्टर पराजय बेहद सक्षम होते हैं। वे कुछ ही मिनटों में आपको पूरी तरह विश्वास दिला देते हैं कि आज का दिन सचमुच बहुत बुरा है। और आपका दिन सचमुच बुरा साबित होता है।
परंतु खुद से कहें, 'आज कितना बढ़िया दिन है।' और तत्काल मिस्टर विजय सक्रिय हो जाते हैं। वे आपको बताते हैं, 'आज शानदार मौसम है। खुशगवार माहौल है। आज आप जो भी काम करेंगे बढ़िया करेंगे और आप उसमें निश्चित रूप से सफल होंगे।' और आपका वह दिन सचमुच बहुत अच्छा गुज़रता है।
इसी तरह से मिस्टर पराजय आपको यह बताते हैं कि आप मिस्टर स्मिथ को माल क्यों नहीं बेच सकते, जबकि मिस्टर विजय आपको बताते हैं कि आप मिस्टर स्मिथ को माल किस तरह बेच सकते हैं। मिस्टर पराजय आपको यह विश्वास दिलाते हैं कि आप असफल हो जायेंगे, जबकि मिस्टर विजय आपको यह विश्वास दिलाते हैं कि आप क्यों सफल होंगे। मिस्टर पराजय टॉम को नापसंद करने के कई कारण गिना देंगे, जबकि मिस्टर विजय टॉम को पसंद करने के कई कारण गिना देंगे।
आप इन दोनों फोरमैनों में से जिसे ज़्यादा काम देंगे, वह उतना ही ताकतवर बनता जायेगा। अगर मिस्टर पराजय को ज्यादा काम दिया जायेगा तो वह अपने कर्मचारियों की संख्या बढ़ा लेगा और आपके दिमाग की ज़्यादा जगह पर कब्जा कर लेगा। एक दिन ऐसा आयेगा जब वह आपके दिमाग के विचारों का पूरा उत्पादन अपने हाथ में ले लेगा और इसके बाद आपकी मानसिकता पूरी तरह नकारात्मक हो जायेगी।
समझदारी इसी में है कि आप मिस्टर पराजय को तत्काल नौकरी से निकाल दें। आपको उनकी ज़रूरत नहीं है। आपको उनकी इस सलाह की ज़रूरत नहीं है कि आप कोई काम क्यों नहीं कर सकते, कि आप क्यों अक्षम हैं, और आप क्यों असफल होंगे इत्यादि। जहाँ आप पहुँचना चाहते हैं, वहाँ तक आपको पहुँचाने में मिस्टर पराजय आपकी कोई मदद नहीं कर सकते, इसलिये मिस्टर पराजय को आप धक्के मारकर अपने दिमाग की फैक्टरी से बाहर निकाल दीजिये।
- पूरे समय मिस्टर विजय से ही काम लें। जब भी आपके दिमाग में कोई विचार आये तो मिस्टर विजय को ही वह काम सौंपें। वह आपको बतायेंगे कि आप किस तरह सफल हो सकते हैं।
अगले चौबीस घंटों में अमेरिका में 11,500 नये ग्राहक आ जायेंगे।
जनसंख्या तेजी से बढ़ रही है। अगले दस सालों में 3.5 करोड़ लोगों की वृद्धि का अनुमान है। इसका मतलब है पाँच बड़े शहरों की वर्तमान जनसंख्याः न्यूयॉर्क, शिकागो, लॉस एंजेलिस, डेट्रॉइट और फिलाडेल्फिया। कल्पना कीजिये!
नये उद्योग, नये वैज्ञानिक आविष्कार, बढ़ते हुये बाज़ार- हर तरफ़ अवसर ही अवसर है। यह अच्छी खबर है। ज़िंदा रहने के लिये यह अद्भुत समय है।
हर क्षेत्र में ऐसे अवसर बिखरे हैं जहाँ चोटी के लोगों की रिकॉर्ड मांग है- उन लोगों की जिनमें दूसरों को प्रभावित करने की अधिकतम योग्यता है, जो दूसरों का मार्गदर्शन कर सकते हैं, जो उनके लीडर बनकर उनकी सेवा कर सकते हैं। और जो लोग ऐसे लीडर बनेंगे वे सभी आज वयस्क हैं या वयस्क बनने वाले हैं। उनमें से एक आप भी हो सकते हैं।
आर्थिक व्यवस्था में उछाल का यह मतलब नहीं है कि आप व्यक्तिगत रूप से सफल हो ही जायेंगे। देखा जाये तो अमेरिकी अर्थव्यवस्था में उछाल हमेशा ही रहा है। परंतु इसके बाद भी लाखों-करोड़ों लोग संघर्ष ही करते रहते हैं और सफल नहीं हो पाते। ज़्यादातर लोग औसत जिंदगी के दलदल में ही फंसे रहते हैं और पिछले दो दशकों से लगातार चल रहे रिकॉर्ड अवसर का लाभ नहीं उठा पाते। और आगे आने वाले अच्छे समय में भी ज़्यादातर लोग चिंता ही करते रहेंगे, डरते ही रहेंगे, जिंदगी भर खुद को अयोग्य मानते हुये घिसटते ही रहेंगे, और वह काम नहीं कर पायेंगे जो वे करना चाहते हैं। इसका परिणाम यह होगा कि उन्हें उनके काम के बदले में कम तनख्वाह ही उनकी खुशी छोटी खुशी ही होगी।
जो लोग अवसर का भरपूर लाभ उठाते हैं (और यहाँ मैं यह कर चाहता हूँ कि आप भी उन लोगों में से एक हो सकते हैं, क्योंकि अगर ऐसा नहीं होता तो आप इस पुस्तक को पढ़ने के बजाय किस्मत के भरोसे ही बले होते), वे ऐसे समझदार लोग होंगे जो यह सीख लेंगे कि बड़े सोच के सहारे खद को सफलता के रास्ते पर किस तरह ले जाया जा सकता है।
अंदर चले जाइये। सफलता का दरवाज़ा आज पहले की तुलना में ज़्यादा खुला हुआ है। यह ठान लीजिये कि आप भी सफल लोगों के समूह में शामिल होना चाहते हैं, आप भी अपनी मनचाही चीज हासिल करना चाहते
हैं।
सफलता की तरफ यह आपका पहला कदम होगा। यह एक मूलभूत कदम है। इस कदम को उठाये बिना काम नहीं चलेगा। कदम एक - खुद में विश्वास करें, विश्वास करें कि आप सफल हो सकते हैं।
विश्वास की शक्ति को किस तरह विकसित करें
विश्वास की शक्ति को हासिल करने और विश्वास को दृढ़ करने के लिये तीन उपाय किये जा सकते हैं:
सफलता की बात सोचें, असफलता की बात न सोचें। नौकरी में, घर में, असफलता की जगह सफलता के बारे में सोचें। जब आपके सामने कोई कठिन परिस्थिति आये, तो सोचें 'मैं जीत जाऊँगा,' यह न सोचें 'शायद मैं हार जाऊँगा।' जब आप किसी से प्रतियोगिता करें, तो सोचें, 'मैं सर्वश्रेष्ठ हूँ', यह न सोचें 'मैं उसके जितना योग्य नहीं हूँ।' जब अवसर नज़र आये, तो सोचें 'मैं यह कर सकता हूँ,' यह न सोचें 'मैं इसे नहीं कर सकता।' अपनी चिंतन प्रक्रिया पर इस विचार को हावी हो जाने दें, 'में सफल होकर दिखाऊँगा।' सफलता के बारे में सोचने से आपका दिमाग ऐसी योजना बना लेता है जिससे आपको सफलता मिलती है। असफलता के बारे में सोचने से इसका ठीक उल्टा होता है। असफलता के बारे में चिंतन करने से आपका दिमाग ऐसे विचार सोचता है जिनसे आपको असफलता हाथ लगती है। अपने आपको बार-बार याद दिलाइये कि आप जितना समझते हैं, आप उससे कहीं बेहतर हैं। सफल लोग सुपरमैन नहीं होते। सफलता के लिये सुपर-इन्टेलेक्ट का होना जरूरी नहीं है। न ही सफलता के लिये किसी जादुई शक्ति या रहस्यमयी तत्व की ज़रूरत होती है। और सफलता का किस्मत से भी कोई संबंध नहीं होता। सफल लोग साधारण लोग ही होते हैं, पर ऐसे लोग होते हैं जिन्हें अपने आप पर विश्वास है, अपनी क्षमताओं में विश्वास है और जो मानते हैं कि वे सफल हो सकते हैं। कभी भी, हाँ, कभी भी, खुद को सस्ते में न बेचें। बड़े सोच में विश्वास करें। आपकी सफलता का आकार कितना बड़ा होगा, यह आपके विश्वास के आकार से तय होगा। अगर आपके लक्ष्य छोटे होंगे, तो आपकी उपलब्धियां भी छोटी होंगी। अगर आपके लक्ष्य बड़े होंगे तो आपकी सफलता भी बड़ी होगी। एक बात कभी न भूलें। बड़े विचार और बड़ी योजनायें अक्सर छोटे विचारों और छोटी योजनाओं से आसान होते हैं।
जनरल इलेक्ट्रिक कंपनी के चेयरमैन मिस्टर राल्फ जे. कॉर्डिनर ने लीडरशिप कॉन्फ्रेंस में कहा था, '...जो भी लीडर बनना चाहता है उसे खुद के विकास की योजना बना लेनी चाहिये और इसका दृढ़ निश्चय कर लेना चाहिये। कोई भी किसी दूसरे आदमी के विकास का आदेश नहीं दे सकता... कोई आदमी दौड़ में आगे रहेगा या पीछे रह जायेगा यह इस बात पर निर्भर करता है कि उसकी तैयारी कैसी है। यह ऐसी चीज़ है जिसमें समय लगता है, मेहनत लगती है और इसमें त्याग की जरूरत होती है। आपके लिये यह कोई दूसरा नहीं कर सकता।'
मिस्टर कॉर्डिनर की सलाह में दम है और यह व्यावहारिक है। इस पर चलें। जो लोग बिजनेस मैनेजमेंट, सेल्स लाइन, इंजीनियरिंग, धार्मिक संस्थाओं. लेखन, अभिनय और दूसरे क्षेत्रों में चोटी पर पहुँचते हैं वे आत्म-विकास की योजना पर चलकर ही वहाँ पहुँच पाये हैं। 

किसी भी प्रशिक्षण कार्यक्रम में— और वही इस पुस्तक का लक्ष्य भी है— तीन बातें होनी चाहियें। इसमें सामग्री होना चाहिये— यानी क्या किया जाये। दूसरी बात यह कि इसमें तरीका होना चाहिये— यानी कैसे किया जाये। और तीसरी बात यह कि इसे एसिड टेस्ट में खरा उतरना चाहिये— यानी कि इससे परिणाम मिलना चाहिये। 

क्या किया जाये, इस बारे में सफलता का आपका व्यक्तिगत प्रशिक्षण कार्यक्रम सफल लोगों के रवैये और तकनीकों के अध्ययन से संबधित है। वे किस तरह खुद को सफल बनाते हैं? वे किस तरह बाधाओं का सामना करते है और उन्हें पार करते हैं? वे किस तरह दूसरों का सम्मान हासिल करते है? कौर सी चीन है जो उन्हें साधारण लोगों से अलग करती है? सफल लोग किस तरह सोचते हैं? 

आत्म—विकास कैसे किया जाये, वाला हिस्सा आपकी कार्ययोजना बनायेगा। यह हर अध्याय में मिलेगा। इसससे काम को दिशाा मिलती है। इस पर अमल करें औश्र इसके परिणामों को खुद महसूस करें। 

औश्र इस पुस्तक में इस प्रशिक्षण के सबसे महत्वपर्ण भाग यानी कि परिणाामों पर भी ध्यान दिया गया है। यहाँ पर जो कार्यक्रम दिया जा रहा है अगर आप उसे अमल में लाते हैं तो आपको सॅलता मिलेगी और इतने बड़े पैमान पर सफलता मिलेगी जिसकी आने सपवने में भी कल्पना नही की होगी। सफलत के आपके व्यक्तिगत प्रशिक्षण कार्यक्रम में आपको कई लाभ होंगे— आपका परिवार आपका ज्यादा सम्मान करने लगेगा, आप अधिक उपयोगी होंगे आपके पास स्टेटस होगा, लोकप्रियता होगी, ज्यादा तनख्वाह होगी और आप बेहतर जीवनशेली का आननंद ले पायेगे। 

पने को सिखाने का जिम्मा आप ही का है। कोई दूसरा आदमी आपके सिर पर खड़ा रहकर आपको यह नहीं बतायेगा कि आपको क्या करना है औश्र कैसे करना है। यह पुस्तक आपको रास्ता दिखायेगी , परंतु आप और केवल आप ही खुद को समझ सकते है। केवल आप ही खुद को यह आदेश दे सकते है कि आप इस पुस्तक में दिये गये सिद्धांतों पर चलेंगे। केवल आप ही अपनी प्रगति का मूल्यांकन कर सकते हैं। जब आप अपने रास्ते से थोड़ा सा भटक जायें, तो केवल आप ही अपनी गलती सुधरकर सही रास्ते पर आ सकते हैं। सौ बात की एक बात, आपको ही खुद को इस काबिल बनाना है कि आप बड़ी से बड़ी सफलता हासिल कर सके। 

आपके पास पहले से ही एक ऐसी प्रयोगशाला है जिसमें आप काम करते हैं और अध्ययन करते हैं। अपकी प्रयोगशाला आपके आसपास ही है। आपकी प्रयोगशाला में इन्सान रहते है। इस प्रयोगशाला में मानवीय कार्यों के हर तरह के उदाहरण है। अगर आप अपनी इस प्रयोगशाला में खुद को वैज्ञानिक समझ लें तो आप बहुत कुछ सीख सकते है। और इसमें भी बड़ी बात यह कि यहाँ आपको कुछ खरिदना नही पड़ता । इसका कोई किराया नहीं देना पड़ता। यहाँ किसी तरह की फीस नहीं लगती। आप इस प्रयोगशाला का उपयोग मुफ्त में कर सकते है। 

अपनी प्रयोगशाला के डायेरक्टर के रूप में, आपको वही करना होगा जो हर वैज्ञानिक करता है— आपको अवलोकन और प्रयोग करना होगा। 

क्या आपको इस बात से हैरानी नहीं होती कि हमारे चारों तरफ जिंदगी भर इतने सारे लोग रहते हैं, फिर भी ज्यादातर लोग यह नहीं जान पाते कि इन्सान के व्यवहार के पीछे क्या कारण होते है? ज्यादातर लोग यह जानते ही नहीं कि अवलोकन कैसे किया जाता है। इस पुस्तक का एक महत्वपर्ण लक्ष्य आपको यह सिखाना भी है कि आप अवलोकन कैसे करें, इन्सान के मामों के पीछे छुपे कारणों को किस तरह समझें। आप खुद से यह सवाल पूछ सकते है,'ऐसा क्यों है कि जॉन इतना सफल है, जबकि टॉम सिर्फ दिन गुजार रहा है?' कुछ लोगो के इतने सारे देस्त क्यों होते है, जबकि कई लोगों के बहुत कम दोस्त क्यों होते है?' 'लोग एक आदमी की कही बातों पर विश्वास क्यों कर लेते है, जबकि वे किसी दूसरे आदमी की कही हुई उसी बात पर विश्वास क्यों नही करते ?''

एक बार आप प्रशिक्षित हो जायें, तो आपको सिर्फ अवलोकन करने की आसान प्रक्रिया से ही बहुमुल्य सबक सीखने को मिलेगे। 
यहाँ दो विशेष सुझाव दिये गये हैं, जिनके माध्यम से आप अवलोकन की कला सीख सकते हैं। आप अपने आसपास के दो सबसे सफल और सबसे असफल लोगों को अध्ययन के लिये चुनें। फिर, जैसे-जैसे आप यह पुस्तक पढ़ते जायें, यह देखें कि आपका सफल मित्र किस तरह सफलता के इन सिद्धांतों पर चलता है। यह भी देखें कि इस तरह के दोनों लोगों के अध्ययन से आप खुद इस पुस्तक में दिये गये सिद्धांतों की सच्चाई को परख सकेंगे।
दूसरे आदमी के साथ किसी भी तरह के संपर्क में आपको सफलता के सिद्धांत आज़माने का मौका मिलता है। आपका लक्ष्य यह होना चाहिये कि आप सफलता की कार्ययोजना बनाने की आदत डाल लें। हम जितना ज़्यादा अभ्यास करेंगे, हम उतनी ही जल्दी सफल होंगे।
हममें से ज़्यादातर लोगों के ऐसे दोस्त होते हैं जिन्हें गार्डनिंग का शौक होता है। और हम सबने इस तरह की बातें सुनी हैं, पौधों को बढ़ते हुये देखना कितना रोमांचक होता है। किस तरह खाद-पानी से वे तेजी से बढ़ते हैं। पिछले सप्ताह वे जितने बड़े थे, आज वे उससे कितने ज़्यादा बड़े हो गये हैं।'
निश्चित रूप से, जब आदमी सावधानी से प्रकृति के साथ समन्वय कर लेता है तो इसके परिणाम रोमांचक होते हैं। परंतु अगर आप सावधानी से विचार-मैनेजमेंट कार्यक्रम पर चलेंगे, तो इसके परिणाम उससे दस गुना अधिक रोमांचक होंगे। यह देखना सुखद होगा कि आप हर महीने, हर दिन ज़्यादा आत्मविश्वासी, ज़्यादा प्रभावशाली, ज़्यादा सफल बनते जायें। जीवन में कोई दूसरी चीज़ आपको इतनी संतुष्टि नहीं दे सकती जितना यह जानना कि आप सफलता और उपलब्धि की सही राह पर चल रहे हैं। और इस राह पर चलने के लिये सबसे बड़ी चुनौती यही है कि आप अपनी क्षमताओं का अधिकतम लाभ उठायें।