Something says tree story in hindi

जनवरी का महीना था। कड़ाके की सर्दी पड़ रही थी। आज थोड़ा मौसम खुला। राजा कृष्णदेव राय ने बाहर घूमने का कार्यक्रम बनाया। ऊंटो और हा​थियों पार सामान लादा गया। दोपहर दो बजे तक राजा व दरबारियों के साथ विजय नगर के जंगल में पहुंच छावनी डाल दी। गीत—संगीत के कार्यक्रम के हुए। भोजन के बाद विश्राम करने लगे। फिर मंत्री और दरबारियों के साथ राजा घूमने निकले। सामने बरगर का विशाल पेड़ था। वह उसके नीचे जा खड़े हुये। बोले 'बरगद का पेड़ कुछ कह रहा है। मंत्री बोला, 'महाराज, यह पेड़ कह रहा है कि आज महाराजा यहां आकर खड़े है, यह मेरे लिये गर्व की बात है।' सेनापति बोला, 'महाराज, पेड़ सोच रहा है, लोग राजा का इतिहास लिखेगे, तो मेरी भी चर्चा करेंगे।'


तेनालराम चुप था। मंत्री बोला, 'महाराज लगता है, आपकी प्रशंसा तेनालीराम को रास नहीं आई।' राजा ने तेनालराम की ओर देखा, बोले, 'बताओ, यह पेड़ क्या कह रहा है?'


तेनालीराम बोला, 'महाराज, पेड़ कह रहा है। कि मैं कभी छोटा बीज था। बढ़ते—बढ़ते इतना बड़ा हुआ कि आज राजा कृष्णदेव दर​बारियों के साथ मेरे नीचे आ खड़े हुये। मैं धरती से आकाश की ओर चढ़ा, जड़े धरती में गहरे उतरती गई। इसी कारण राजा को भी प्रजा का हित नहीं भूलना चाहिये।'

सुनकर राजा को चेहरा गम्भीर हो गया बोले, 'तुम्हारी बात का मर्म मैं समझ गया पर...।'


'चलिये महाराज, अपनी आंखो से देख लीजिये।' राजा तेनालीराम के साथ गए। देखा छावनी के बाहर दीन—हीन लोगो की भीड़ है। ठंड से बचाव के लिये उनके पास कपड़े तक नहीं है। एक बूढ़ा बोला, 'दुहाई है महाराज, पाला पड़ने से फसल खराब हो गई। हम सहायता पाने की आशा में आये है, पर मंत्री जी ने बाहर ही रूकवा दिए।'

राजा ने मंत्री की ओर देखा, वह थर—थर कांप रहा था। तेनालीराम को जिम्मा सौंपा कि सर्दी से बचाव के लिये गांवों में अनाज और कम्बल बांटे जाए। मंत्री की फटकार पड़ी।