Mystery of barren land story in hindi


धर्मपाल की पत्नी को देहांत हो जाने के बाद उसने अपने तीन पुत्रों का खूब ध्यन से पालन—पोषण किया। उससे छोटा बेटा धीरज हमेशा अपने पिता की बात मान कर चलता और कड़ी मेहनत करता। वह अपने पिता की सेवा भी करता। मगर उसके दोनों बड़े भाई बेहद आलसी और स्वार्थी थे। 

कुछ साल बाद धर्मपाल बीमार होकर बिस्तर पर लेट गया। धीरज ने पिता की खूब सेवा की । धर्मपाल ने मृत्यु से पहले अपने तीनों पुत्रों को बुलाया। 

'मेरा अंतिम समय आ गया है। मैंने—जमीन के तीन हिस्से कर दिये है। दक्षिण की दो उपजाऊ जमीनें मैंने दोनों बड़े बेटों के नाम कर दी है। उत्तर की बंजर जमीन मैंने धीरज को दी है।' पिता ने उनसे कहा। खुद को उपजाऊ जमीन मिलने पर दोनों बड़े भाई खुश हो कर चले गए। धीरज को उदास और चिंतित देख कर धर्मपाल ने उसे पास बुलाया। 

'बेटा धीरज, तुम मेहनती हो और मुझे विश्वास है कि तुम उस बंजर जमीन को हरा—भरा कर दोगे। लेकिन मेरी अंतिम इच्छा है कि तुम उस जमीन को अपने हाथों से जोतोगे और उस जमीन के पश्चिमी हिस्से को सबसे बाद में जोतोगे।' कह कर पिता ने अपनी आंखें बंद कर लीं।

धीरज को बहुत दुख हुआ। उसने पिता की इतनी सेवा की और बदले में पिता ने उसे बंजर जमीन और दो बैल मात्र दिये। पर उसने पिता की अंतिम इच्छा का पालन किया और स्वंय उस जमीन को जोतने लगा। पिता के कहे अनुसार पष्चिमी हिस्से को अंत में जोतना शुरू किया। ज्योंही उसने हल चलाया कि उसके हल के फल से टन्न... जैसी आवाज आई। धीरज ने देखा तो वह दंग रह गया। उकसा हल क पीतल के घड़े से टकराया था। 

धीरज ने उसे बाहर निकाला तो उसका आश्चर्य और बढ़ गया, क्योंकि घड़े में सोने की मुहरें भरी थीं। साथ में एक पत्र भी था। पत्र में लिखा था, 'बेटा धीरज, तुम्हारी मेहनत और सेवा का यह फल है। इस धन से तुम जमीन को उपजाऊ बनाकर खेती करना। मेरा आशीर्वाद तुम्हारे सा​थ हे। अब उसे पिता की दी बंजर जमीन का उद्देश्य पता चल गया था। उसने स्वर्ण—मुहरों की मदद से अच्छे बीज, खाद—पानी का प्रबंध किया और खेतों में अच्छा अन्न उपजाया। अब वह दोनेां भाईयों से सुखी और सम्पन्न था। उसके दोनों भाई उपजाऊ जमीन मिलने के बसवजूद अपने आलसींपन की वजह से समय पर खेती नहीं कर सके और उनकी फसल चौपट हो गई।