Clever jackal hindi story


एक ​बहुत ही विशाल और घना जंगल था। जंगल में लगभग सभी तरह के जनवर रहते थे। जंगल का राजा शेर था। जानवरों में आपस में खूब मेल—जोल था। एक दूसरे के सूख—दुख में भी भाग लेते थे। मजे से जिन्दगी कट रही थी। हिरण कुलांचे भरते, भालू आरम से टहलते। बंदर एक डाल से दूसरी डाल पर कूदते रहते। चिड़िया गाने सुनाती। जंगल का राजा शेर किसी भी जानवर को किसी प्रकार का कष्ट नहीं देता ​था। 

अखिर एक दिन जंगल का राजा बूढ़ा शेर मर गया। उसका जवान बेटा राजा बना। वह बहुत घमंडी था। विशाल जंगल का साम्राज्य उसे मिल था। वह किसी भी जानवर की जरा—सी गलती पर कड़ी से कड़ी सजा देता था। उसके इस आचरण से जंगल के सभी जानवर उससे डरने लगे थे। शेर को देखते ही जंगली जानवर थर—थर कांपने लगते। यहां तक की शेर के डर से जानवर अपने घरों में ही छिपे रहते। सबकी पुरानी आजादी छिन गई थी। जो मजे से जिन्दगी जी रहे थे, अब वह कष्टों में बदल गई थी। 

ठंड का मौसम था। पानी बरसने की वजह से ठंड बढ़ गई थी। कई दिन बाद आज धूप निकली थी। रीछ अपनी मांद के सामन बैठे धूप सेंक रहा था । तभी उधर से सियार धूमते—टहलते गुजरा उसने रीछ से कहा, 'यार बैठै—बैठे जी नही ऊबता क्या? चलो टहल आते है।'

श्रीछ ने कहा, 'कहां जाएं दोस्त, अभी कहीं रास्तें में शेर मिल गया तो बेकार ही कोई मुसीबत खड़ी हो जाएगी वह तो जरा सी भी गलती पर सता दे देता है। परेशन करेगा इस ठंड में। इसलिए माफ कीजिए, मुझे नहीं जाना घूमने।'

लेकिन सियार नहीं माना, तो रीछ उसके साथ चल पड़ा। दोनों थोड़ी दूर ही गए होंगे कि सामने से शेर जाता हुआ दिखाई पड़ा। शेर को देदखते ही रीछ के तो होश उड़ गए। वह डर के मारे कांपने लगा। उसने सियार से कहा, 'अब क्या किया जाए? तुमने मेरा कहना नही माना न, अब तो बुरे फंसे। मौत निश्चित समझो। यह इस ठंड में बहुत परेशान करेगा।' 

सियार चालाक था। वह जल्दी हिम्मत हारने वाला नहीं था। उसने रीछ को समझाते हुए कहा, 'घबराओ नहीं, बुद्धि से काम लों डरने से काम नहीं चलेंगां'

फिर सियार ने बुद्धि से काम लेते हुए शेर से कहा, 'महाराज को हम दोनों का प्रणाम स्वीकार हो। महाराज हम दोनों आपके पास ही जा रहे थे। इधर बहुत दिनां से महाराज के दर्शन नहीं हुए थे। हम आपके पास आ रहे थे कि रासतें में एक घटना घट गई। इसलिए हम भगतें हुए आपके पास आ रहे है।' 

शेर ने उनके पगणाम का जवाब देने के बाद कहा, 'आप दोनों मेरे पास क्यों आ रहे हैं? कौनसी घटना घट गई रास्तें में?' सियार ने आश्चर्य से आंखें फैलाते हुए कहा, 'महाराज, इस जंगल के सभी हा​थी पागल हो गए है। सब नही में पड़े है और कह रहे है कि शेर को मारकर जंगल में राज्य पर कब्जा कर लेना है। महाराज, आप होशिर रहिये। आप जैसा राजा हमें मिलना मुश्किल है। आप ही इन पागल हाथियो से हम जीवों की रक्षा कर सकते है।' 

सियार की बात सुनकर शेर घबरा गया। शेर को घबराया देखकर सियार बोल, 'यदि आपको मेंरी बात पर विश्वास नहीं हो रहा हो, तो आप मेरे साथ चलकर खुद देख ले।' 

घबराया हुआ शेर बोला, 'अरे नहीं सियार भाई, तुम झूठ थोड़े ही बोल रहे हो। तुम्हारी बात पर मुझे पूरा यकिन है।' सियार मन ही मन प्रसन्न होते हुए बोला, 'महाराज, आप तुरंत जाकर गुफा में छिपकर बैठ जांए। यदि हाथी आपको बाहर आने के लिए कहे तो आप बाहर मत आइएगा।' सियार की सहाल सुनकर शेर ने कहा, 'तुम बिलकुल ठीक कहते हो। पगल हाथियों से बचने का दूसरा कोई उपाय नहीं है।'

इतना कहकर शेर अपनी जान बचाने के लिए दुम दबाकर गुफा की ओर भागा। 

सियार हा​थियो के पास आ गया। उसने कहा, 'शेर ने आप सभी को बुलाया है। वह मांद में है। आप बाहर से ही चिंघाड़ कर, नमस्कार कर आइए।' 

हाथियों ने ऐसा ही किया। शेर ने जंगर में डर कर रहने में ही अपनी भलाई समझी।