(1) बांग्लादेश धर्मनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक तथा धर्मनिरपेक्ष देश घोषित : सन् 1971 ई. के भारत-पाक युद्ध के परिणामस्वरूप बांग्लादेश का उदय हुआ। निर्माण के कुछ समय पश्चात् ही बांग्लादेश ने अपना संविधान बनाकर उसमें अपने को एक धर्मनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक तथा समाजवादी देश घोषित किया।

(2) शेख मुजीबुर्रहमान द्वारा बांग्लादेश में अध्यक्षात्मक शासन प्रणाली लागू करना : सन् 1975 ई. में शेख मुजीबुर्रहमान ने संविधान में संशोधन कराया और संसदीय प्रणाली की जगह अध्यक्षात्मक प्रणाली को मान्यता मिली। शेख मुजीब ने अपनी पार्टी अवामी लीग को छोड़कर अन्य सभी पार्टियों को समाप्त कर दिया। इससे तनाव और संघर्ष की स्थिति पैदा हुई। सन् 1975 ई. के अगस्त में सेना ने उनके खिलाफ बगावत कर दी और इस नाटकीय तथा त्रासद घटनाक्रम में शेख मुजीब सेना के हाथों मारे गये।

(3) बांग्लादेश में सैनिक शासन : शेख मुजीब की मृत्यु के बाद नये सैनिक-शासक जियाउर्रहमान ने अपनी बांग्लादेश नेशनल पार्टी बनायी और सन् 1979 ई. के चुनाव में विजयी रहे। जियाउर्रहमान की हत्या हुई और लेफ्टिनेंट जेनरल एच. एम. इरशाद के नेतृत्व में बांग्लादेश में एक और सैनिक शासक ने बागडोर सँभाली। लेकिन, बांग्लादेश की जनता जल्दी ही लोकतंत्र के समर्थन में उठ खड़ी हुई।

(4) बांग्लादेश में लोकतंत्र बहाली आन्दोलन : जेनरल इरशाद के शासन काल में बांग्लादेश में लोकतंत्र बहाली के आन्दोलन ने जोर पकड़ा। इस आन्दोलन में छात्र भारी संख्या में सम्मिलित हुए। बाध्य होकर जेनरल इरशाद ने एक हद तक राजनीतिक गतिविधियों की छूट दे दी। इसके बाद के समय में जेनरल इरशाद पाँच सालों के लिए राष्ट्रपति निर्वाचित हुए। जनता के व्यापक विरोध के आगे झुकते हुए लेफ्टिनेंट जेनरल इरशाद को राष्ट्रपति का पद सन् 1990 ई. में छोड़ना पड़ा। सन् 1991 ई. में वहाँ चुनाव हुए। इसके बाद से वहाँ बहुदलीय चुनावों पर आधारित प्रतिनिधिमूलक लोकतंत्र कायम है।