शुरू से ही पाकिस्तान की राजनीति में सेना का वर्चस्व रहा है। सन् 1947 ई. में पाकिस्तान का निर्माण हुआ। पाकिस्तान में प्रथम संविधान के बनने के बाद देश के शासन की बागडोर जनरल अयब खान ने अपने हाथों में ले ली। उन्होंने जल्द ही अपना निर्वाचन भी करा लिया। उन्होंने पाकिस्तान में सैनिक तानाशाही लागू की। इससे उनके शासन के खिलाफ जनता का गुस्सा भड़का और ऐसे में उन्हें अपना पद छोड़ना पड़ा। उनके बाद एक बार फिर सैनिक शासन का रास्ता साफ हुआ और जनरल याहिया खान ने शासन की बागडोर सँभाली। - इसके बाद पाकिस्तान में जुल्फिकार अली भुट्टो के नेतृत्व में एक निर्वाचित सरकार बनी जो 1971 ई. से 1977 ई. तक कायम रही। सन् 1977 ई. में जनरल जियाउल हक ने इस सरकार को गिरा दिया।

सन् 1982 ई. के बाद जनरल जियाउल हक को लोकतंत्र समर्थक आन्दोलन का सामना करना पड़ा सन् 1988 ई. में एक बार फिर बेनजीर भुट्टो के नेतृत्व में लोकतांत्रिक सरकार बनी। निर्वाचित लोकतंत्र की यह अवस्था सन् 1999 ई, तक बनी रही।

सन् 1999 ई. में एक बार फिर सेना ने दखल दिया और जनरल परवेज मुशर्रफ ने प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को हटा दिया। सन् 2001 ई. में परवेज मुशर्रफ ने अपना निर्वाचन राष्ट्रपति के रूप में करके अपनी स्थिति ठीक की।