सोवियत संघ के अचानक विघटन से दो महाशक्तियों में से अब एक का वजूद न था, जबकि दूसरा अपनी पूरी ताकत के साथ कायम था, और वह था अमेरिका। वस्तुतः अमेरिका के वर्चस्व की शुरुआत सन् 1991 ई. में तब हुई जब एक ताकत के रूप में सोवियत संघ अंतर्राष्ट्रीय परिदृश्य से गायब हो गया।

नयी विश्व व्यवस्था : सोवियत संघ के विघटन के पश्चात् अमेरिका आज एकमात्र महाशक्ति है। यह शक्ति सैन्य प्रभुत्व, आर्थिक शक्ति, राजनीतिक प्रभाव और सांस्कृतिक बढ़त के रूप में है। अंतर्राष्ट्रीय क्षेत्र में शक्ति का एकमात्र केन्द्र अमेरिका ही है। इसीलिए उसका वर्चस्व है। अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने एकल ध्रुवीय विश्व में अमेरिकी वर्चस्व को 'नयी विश्व व्यवस्था' की संज्ञा दी।

इराक द्वारा कुवैत पर हमला - अमेरिकी वर्चस्व की शुरुआत : सोवियत के पतन के बाद अमेरिका विश्व में अपने वर्चस्व को स्थापित करने का मौका देख रहा था। 1990 ई. के अगस्त में इराक ने कुवैत पर हमला कर दिया। उसने बड़ी तेजी से कुवैत पर कब्जा कर लिया। इराक को समझाने-बझाने की तमाम राजनयिक कोशिशें जब असफल रहीं तो संयुक्त राष्ट्र संघ ने कुवैत को मुक्त कराने के लिए अमेरिकी नेतृत्व में बल-प्रयोग की अनुमति दे दी। इस प्रकार सोवियत संघ के पतन के बाद अमेरिकी वर्चस्व ने खाड़ी युद्ध को बढ़ावा दिया। इराक को पराजित कर अमेरिका एकल ध्रुवीय विश्व में अपना पूर्ण वर्चस्व स्थापित करने में सफल हुआ। अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने इसे 'नई विश्व व्यवस्था' की शुरूआत कहा।