राजकिय बुनियादि विद्यालय, राजपुरा

                                                                                                                    वाया— धनबाद

                                                                                                                     झारखण्ड, भारत

                                                                                                                        दिनांक....


प्रिय केविन,


आपका पत्र मिला। आपने अपने पत्र में युद्ध—संबंधी अमेरिकी नीति पर थोड़ा प्रकाश डाला है। अमेंरिकी साहित्य पढ़कर मुझे ऐसा लगता है कि वहॉं की युवा ​पीढ़ी आक्रमण और युद्ध के पक्ष में कदापि नहीं है। वह नहीं चाहती कि कोई शक्तिशाली देश दुर्बल देश पर अग्निवृष्टि करे।


आपने यह भी पूछा है कि अणुशस्त्र—निर्माण के बारे में भारत की युवा पीढ़ी की राय क्या है। केविन भाई! आप तो जानते है कि जिन देशों के पास अणुशस़् है, उन्हीं का आज संसार में बोलबाला है। रूस अमेंरिका से डरता है, अमेंरिका रूस से। जो शक्तिशाली है, उसी के उपदेश का महत्व भी होता है। आज जो चीन भारत पर इतना गरजता है, गुर्राता है, इसका कारण उसकी अणुशथ्कत ही है। अत: अपनी अस्तित्व—रक्षा के लिए अणुशस्त्र का निर्माण अनिवार्य—सा हो गया है और यही कारण है कि भारत की युवा पीढ़ी अणुशस्त्र के निर्माण के पक्ष में है। भारत की नयी पीढ़ी नहीं चाहती कि भारत बेसहारा बनकर संसार की ओर टुकुर—टुकुर ताकता रहे और जब कोई आक्रमण करे, तो ​दुनिया के सामने 'बचाओ—बचाओर' की गुहार मचाये। 


आप अगले पत्र में अपने राष्ट्रपति की नई नीतियों के बारे में लिखने का काष्ट करें। मै उस दिन की प्रतीक्षा तिकलता से कर रहा हूॅं, जब आप भारत पधारेगे। 


                                                                                                                                                आपका 

                                                                                                                                               रूपेश कुमार


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