विश्व के कोने-कोने में क्या हुआ, क्या हो रहा है, क्या होने जा रहा है-इन सब की जानकारी समाचार पत्र से ही मिलती है। कम पढ़े-लिखे लोगों से लेकर सुशिक्षित लोगों की बहुत बड़ी संख्या को तब तक चैन नहीं मिलता जब तक वे कोई अखबार नहीं पढ़ लेते । अपनी दुनिया के बदलते चेहरे को पहचानने के लिए अखबार का पढ़ना जरूरी है। प्रातःकालीन वायु की तरह समाचार पत्र मानसिक ताजगी देता है।

समाचारपत्रों को लोकतंत्र का सजग प्रहरी एवं सबसे दृढ़ 'चौथा स्तम्भ' कहा गया है । समाचारपत्र अप्रत्यक्ष रूप से सरकार, जनता और जनमत तीनों का नियंत्रण और निर्देशन करता है।

समाचार पत्र प्रचार का एवं जनमत को प्रभावित करने का शक्तिशाली साधन है । आधुनिक समाचार पत्र देश-विदेश की घटनाओं की जानकारी ही नहीं देते अपितु हमारी विचारधारा को दिशा-विशेष में मोड़ने की क्षमता भी रखते हैं।

विज्ञापन के सशक्त माध्यम के रूप में समाचार व्यापार के प्रचार-प्रसार में अत्यंत उपयोगी होता है। समाचार पत्रों से हमें रोजगार की प्राप्ति होती है। इसमें रोजगार के विज्ञापन छपते हैं। स्वयं समाचार पत्र भी लोगों को रोजगार देता है।

समाचारपत्र सरकार और जनता दोनों को जागरूक बनाता है। समाचारपत्रों के महत्त्व का संकेत करते हुए पार्टन ने कहा था- 'समाचार पत्र जनता का विश्वविद्यालय है।' समाचार पत्र में सामाजिक और सांस्कृतिक समस्याओं पर भी लेख प्रकाशित हाते रहते हैं। राजनीति और सामाजिक घटनाओं पर विचारोत्तेजक सामग्री अखबारों द्वारा ही मिलती है।

जनतंत्र के प्रहरी समाचार पत्रों को पूरी स्वतंत्रता मिलनी चाहिए । तभी वे जनतंत्र की रक्षा करने में समर्थ हो सकेंगे। इसलिए संपादक की बहुत बड़ी जिम्मेदारी है कि वह अपने अखबर को प्रचार का साधन या पीत पत्रकारिता का केन्द्र न बनने दे । इस तरह वे राष्ट्र और मानवता की अमूल्य सेवा कर सकते हैं।