स्वास्थ्य का कोई मूल्य नहीं। यह अनमोल है। यही जीवन है। यह जीवन की मूल्यवान सम्पत्ति है। इसका विनाश जीवन का विनाश है। जीवन में प्रायः सभी वस्तुएँ धन से खरीदी जा सकती हैं, पर स्वास्थ्य को धन से नहीं खरीदा जा सकता। स्वास्थ्य के माध्यम से जीवन में सब कुछ प्राप्त किया जा सकता है। एक उक्ति प्रसिद्ध है-सेहत हजार नेयामत । अच्छा स्वास्थ्य स्वर्गीय वरदान है । 'प्रथम सुख निरोगी काया'-यह कथन अक्षरशः सत्य है।

सभी प्रकार के कर्मों का साधन शरीर ही है। यदि शरीर ही स्वस्थ नहीं है तो अपने कर्मों का भली-भाँति निर्वाह किस प्रकार कर पायेंगे हम? स्वस्थ | मनुष्य सदैव प्रफुल्लित चित्त रहता है। उसकी आंतरिक प्रसन्नता चेहरे से ही | प्रकट होती है। अस्वस्थ व्यक्ति का चित्त हमेशा खिन्न, उद्विग्न, अशांत और | उदास बना रहता है। उसकी बुद्धि, कुशाग्रता, मति और मेधा क्षीण हो जाती हैं। भारतवर्ष में सबल और स्वस्थ शरीर को कितना अधिक महत्त्व दिया गया था, इसका पता इस बात से चलता है कि निरोग रहने के लिए एक अलग वेद-'आयुर्वेद' की रचना यहाँ हुई।

अच्छा स्वास्थ्य जीवन के लिए वरदान है। यह जीवन का सर्वोत्तम धन है। अतएव इसे बनाये रखने के लिए हर संभव प्रयत्न करना चाहिए। रुग्ण शरीर घुन खाई लकड़ी के समान होता है। उसमें भार सहन करने की शक्ति नहीं होती। परिणाम होता है निराशा, उत्साहहीनता, कार्य में अरुचि और आलस्य । इसलिए जीवन में आनन्द की प्राप्ति के लिए आशा और विश्वास के विकास के लिए तथा व्यक्ति और समाज के कल्याण के लिए स्वास्थ्य-रक्षा अत्यन्त महत्त्वपूर्ण है।

स्वस्थ शरीर और स्वस्थ मन में अन्योन्याश्रय सम्बन्ध है। ये दोनों मानव व्यक्तित्व के अभिन्न अंग हैं। शरीर के अस्वस्थ होने पर मन विकारग्रस्त हो जाता है। आत्मा खिन्न रहती है तथा व्यक्तित्व का सहज विकास अवरुद्ध हो जाता है स्वस्थ व्यक्ति ही जीवन का आनन्द ले सकता है। जिसका स्वास्थ्य ठीक नहीं, वह धनी होकर भी निर्धन है, विद्वान होते हुए भी मूर्ख है। स्वास्थ्य के बिना सभा ऐश्वर्य विष के समान है । स्वास्थ्यहीन व्यक्ति न अपने लिए जीवन में कुछ क' पाता है और न ही दूसरों के लिए कुछ कर सकता है।

अपने जीवन को तनावमुक्त शांत और सुखी बनाये रखने एवं काया के रोगमक्त रखने के लिए खुली हवा में सुबह-शाम टहलना अत्यावश्यक नियमित रूप से व्यायाम और योगासन करना अत्यन्त लाभप्रद है। बालका पढने के साथ खेलने-कूदने, व्यायाम करने के लिए प्रोत्साहित करना चाहि खली वायु का सेवन करने एवं प्रसन्न रहने के लिए भी उन्हें प्रेरित करना चाहिए इन्हीं उपायों से हमारा शरीर भी स्वस्थ रहेगा और मन भी।