भूमिका : वन की हमारे जीवन के अस्तित्व में एक महती भूमिका है। वन वातावरण को स्वच्छ एवं स्वास्थ्यवर्द्धक बनाते हैं। वनों में सघन वृक्षों द्वारा शुद्ध वायु का निर्माण होता है जो हमारे जीवन-रक्षा के लिए नितान्त आवश्यक है। वन धरती के समस्त प्राणियों के अस्तित्व-रक्षा के सच्चे सहयोगी हैं । अनेक प्रकार से मानव-जीवन की रक्षा में वन अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका अदा करते हैं। वस्तुतः मनुष्य का अस्तित्व वनों की ही देन है।

वृक्ष : प्रकृति का सुंदर उपहार : वृक्ष वनों के प्राण हैं । वनों का अस्तित्व वृक्षों पर ही निर्भर है। वनों का सौंदर्य, शीतल छाया, स्वच्छ आवरण तथा शद्ध पर्यावरण वृक्षों की ही देन है। ये नि:संदेह मानव-जीवन के लिए प्रकृति का सन्दर उपहार है। वृक्षों का महत्व निम्नांकित तथ्या द्वारा समझा जा सकता है

(i) वृक्षों द्वारा हमें विभिन्न प्रकार के फल, सब्जियाँ, खाद्यान्न, जड़ी-बूटियाँ आदि उपलब्ध होती हैं।

(ii) वृक्ष हमें भवन-निर्माण तथा जलावन के लिए लकड़ियाँ प्रदान करते हैं। अनेक उद्योग-धंधों में लकड़ियों का उपयोग होता है।

(iii) वनों में वृक्षों के विस्तार से व्यापक वर्षा होती है। (iv) वृक्ष बाढ़ नियंत्रण तथा नदी तटों के कटाव को रोकते हैं।

(v) पर्यावरण को स्वच्छ तथा प्रदूषण रहित बनाकर मानव-जीवन के लिए शुद्ध ऑक्सीजन का निर्माण करते हैं, जिसमें साँस लेकर हम जीवित रहते हैं। इसके अतिरिक्त अन्य अनेक लाभ हैं। जैसे-कागज, गोंद, कोयला आदि ।

वृक्षों से लाभ : उपरोक्त तथ्यों से स्पष्ट हो जाता है कि वृक्षों से हमें अगणित लाभ हैं। वस्तुतः हमारे अस्तित्व का रखवाला वृक्ष ही है, जो हमें जीवन रक्षा के लिए आवश्यक स्वच्छ वातावरण का निर्माण करता है तथा श्वाँस लेने के लिए शुद्ध वायु उपलब्ध कराता है। हमारे जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में वृक्षों की भूमिका असंदिग्ध एवं सराहनीय है।

वनों का संरक्षण आवश्यक : हमें अपने जीवन रक्षा के लिए तथा प्रदूषणमुक्त स्वस्थ प्राणवायु की प्राप्ति के लिए वनों का संरक्षण करना नितांत आवश्यक है। "वन रहेंगे, हम रहेंगे" उक्ति अक्षरशः तथ्यपूर्ण है। वस्तुतः मानव जीवन का अस्तित्व वनों की रक्षा पर निर्भर करता है । वनों की सुरक्षा के लिए वृक्षों की सघनता आवश्यक है। वृक्षों की अंधाधुंध कटाई द्वारा हम स्वयं अपना अहित कर रहे हैं। इसका परिणाम है-पर्यावरण प्रदूषण, अनावृष्टि, नदियों के तटबंधों तथा अन्य भू-क्षेत्र का कटाव, वृक्षों से प्राप्त होने वाले अन्य लाभ, जैसे-फल, सब्जी, जड़ी-बूटियाँ, अन्य खाद्यान्न आदि का अभाव । हमें वन-विनाश के वर्तमान दुष्परिणाम से मुक्ति के लिए वृक्षों की सुरक्षा करनी होगी। वृहद पैमाने पर वृक्ष रोपण करना होगा। वन महोत्सव द्वारा नए पौधे लगाकर वनों का विस्तार करना होगा।

हमारे पूर्वज वन-संरक्षण का महत्व समझते थे । वृक्षों की रक्षा के लिए उनका दृष्टिकोण सकारात्मक था। प्राचीन काल से ही वृक्षों को देवत्व प्राप्त था तथा उनकी पूजा की जाती थी। वन देवता उनके आराध्य थे। वर्ष के अनेक पर्वो पर वक्षों की पूजा की परम्परा चली आ रही है। आदिवासी समाज आज भी वन देवी की पूजा करता है।

उपसंहार : वन सृष्टि के अभिन्न अंग तथा हमारी अमूल्य निधि हैं। निष्काम देवता के रूप में प्राणियों का अस्तित्व रक्षा कर रहे हैं। हमारी प्राण-वाय के संरक्षक हैं। अतः हमें वृक्षों की कटाई रोककर अधिकाधिक वृक्ष रोपण द्वारा इनका संरक्षण करना चाहिए। हर्ष का विषय है कि भारत सरकार वनों की रक्षा में पर्णरूपेण सक्रिय है। वन-महोत्सव एवं वृक्ष-रोपण अभियान के माध्यम से इस दिशा में काफी प्रगति हुई है। देश के नागरिका में भी इस दिशा में नई चेतना एवं उत्साह का सृजन हुआ है। अनेक स्वयसेवा संस्थाएँ इस पुनीत कार्य में सक्रिय योगदान कर रही हैं। यह सारी गतिविधिया वन-संरक्षण के स्वर्णिम भविष्य की ओर संकेत कर रही हैं।