परिचय


विचारों के मेल को 'एकता' कहते हैं। जहाँ बहुत-से लोग किसी एक विचार या उद्देश्य को ध्यान में रखकर, एकमत होकर, तनमन से काम करते हैं, वहाँ एकता होती है। 'एकता' एक होने की भावना है। यह मनुष्य के विचारों को, उसके निश्चय और मनोबल को मजबूत बनाती है। ऐसी हालत में कोई भी काम कठिन अथवा असंभव नहीं रह जाता। 

एकता का महत्त्व

मनुष्य समाज में रहता है। इसके लिए वह एकता की कल्पना करता है, क्योंकि वहसंसार में या समाज में अकेला जीवन बिता नहीं सकता। यह उसकी स्वाभाविक कमजोरी है। इस कमजोरी को दूर करने के लिए वह पहले अपने परिवार में, फिर पड़ोस, फिर अपनी जाति या संप्रदाय में एकता की स्थापना करता है। यह एकता ही समाज का निर्माण करती है। सामाजिक जीवन बिताने के लिए एकता जरूरी है। इसके बिना मनुष्य पशु होता, सभी अपने में स्वतंत्र और स्वच्छंद होते। ऐसी अवस्था में नये-नये विचारों का जन्म नहीं होता और मनुष्य सामाजिक प्राणी नहीं रह जाता। अतः, एकता मनुष्य-जीवन के लिए अनिवार्य है। परिवार को सुखी बनाने के लिए लोगों में एकता चाहिए, समाज को खुशहाल करने के लिए सभी जातियों, संप्रदायों और वर्गों में एकता चाहिए और देश को आजाद बनाये रखने के लिए देशवासियों में एकता चाहिए। इस प्रकार परिवार, समाज और देश को हर तरह सुखी और भरा-पूरा बनाये रखने के लिए सभी लोगों में एकता आवश्यक है। एकता न होने पर जीवन के सभी अंग टूटकर बिखर जाते हैं। ऐसी अवस्था में जब बाहर से किसी देश पर आक्रमण होता है, तब देश पराधीन हो जाता है। स्पष्ट है कि एकता के बिना हमारा जीवन एक क्षण भी चल नहीं सकता।

स्वामी विवेकानन्द की वाणी
मध्यकालीन भारत
एकता सुख, उन्नति और सफलता की जननी है। इसके अनेकानेक उदाहरण भरे पड़े हैं। हमारे यहाँ की एक बहुत पुरानी कथा है। वह इस प्रकार है–एक किसान के चार लड़के थे। वे आपस में लड़ते रहते थे। किसान अपने लड़कों की यह हालत देख बड़ा दु:खी रहता था। एक दिन जब वह मरने लगा, तब उसने अपने सभी लड़कों को बुलाकर कुछ लकड़ियों को अलग-अलग तोड़ने को कहा। सबने बारी-बारी से ऐसा किया और एक-एक लकड़ी तोड़ डाली। फिर, किसान ने लड़कों को लकड़ियों का एक गट्ठर तोड़ने को कहा। वह किसी से न टूटा। तभी लड़कों की आँखें खुलीं और तब से वे मिलजुलकर रहने लगे। उनका शेष जीवन बड़े आनंद और सुख से कटा।।


एकता के कुछ उदाहरण


मनुष्य की शरीर-रचना एकता का एक सुंदर उदाहरण है। यदि शरीर का कोई भाग काम करना बंद कर दे, तो क्या जीवन सुख और आनंद से कट सकता है? उत्तर है, नहीं। यदि दिमाग सोचने का काम बंद कर दे, आँख देखने का, कान सुनने का और हृदय साँस लेने और छोड़ने का काम बंद कर दे, तो मनुष्य की क्या हालत हो जायेगी, इसे हम आसानी से समझ सकते हैं। शरीर का सारा स्वास्थ्य उसके अंगों के एक होकर काम करने में है।
भारत पर बाहर से तभी हमले हुए, जब देश में एकता की कमी हुई। लेकिन जब हम एक हो गये, तब अँगरेज सरकार यहाँ से चलती बनी।

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उपसंहार


इन उदाहरणों से स्पष्ट है कि हम चाहे परिवार में रहते हों या समाज में या देश में—सभी स्थानों पर एकता की आवश्यकता है। यह मनुष्य को सुंदर, सुखी और
आनंदमय जीवन बिताने का अवसर देती है। एकता में ही सच्चा सुख और बल है; एकता निराशा दूर करती है, उत्साह को बढ़ावा देती है तथा उन्नति और विकास के नये-नये मार्ग बनाती है।