परिचय

डाक विभाग के उस कर्मचारी को डाकिया कहते हैं, जो लोगों के घर जाकर उनके पत्र, पार्सल, मनीऑर्डर इत्यादि पहुँचाता है और बदले में सरकार से वेतन पाता है।

पोशाक और कार्य

सरकार की ओर से उसे एक खास तरह की पोशाक पहनने को दी जाती है। शहर का डाकिया खाकी पैंट, खाकी कमीज और खाकी पगड़ी या टोपी का इस्तेमाल करता है। गाँव का डाकिया प्रायः इस तरह की पोशाक नहीं पहनता। वह साधारण कपड़े पहनकर गाँव में लोगों को पत्र, मनीऑर्डर आदि देता है। उसके गले में चमड़े का एक थैला लटकता रहता है, जिसमें वह सभी चीजों को रखता है। उसका काम दिनभर चलकर लोगों के घर पत्र आदि पहुँचाना है। चाहे चिलचिलाती धूप हो या मूसलधार वर्षा, कड़ाके का जाड़ा पड़ता हो या ओले बरसते हों, डाकिया हर दिन घर-घर पहुँचता है और लोगों को दुःख-सुख के समाचार पत्रों द्वारा देता है। उसे तनिक भी फुर्सत नहीं मिलती। गाँव के डाकिये को पत्र आदि बाँटने के अलावा पोस्टकार्ड, टिकट आदि भी बेचने पड़ते हैं। वह अपने थैले में डाक-टिकट रखता है और जरूरत पड़ने पर लोगों के हाथ टिकट आदि बेचता है। शहर के डाकिये को ऐसा नहीं करना पड़ता। डाकिया सुबह 9 बजे से शाम के 5 बजे तक पत्र आदि बाँटने का काम करता है।
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आवश्यकता

डाकिया समाज का एक उपयोगी सेवक है। वह बड़े काम का आदमी है। वह पत्र द्वारा माँ को अपने बिछुड़े बेटे से मिलाता है और बीमार दादी या नानी का समाचार सुनाता है। शुभ समाचार मिलते ही उदासी दूर हो जाती है और ओठों पर मुस्कुराहट दौड़ने लगती है; आँखें चमकने लगती हैं। उसकी सेवाएँ बड़ी ही उपयोगी हैं।

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वेतन और उत्तरदायित्व

डाकिये का काम बड़ा कठिन है। वह दिन-भर घूम-घूमकर चिट्ठियाँ बाँटता है, मनीऑर्डर के रुपये देता है, अपनी पीठ पर पार्सल के गट्ठर लादकर लोगों के घर पहुँचाता है। डाकिये का काम बड़ी जवाबदेही का भी है। वह अपने साथ मनीऑर्डर के रुपये, पार्सल के सामान आदि लेकर चलता है। कभी-कभी वह रास्ते में गुंडों और बदमाशों से पिटा जाता है, उसके रुपये, थैले और पार्सल छीन लिये जाते हैं, ऐसी हालत में उसकी जान जोखिम में पड़ जाती है। कभी-कभी तो उसे जान से भी हाथ धोना पड़ता है, पिटे तथा लुटे जाने पर अपने अफसरों के सामने उसे सफाई देनी पड़ती है। बेचारा कहीं का नहीं रहता—न घर का, न घाट का।।
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उपसंहार 

 डाकिये के थैले में सुख-दु:ख के अनेक संदेश रहते हैं। वह किसी को पत्र द्वारा रुलाता है तो किसी को हँसाता भी है। कभी-कभी वह हमारी आशा और उत्सुकता का केंद्रबिंदु बन जाता है। वह सबका प्रिय है। सभी अपने द्वार पर उसका स्वागत करते हैं। अतः, डाकिया हमारे समाज का एक बड़ा ही उपयोगी सेवक है।