परिचय 

दुर्गापूजा को ‘दशहरा’, ‘विजयादशमी’ और ‘नवरात्र पूजा' भी कहते हैं। यह हिंदुओं का एक प्रसिद्ध त्योहार है। यह पर्व उत्तरप्रदेश, बिहार और बंगाल में बड़ी तैयारी से मनाया जाता है।


महत्त्व 

दुर्गापूजा का आरंभ कब हुआ, इसके संबंध में अनेक मत हैं। इसकी अनेक पौराणिक कथाएँ देश के भिन्न-भिन्न भागों में प्रचलित हैं। एक प्रसिद्ध कथा के अनुसार श्रीरामचंद्र ने इस दशमी के दिन रावण पर विजय पायी थी। इसी स्मृति में आजतक विजयादशमी का उत्सव मनाया जाता है। दूसरी कथा के अनुसार, जिस दिन माँ दुर्गा ने चंडी बनकर, देवताओं के शत्रु महिषासुर का वध किया, उसी दिन से यह पर्व मनाया जाता है। इस पूजा, के आरंभ की कथा चाहे जो भी हो, इतना तो स्पष्ट है कि इस दिन सत्य की विजय और असत्य की पराजय हुई थी, देवताओं की जीत और राक्षसों की हार हुई थी। इसी खुशी में भारत के लोग दुर्गापूजा का पर्व मनाते हैं और सभी आपस में भेदभाव भूलकर गले-गले मिलते हैं।
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पूजा की तैयारी

आश्विन के शुक्लपक्ष के आरंभ में कलश-स्थापन होता है और उस दिन से पूजा आरंभ हो जाती है। यह पूजा दशमी तक चलती है। सप्तमी, अष्टमी और नवमी को बड़ी धूमधाम से पूजा की जाती है। नवमी तक ‘दुर्गासप्तशती' का पाठ होता है। दशमी को यज्ञ की समाप्ति होती है। यह दिन बड़ा ही शुभ माना जाता है। भारतीय परिवारों में अच्छे कामों का शुभारंभ इसी दिन किया जाता है। नये काम इसी दिन शुरू किये जाते हैं। सप्तमी के दिन दुर्गा की प्रतिमा किसी पवित्र स्थान पर स्थापित की जाती है जिसकी पूजा दशमी तक चलती है। कहते हैं, भगवान राम ने भी दुर्गा की पूजा की थी और उन्हें दुर्गा की ही सहायता से विजय प्राप्त हुई थी। दुर्गा की महत्ता का यही कारण है। लोग नाच, गान, संगीत और नाटक में सुधबुध खोकर आनंद की लहरों में डूब जाते हैं। छोटे-बड़े नये कपड़े पहनते हैं।
और एक-दूसरे के घर जाकर अच्छा-अच्छा भोजन करते हैं। बच्चे और स्त्रियाँ रंग-बिरंगे कपड़े पहनकर बाहर घूमने जाती हैं। जिधर देखो, उधर आनंद और उल्लास का सागर लहराता दिखायी देता है। अतः, दुर्गापूजा हिंदुओं का एक बड़ा ही प्रसिद्ध और पवित्र पर्व
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सामाजिक महत्त्व और उपसंहार

दुर्गापूजा का सामाजिक महत्त्व भी है। वर्षाऋतु की समाप्ति के बाद से वाणिज्य-व्यापार की उन्नति होती है; लोग जहाँ-तहाँ भ्रमण करने को निकलते हैं। इस समय देश की जलवायु अच्छी रहती है। नयी-नयी फसलें और हरी सब्जियाँ खाने को मिलती हैं; खाना आसानी से पचता है। आदमी का स्वास्थ्य ठीक रहता है। इस प्रकार, दुर्गापूजा भारतीय जीवन के लिए सुख, शांति और उन्नति का संदेश लेकर आती है।