• चाबी भरी हुई घड़ी में स्थितिज ऊर्जा संचित रहती है।
  • पृथ्वी द्वारा सूर्य का चक्कर लगाने में किया गया कार्य शून्य होता है।
  • कार्य की माप वस्तु पर लगाये गये बल व बल की दिशा में हुये विस्थापन के गणनफल के बराबर होती है।
  • पहाड़ों पर चढते समय व्यक्ति आगे की ओर झुक जाता है, ताकि उसके गुरुत्व केन्द्र से होकर गुजरने वाली रेखा उसके पैरों के नीचे से होकर जाये। 
  • पीसा की मीनार तिरछी होते हुए भी नहीं गिरती, क्योंकि उसके गुरुत्व-केंद्र से होकर जाने वाली रेखा आधार से होकर गुजरती है।
  • किसी वस्तु का गुरुत्व-केंद्र वह बिन्दु है, जहाँ वस्तु का समस्त भार कार्य करता है।
  • न्यूटन से पहले आर्यभट्ट ने बताया था कि पृथ्वी सभी वस्तुओं को अपनी ओर खींचती है।
  • घोड़ा गाड़ी को न्यूटन के तीसरे नियमानुसार आगे की ओर खींचता है।
  • किसी वस्तु के द्रव्यमान व वेग के गुणनफल को संवेग कहते हैं। जब कोई सेना की टुकड़ी पुल को पार करती है, तो सैनिकों को कदम से कदम मिलाकर नहीं चलने की सलाह दी जाती है, क्योंकि इससे अनुनाद के कारण पुल टूटने का खतरा बना रहता है।
  • किसी वस्तु को जब द्रव में डुबाया जाता है, तो उसके भार में कमी उसके द्वारा विस्थापित किये गये द्रव के भार के बराबर होती है।
  • ध्वनि तरंगें निर्वात में गमन नहीं कर सकतीं।
  • प्रकाश के प्रकीर्णन के कारण आकाश का रंग नीला दिखायी देता है।
  • हाइग्रोमीटर से वायु की आर्द्रता मापी जाती है।
  • भूस्थिर उपग्रह का परिक्रमण काल 24 घंटे होता है तथा इसकी पृथ्वी से ऊँचाई 36,000 किमी. होती है।
  • चन्द्रमा पर गुरुत्वीय त्वरण का मान पृथ्वी पर इसके मान का g/6 होता है।
  • यदि किसी उपग्रह से कोई पिण्ड छोड़ दिया जाये, तो पिण्ड उपग्रह के साथ पृथ्वी का चक्कर लगाता रहेगा
  • गुरुत्वीय त्वरण का मान पृथ्वी के केन्द्र पर शून्य होता है। प्रकाश तरंगों का ध्रुवण प्रकाश तरंगों के अनुप्रस्थ प्रकृति की पुष्टि करता है।
  • अप्रगामी तरंगों द्वारा ऊर्जा का संचरण नहीं होता। साबुन के बुलबुले व्यतिकरण के कारण रंगीन दिखाई पड़ते हैं।
  • सीस्मोग्राफ द्वारा भूकम्प तरंगों को चित्रित किया जाता है।
  • जब किसी पिण्ड की वायु में चाल, ध्वनि की चाल से अधिक होती है, तो इसे पराध्वनिक चाल कहते हैं।
  • ध्वनि तरंगें निर्वात में नहीं चल सकतीं।
  • दाब परिवर्तन का ध्वनि की चाल पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता।
  • 1°C ताप बढ़ाने पर वायु में ध्वनि की चाल 0.61 मीटर प्रति सेकेण्ड बढ़ जाती है। 
  • केन्डिला ज्योति तीव्रता का मात्रक है। वायु का बुलबुला जल में अवतल लेंस की भाँति व्यवहार करता है।
  • लेस की क्षमता का मात्रक डायोप्टर (D) या प्रति मीटर है।
  • उत्तल लेंस की क्षमता धनात्मक व अवतल लेंस की क्षमता ऋत्मक होती है।
  • श्वेत प्रकाश के सात रंगों में विभक्त होने को वर्ण-विक्षेपण कहते हैं। 
  • किसी वस्तु का द्रव्यमान सदैव स्थिर रहता है, जबकि इसका भार भिन्न-भिन्न स्थानों पर भिन्न-भिन्न होता है।
  • पृथ्वी तल पर वस्तु का भार भूमध्य रेखा पर सबसे कम व ध्रुवों पर सबसे अधिक होता है।
  • सूर्य के चारों ओर चक्कर लगाते हुए ग्रह का वेग बदलता रहता है।
  • जब ग्रह सूर्य के समीप होता है, तो उसका वेग अधिक होता है, जब एक ग्रह दूर होता है, तो वेग कम होता है।
  •  प्रकाश वर्ष दूरी मापने की इकाई है।
  • एक प्रकाश वर्ष में 9.46 x 1012 किमी होते हैं।
  • ट्रांसफार्मर के द्वारा प्रत्यावर्ती वोल्टता को कम या अधिक किया जाता है।
  • जल के कणों द्वारा प्रकाश के प्रकीर्णन के कारण समुद्र का जल नीला दिखाई देता है।
  • जमीन के अंदर पाइपों द्वारा दूरस्थ स्थानों को तेल भेजने के लिए। रेडियो ऐक्टिव समस्थानिकों का प्रयोग किया जाता है।
  • सौर्य किरणों के प्रकीर्णन के अभाव के कारण अंतरिक्ष यात्री को आकाश का रंग काला दिखाई देता है।
  • कम प्रकीर्णन तथा अधिक तरंगदैर्घ्य के कारण उगते तथा डूबते सूर्य का रंग लाल दिखाई देता है।
  • नाभिकीय रियेक्टरों में होने वाली अभिक्रिया के नियंत्रण के लिए कैडमियम या बोरॉन की छड़ें प्रयोग की जाती हैं।
  • परमाणु भट्टी में न्यूट्रॉनों की गति को मंद करने के लिए भारी जल या ग्रेफाइट आदि मंदकों का प्रयोग किया जाता है।
  • सबसे पहले नाभिकीय रियेक्टर शिकागो में बनाया गया।
  • पृथ्वी एवं पुरानी चट्टानों के आयु निर्धारण हेतु यूरेनियम विधि का प्रयोग किया जाता है।
  • चुम्बक मुख्यत: लोहे और इस्पात के बनाये जाते हैं।
  • हीरा पूर्ण आंतरिक परिवर्तन के कारण चमकता है।
  • तारे प्रकाश के अपवर्तन के कारण टिमटिमाते प्रतीत होते हैं।
  • अंतरिक्ष यात्रियों को आकाश काला दिखाई देता है।
  • लाल रंग का प्रकीर्णन सबसे कम व बैंगनी रंग का प्रकीर्णन सबस अधिक होता है।
  • प्रकाश के प्रकीर्णन के कारण आकाश का रंग नीला दिखाई देता है
  •  जल के जमने से इसका आयतन बढ़ता है।यही कारण है कि के दिनों में कभी-कभी नल के पाइप फट जाते है।
  • ठंडे प्रदेशों में झीलों का जल जम जाने के बाद भी झील के ना जल का ताप 4°C रहता है, जिसमें जलीय जन्तु जिन्दा रहते हैं।
  • रेल की पटरियाँ बिछाते समय उनके बीच कुछ जगह छाई हैं, क्योंकि पटरियाँ गर्मियों में ऊष्मा पाकर प्रसारित होती है।
  • पराश्रव्य तरंगों की आवृत्ति 20,000 हर्ट्ज (Hz) से अधिक होती है।
  • जिन तरंगों की आवृत्ति 20 हर्ट्ज (Hz) से कम होती है, अवश्रव्य तरंगें कहलाती हैं।
  • हम उन्हीं ध्वनि तरंगों को सुन सकते हैं, जिनकी आवृत्ति 20 कंपन प्रति सेकण्ड से 20,000 कम्पन प्रति सेकेण्ड के बीच होती है।
  • एक कंपन करने में लगा समय आवर्तकाल कहलाता है। किसी वस्तु द्वारा एक सेकेण्ड में किये गये कम्पनों की संख्या को आवृत्ति कहते हैं।
  • वाशिंग मशीन अपकेन्द्रण के सिद्धांत पर कार्य करती है। 
  • पहाड़ों पर खाना देर से पकता है, क्योंकि वहाँ वायुमंडलीय दाब कम होने के कारण जल का क्वथनांक घट जाता है।