प्रश्न 1. इस कहानी की प्रमुख घटनाएँ कौन-कौन सी हैं? लिखिए। 

उत्तर- ईदगाह कहानी की कुछ प्रमुख घटनाएँ मुख्य रूप् में निम्नलिखित हैं-
(1) गाँव में चारों ओर ईद के त्योहार की प्रसन्नता छाई हुई है। लोग ईद मनाने की तैयारियों में जुटे है। सभी ईदगाह जाने की तैयारी कर रहे हैं।
(2) बच्चे एकत्रित होकर मेले में जाते है। रास्तें मं उनकी परस्पर विभिन्न प्रतिक्रियाएँ होती है।
(3) मेले में बच्चे विभिन्न चीजें खरीदते हैं। वे सभी अपने-अपने खरीदे गए खिलौनों के पक्ष में तर्क देते है और हामिद चिमटा खरीदता है।
(4) ईद के अवसर पर ईदगाह में सामूहिक नमाज़ का दृश्यांकन प्रभावी बन पड़ा है।
(5) मेले में बच्चे अपने अपने घर वापस लौटते है। हामिद अपनी दादी को चिमटा देता है तो उसकी दादी भावुक होकर हामिद पर तरस खाकर आँसू बहाती है।

प्रश्न 2. आश्य स्पष्ट कीजिएः


(क) उन्हें क्या खबर कि चैधरी आज आँखे बदल लें तो यह सारी ईद मुहर्रम हो जाए। 

उत्तर- प्रमेंचंद जी के कहने का आशय यह है कि अब्बाजा़न को चैधरी कायमअली ईद मनाने के लिए रूप्ए उधर न दे तो घर में बच्चे ईद खुशी-खुशी नहीं मना पाएँगं। उनकी ईद खुशी की जगह शोक में बदल जाएगी। बच्चे इस स्थिति से अनमिज्ञ थे।


(ख) उसके अंदर प्रकाशन है, बाहर आशा। विपत्ति अपना सारा दलबल लेकर आए, हामिद की आनंद-भरी चितवन उसका विघ्वंस कर देगी। 

उत्तर- अमीना हामिद के विषय में सोचने लगती है। अमीना जानती है कि हामिद को इस अभावों से कुछ लेना-देना नहीं है। वह तो ईद मनाने को उत्साहित है। अब यदि कोई मुसीबत पूरी ताकत से आ भी जाए तो आनंद और उत्साह से भरा हामिद विचलित न होगा। ईद को लेकर अमीना और हामिद की मनः स्थिति में काफी अंतर है।

प्रश्न 3. निम्नलिखित गयांशों की सप्रसंग व्याखा कीजिए-


(क) कई बार यही क्रिया होती है........... आत्माओं को एक लड़ी में पिरोए हुए है। 

उत्तर-प्रसंग-ये पंक्तियाँ प्रसिद्ध कथाकार मुंशी प्रेमचंद की कहानी ’ईदगाह’ से ली गई है। लेखक ने ईद के अवसर पर ईदगाह में सामूहिक नमाज़ पढ़ने के दृश्य को सजीव किया है। प्रेमचंद जी नमाज पढ़ने के ढंग एवं व्यवस्था के संचालन को आश्चर्यजनक बताते हुए लिखते है कि-
व्याख्या-ईदगाह में नमाजियों के लाखों सिर नमाज़ अदा करते समय खुदा के आगे झुकते और फिर एक साथ ऊपर होते थे। जब एक साथ झुकने व क्षड़े होने की क्रिया होती तो ऐसा होता मानों लाखों बिजलियाँ (बत्तियाँ) एक साथ जलती-बुझती हों। सिजदे में सिरों के झुकने ओर उठने का यह क्रम बड़ा अनोखा प्रतीत होता था। ईदगाह में की जाने वाली सामूहिक क्रियाएँ हदय को विस्तृत और अंतहिन श्रद्धा, गव्र ओर आंतरिक आनंद से भर देती थी। यह विलक्षण दृश्य सभी में भाई-चारे की भावना को दर्शाता था। एकता के सूत्र में बंधे ये सभी लोग आत्मा से भी एक अभिन्न रूप् में जुड़े हुए थे। ये लोग लड़ी में पिरोए मोतियों के समान प्रतीत होते थे।