vaidik kaal  kee pooree jaanakaaree


इस सभ्यता की जानकारी वेद से होती है, इसलिए इसका नाम ’वैदिक सभ्यता’ रखा  गया। वैदिक सभ्यता की अवधि 1500 ई॰ पू॰ से 600 ई॰ पू॰ तक थीं। वैदिक काल को ऋगवैदिक ( 1500-1000 ई॰ पू॰) तथा उत्तर वैदिक काल (1000 ई॰ पू॰ से 600 ई॰ पू॰) मे विभक्त किया गया है। वैदिक सभ्यता एक ग्रामीण सभ्यता थी। भारत आने के पश्चात आर्य सर्वप्रथम सप्त सैधव प्रदेश में बसे थे। वहाँ आर्य शब्द एक भाषा समूहा का द्योतक है।

समाज 


आर्य समाज पितृ सतात्म था, परन्तु नारी का पर्याप्त सम्मान था, संयुक्त परिवार की प्रािा तथा वर्ण व्यवस्था थी, लेकिन  कर्ममूलक। दशवे मण्डल के पुरूष सूक्त में शुद्र सहित चार वर्णों की चर्चा है। समाज में बाल विवाह, पर्दा प्रथा तथा महिलाओं के लिए राजनीति एवं सम्मपति सम्बन्धी अधिकार नही थे। समाज में अन्तर्जातीय वविाह, नियोग प्रथा, पुनर्विवाह, स्त्री शिक्षा, पुत्री का उपनयन संस्कार दास प्रथा, आदि का प्रचलन था। समाज तीन वर्गों में बँटा था- योद्धा, पुरोहित, और सामान्य लोग। आर्य लोग मूलतः शाकाहारी थे परन्तु विशेष अवसरों पर माँस का सेवन एवं सोमरस पान करते थें तीन प्रकार के वस्त्र पहनते थे, अधोवस्त्र उत्तरीय वस्त्र , अधिवास। ऋग्वेद में उष्णीय का उल्लेख मिलता है।


राजनीतिक स्थिति 


ग्राम, विश और जन थे उच्चतर इकाई थी। ग्राम का प्रधान ’ग्रामणी’ विश का प्रधान ’विशपति’ एवं जन का प्रधान ’जनपति या राजा’ कहा जाता था। राजा का पद बाद में आनुवांशिक हो गया। ऋगवैदिक काल में सभा, समिति, विदथ, तथा गण जैसे अनेक कबीलाई परिषदों का उल्लेख है। ऋग्वैदिक राजा वस्तुतः युद्ध का स्वामी होता था। ऋग्वैदिक काल में सेनानी पुरोहित अन्य पदाधिकारी थे। प्रायः पुरोहित का पद वंशानुगत होता था। इसके अतिरिक्त सूत, रथकार और कमार तथा राजा समेंत कुल 12 रत्नी थे। पुरप स्पर्श एवं दूत अन्य अधिकारी थे, उग्र एवं जीव-गृभ पुुलिस कर्मचारी थे। इस काल में न्यायाधीशो को ’प्रश्न-विनाक’ कहते थे।

धार्मिक व्यवस्था


ऋग्वैदिक लोग जिस सार्वभौमिक सत्ता में विश्वास करते थे वह एकेश्वरवाद थी। इस काल में इन्द्र, अग्नि, वरूण, सोम क्रमशः प्रमुख देवता थें। इन्द्र का स्थान सर्वोच्च था। ऋग्वेद में जिज देवताओ की स्तुतियाँ अंकित है वे प्राकृतिक तत्वों में निहित शक्तियों कें प्रतिक हैं, लेकिन इस समय पूजा-अर्चना का उद्देश्य मोक्ष की प्राप्ति नही थी, वरन भौतिक सुख एवं समृद्धि की प्राप्ति थी।