अनुशान क्या है? अनुशासन का अर्थ है शिष्टाचार के सामान्य नियमों का पालन करना, समय की पाबंदियो को निभाना, अपने प्रत्येक काम को सही समय पर करना, कत्र्तव्य के प्रति सदैव चैकस रहना, किसी भी दायित्व के निवाह में तनिक भी ढील नहीं आने देना - सही अनुशासन है। शासन सदैव दूसरों के लिए होता है, किन्तु अनुशासन स्वयं अपने लिए होता है। अनुशान का प्रकृत सम्बन्ध संयम, शिष्टाचार और मर्यादित व्यवहार से है। अनुशान सदैव स्वैच्छिक होता है अर्थात् अपनी स्वेच्छा से ही स्वयं को मर्यादापूर्ण में बाँधे रखना।




वर्तमान समय में विद्यार्थियों के सन्दर्भ में अनुशासन की चर्चा सबसे ज्यादा हो रही है। कारण? कारण प्रत्यक्ष है। स्कूल, काॅलेजों में छात्र उच्छूखलतापूर्ण आचरणों कें प्र्याय बन गये है। कक्षाओं में समय पर उपस्थित ना होना, कक्षाएँ न करना, परीक्षाओं में कदाचार में लिप्त रहना, शिक्षकरों कें प्रति सम्मान का भाव न होना, उनसे दव्र्यवहार करना, आपस में मार-पीट करना, मामूलल बातों पर झगड़ पड़ना, हिंसकता की सीमा तक उग्र हो जाना, नशले पदार्थें का सेवन करना, आदि आज के छात्रों की साधरण दिनयर्चा हो गयी है। यही कारण है कि छात्रों को अनुशासित होने की सीख सभी दे रहे है। उनसे मर्यादापूर्ण व्यवहार की अपेक्षा की जा रही है। अध्ययन में चित्त देने के लिए कहा जा रहा है। उन्हें अनुशासन का महत्त्व समझाया जा रहा है।
छात्रों को भली-भँति यह समझ लेना चाहिए कि अनुशासित रहकर ही वे सही शिक्षा प्राप्ति के लक्ष्य को पा सकेगे। संयमित और अनुशांसित आचरण ही उन्हें अपनी प्रतिभा को निखारने का अवसर प्रदान करता है। अनुशासन का महत्त्व सर्वविदित है। बिना अनुशासन के एक पल भी चलना मुश्किल है। अनुशासन का महत्त्व सेना में देखने को मिलता है। जिस देष की सेना जितनी अधिक अनुशासित होती है, वह उतनी ही शक्तिशाल और विजयश्री प्राप्त करने वाली होती है। दफ्तरों में, अस्पतालों में, रेल, बस, यातायात के परिचालन में अनुशासन के महत्त्व से हम परिचित है।




विवकेपूर्ण आचारण का नाम ही अनुशासन है और अनुशासन छात्रों से लेकर सभी नागरिकों के लिए आवश्यक है। अनुशासन से क्रियाशीलता और कर्मठता आती है। अनुशासन कभी भी व्यक्ति को न ता उच्छूखल होने की इजाजत देता है, न ही उसे निराश, विवेकशून्य और साहसहीन बनने देता है। अनुशासन सबसे बड़ी आत्मशक्ति है जो हर संकट से मुनष्य को जूझने का बल प्रदान करती हैं पुरूषोत्तम वही बन सकता है जो मर्यादाप्रिय और अनुशासनप्रिय होगा। दुनिया में जिन लोगों ने भी महान कार्य किये है, वे सभी महान अनुशासित व्यक्ति थे। छात्रों को इनकी अनुशासनप्रियता से प्रेरणा ग्रहण करनी चाहिए और अनुशासन को अपने जीवन का आदर्श प्रतिमान बना लेना चाहिए।