रमन यादव
बाल भवन
बिलासपुर

16 जून, 2016
प्रिय मित्र कैलाश
          सप्रेम नमस्कार !
          कल मुझे दुखद समाचार मिला कि तुम्हारी माताजी का अचानक देहांत हो गया है। सुनकर हृदय को गहरा आद्यात लगा। अभी परसों ही तो मैं उनके दर्शन करके लौटा हूँ। वे पूर्णतया स्वस्थ और प्रसन्न थीं। फिर न जाने, यह अनहोनी कैसे हो गई!
   कैलाश ! इस गहरे दुख की घड़ी में अपने-आप को सँभालना । मै तुम्हारे कष्ट को समझ सकता हूँ। माँ के शीतल आँचल की कमी को अनुभव कर सकता हँू। परंतु उस परमात्मा के सामने सब विवश है। ऐसा मान लेना, जिसने उन्हें दुनिया में भेजा था, उसी ने वापस अपने पास बुला लिया। परमात्मा ने माँ को अपनी शरण में ले लिया है। वह माँ की आत्मा को शांति दे तथा तुम्हें इस दुख को सहन करने की शक्ति दे।

तुम्हारा शोकाकुल मित्र
रमन यादव