रिचा
हरिनगर
रामगड़

19 जून, 2015
प्रिय स्वेता,
   सस्नेह स्मरण !
  तुम्हारा बधाई-पत्र मिला ! पढ़कर अपार प्रसन्नता मिली। यूँ तो आजकल मै बहुत खुश हूँ क्योकि ढेर सारे बधाई-सेदेश मिल रहे हैं- विद्यालय से, मित्रों से, अध्यापकों से, संबंधियों से, परिचितों से, अपरिचितों से। अभी मेरी पीठ थपथपा रहे है। परंतु तुम्हारे बधाई-पत्र को पाकर बहुत प्रसन्न हूँः क्योंकि तुम्हारे शब्दो को मै बहुत महत्त्व देती हूँ। तुम्हारी प्रेरणा से ही मैंने इस दिशा में इतनी उन्नति की हैं। तुमने सफलता में ही नहीं, असफलता के क्षणों में भी मुझे उत्साह दिया है। मेरी इस सफलता में तुम्हारे उत्साह का बल ना होता तो शायद आज मैं इस शिखर पर न पहुँच सकती।
    तुम्हारे बधाई-पत्र के लिए कैसे धन्यवाद व्यक्त करूँ। शब्दों में सामथ्र्य नहीं, वचन हो रहे मौन।
मम्ी पापा को सादर नमस्कार देना!
तुम्हारी
रिचा