निकिता कुमारी
राम नगर
चिरकुण्डा

16 मार्च, 2016
प्रिय अनिशा
कैसी हो ?
           आशा है सानंद होगी। मैं भी आज बहुत प्रसन्न हूँ। यह प्रसन्नता बाँटने के लिए ही तुम्हें पत्र लिख रही हँू। अनिशा ! आज मैंने अंतर्विद्यालय वाद-विवाद प्रतियोगिता में प्रथम पुरस्कार प्राप्त किया है। यह जीत मेरे लिए इसलिए महत्वपूर्ण है क्योकि इसमें पिछले सालों के अनेक विजेता प्रतिभागी भग ले रहे थे। सभी पूरी तैयारी के साथ आए थे। सबने इतना अच्छा बोला कि निर्णय करना कठिन था। मैं भी अपनी जीत के बारे में पूरी तरह आश्वस्त नहीं थी। 10 टीमों की इस संघर्षपूण्र प्रतियोगिता में विजेता के यप में जब मेरा नाम बोला गया तो मेरी साँसें जो़र-जोर से चलने लगी। फिर तालियों की गड़गड़़ाहट ने मुझे सँभाल लिया, वरना उत्तेजना के मारे मैं अचेत हो जाती । सचमुच अनिशा, आज मै बहुत खुश हूँ।

तुम्हारी सखी
निकिता कुमारी