वैज्ञानिक
जन्म
लघु परिचय
हेनरी बेकुरल ( 1852-1908 ) ये फ्रांसीसी वैज्ञानिक थे। इन्होने रेडियोऐक्टिविटी गामा किरणों की खोंज की थी।
नील बोहर (1855-1962 ) ये डेनमार्क के वैज्ञानिक थे, जिन्होंने परमाणु की संरचना का माॅडल प्रतिपादित किया था। इन्हे 1922 में नोबेल पुरस्कार मिला था।
हेनरी कैवण्डिश (1731-1810 ) ये ब्रिटीश वैज्ञानिक थे, जिन्होने हाइड्रोजन को तत्व के रूप् में खोज की।
जेमस चैडविक (1891-1974 ) ये ब्रिटिश वैज्ञानिक थे, जिन्होंने 1932 ई॰ में परमाणु की रचना में विद्युत आवेश रहित परमाणु कण ’न्यूट्राॅन’ की खोज की।
काॅरनिकस (1473-1543 ) ये पोलैण्ड के खगोल शास्त्री थे, जिन्होंने सबसे पहले बताया कि ’पृथ्वी स्थिर नहीं है और सूर्य के चारों ओर घूमती है।
मैडम क्यूरी ( 1867-1934) ये पोलैण्ड की वैज्ञानिक थी। बाद में फ्रांस की नागरिकता ग्रहण कर ली। इन्होने रेडियम की खोज की थी। इन्हें दो बार 1903 ई॰ व 1911 ई॰ में नोबेल पुरस्कार मिला।
जाॅन डाल्टन (1776-1844) इन्होंनें परमाणु के सिद्धांत का प्रतिपादन किया था। गुणित अनुपात का प्रतिपादन किया था।
चाल्र्स राॅबर्ट डार्विन (1809-1882) इनकी पुस्तक दि आॅरिजिन आॅफ स्पेसीज में विकास का सिद्धांत प्रतिपादित किया गया हैं प्राकृतिक वरण ( नेचुरत सेलेक्शन) का नियम इनके द्वारा ही प्रतिपादित किया गया था।
अल्बर्ट आइन्स्टीन (1879-1955) इन्होंने 1933 में सापेक्षिकता के सिद्धांत का प्रतिपादन किया है। इन्होंने प्रकाश विद्युत प्रभाव की व्याखा भी की। जिसके लिए इन्हे नोबेल पुरस्कार मिला।
अलेक्जेण्डर फ्लैमिंग (1881-1955) इन्होने लाइसोजाइन तथा पेनीसिलिन की खोज की थी।
विलियम हार्वे (1578-1657) ये ब्रिटिश डाॅक्टर थे, जिन्होंने ’रक्त परिवहन’ की खोज की थी तथा कार्यिकी एवं भूणिकी का प्रयागात्मक अध्ययन किया था।
एडवर्ड जेनर (1749-1823) ये इंगलिश डाॅक्टर थे, जिन्होने चेचक के टीके का खोज सूत्रपात किया था।
जोसेफ लिस्टर (1827-1912) ये ब्रिटिश सर्जन थे और इन्होंने ऐण्टिसेप्टिक सर्जरी का सूत्रपात किया था।
जोसेफ प्रीस्टले (1733-1804) ये ब्रिटिश रसायनशास्त्री थे, जिन्होंने आॅक्सीजन की खोज की और गैसों को एकत्रित करने की विधि का विकास किया।
डबल्यू. सी रौन्टजन (1845-1923) ये जर्मन वैज्ञानकि थे, जिन्होंने एक्स-रे की खोज की थी, अतः एक्स-किरणों की रौनटजन रेज भी कहते है।
राॅबर्ट हुक (1635-1703) इनहोंने सर्वप्रथम मृत पादप ऊतक में कोशिकाएँ देखी और सन् 1665 में इन्हें सेल की संज्ञा दी। इन्होंने पदार्थों की प्रत्यास्थता का भी अध्ययन किया।
अर्नेस्ट रदरफोर्ड (1871-1937) ये स्काॅटलैण्ड के वैज्ञानिक थे, जिनहोंने 1911 ई॰ में परमाणु के नाभिक की खोज की थी।
आर्यभट्ट (476-520) प्राचीन भारत के प्रसिद्ध खगोल एवं गणितज्ञ थे, जिनकी रचना ’आर्यभट्टीय’ कहलाती है। इन्होंने गणित एवं खगोल में कई महत्वपूर्ण कार्य किए। सबसे पहले तो इन्होंने यह बताया कि ’पृथ्वी अपने अक्ष पर धूमती हुई सूर्य की परिक्रमा करती है।
जगदीशचन्द्र बोस (1858-1937) प्रसिद्ध भौतिकी विज्ञानी थे, जिन्होंने मरकोनी से भी पहले बेतार-प्रणाली का समर्थन किया था। उन्होंने वनस्पतियों की संवेदनशीलता पर अनेक आश्चर्यजनक प्रदर्शन किए। इन्होंने बोस इन्सीट्यूट8 की स्थापना की थी। इन्होंने क्रेस्कोग्राफ नामक यंत्र का भी आविष्कार किया था।
चन्द्रशेखर बेंकट रमन (1888-1970) रमन प्रीभाव के लिए 1930 में भोतिकी के क्षेत्र में ’नोबेल पुरसकार’ इन्हे प्राप्त हुआ था। उनके द्वारा ’रमन प्रभाव’ 28 फरवरी को आविष्कृत हुआ था, जिसके महत्व को देखते हुए प्रतिवर्ष 28 फरवरी को भरत में ’राष्ट्रीय विज्ञान दिवस’ मनाया जाता है। 1954 में उन्हें भारत रत्न तथा 1958 में लेनिन शांति पुरस्कार सम्मान से भी विभूषित किया गया
बीरबल सहानी (1891-1949) प्रसिद्ध वनस्पतिज्ञ इन्होंने अपने विस्तृत अनंुसंधान क्षेत्र के अन्तर्गत कुछ फर्नों की सजातीयता औ संरचना पर निर्णायक खोज काय्र किया।
मेघनाद साहा (1893-1956) भौतिकी के विश्व प्रसिद्ध विद्वान थे। मात्र 30 वष की आयु में इलाहाबाद विश्वविद्यालय में प्रोफेसर के पद पर नियुक्त हुए। तापीय आयन सिद्धांत एवं थर्मोडायनेमिक्स में इनके महत्वपूण्र अनुसंधान हे। उनकी अनुपम कृति हे - द हिस्ट्री हिन्दू साइंस।
डाॅ॰ सलीम अली (1897-1987) ये प्रसिद्ध प्रकृति विज्ञानी एवं पक्षी विशेषज्ञ थे। इन्हें भारत का ’बर्डमैन’ भी कहते हे। इन्हें 1976 में पù विभूषण तथा 1983 में ’वन्य प्राणी संरक्षक’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
डाॅ॰ होमी जहाँगीर भाभा (1909-1966) भारत में 1948 ई॰ में गठित परमाणु ऊर्जा आयोग के अध्यक्ष होमी जहाँगीर भाभा थे। वे परमाणु अनुसंधान केन्द्र के संस्थापक थे। वे संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा आयोजित प्रथम परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण प्रयोग अधिवेशन के भी अध्यक्ष रहे थे। वे टाटा इन्स्टीट्यूट आॅर फण्डामेण्टल रिसर्च के भी पहले निदेशक थे।
सुब्रह्यण्यम चन्द्रशेखर (1910-1966) भारतीय मूल के इस अमेरिकी वैज्ञानिक ने तारो के समबंध में अनेक उल्लेखनीय अनुसंधान किए। 1983 में इन्हें विलियम फाउलर के साथ भौतिकी का नोंबेल पुरस्कार संयुक्त रूप् से प्रदान किया गया। सूर्य के द्रव्यमान के 1.4 गुने द्रव्यमान को चन्द्रशेखर सीमा कहते है।
हरगोविन्द खुराना (1992) इन्होंने आनुवांशिकी में प्रोटीन-शंश्लेषण पर अत्यन्त उल्लेखनीय अनुसंधन किए और आनुवंशिकी कोड की खोज की। 1968 में इनहें अपने अमेंरिकी सहमर्मियों के साथ चिकित्सा विज्ञान का नोबेल पुरस्कार प्राप्त हुआ।
विक्रम सारा भाई (1919-1971) सुप्रसिद्ध भारतीय वैज्ञानिक विक्रम साराभाई परमाणु ऊर्जा आयोग एवं भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन के अध्यक्ष भी रहे थे। फिजिकल रिसच्र लेबोरेट्री और इंडियन इंस्टीट्यूट आॅफ मैनेजमेंट की स्थापना में इनका अहम योगदान रहा।